लोकसभा में छात्रों के हित और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के विषय को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग काफी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर अत्यंत तीखा हमला बोला है। इसके साथ ही केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने भी राहुल गांधी के बयानों को पूरी तरह से तथ्यहीन बताते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का दृढ़ता से बचाव किया है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया है कि मुख्य विपक्षी दल का ध्यान छात्रों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक लाभ उठाने पर केंद्रित है।
आपातकाल और भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड पर उठाए सवाल
संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए सांसद अनुराग ठाकुर ने नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “सोरोस के चमचे, इंदिरा के नाते, राहुल गांधी सबसे बड़े उत्पाती।” इसके साथ ही अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस के ऐतिहासिक रिकॉर्ड की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में जब देश में आपातकाल लागू किया गया था, तब लगभग 1 लाख छात्रों को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया था।
भाजपा सांसद ने सवाल उठाया कि जो नेता और दल भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में अदालतों से जमानत पर बाहर हैं, वे किस नैतिक अधिकार के साथ विद्यार्थियों के अधिकारों की वकालत कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिन सरकारों के शासनकाल के दौरान 100 से अधिक बार पेपर लीक की घटनाएं दर्ज की गईं, उनके नेताओं द्वारा छात्रों की भलाई की बात करना पूरी तरह से हास्यास्पद और पाखंड से भरा हुआ है।
राजस्थान के मामलों और संसदीय चर्चा का दिया हवाला
अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी आंदोलनकारी छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पूरी करना चाहते हैं। इसी वजह से छात्र संगठनों और युवाओं ने उन्हें अपने विरोध प्रदर्शनों में आमंत्रित करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने मंगलवार को लोकसभा में हुई कार्यवाही का ब्योरा देते हुए बताया कि सदन में संबंधित विधेयक पर 9 घंटे तक विस्तृत चर्चा आयोजित की गई थी।
अनुराग ठाकुर के अनुसार, 9 घंटे की इस लंबी बहस के दौरान कांग्रेस पार्टी के सांसदों ने विधेयक के मूल प्रावधानों पर 9 शब्द भी नहीं बोले। इससे यह स्पष्ट होता है कि विपक्षी दल को युवाओं के भविष्य, परीक्षा प्रणाली में सुधार या पेपर लीक रोकने से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मंगलवार की चर्चा से देश के नौजवानों के सामने यह सच्चाई उजागर हो गई है कि पेपर लीक के पीछे कौन लोग शामिल थे और किस तरह राजनीतिक संरक्षण में माफिया काम कर रहे थे। उन्होंने राजस्थान का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कांग्रेस शासन के दौरान 17 पेपर लीक हुए थे, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय तत्कालीन शिक्षा मंत्री को पार्टी की राज्य इकाई का अध्यक्ष बना दिया गया।
रामदास आठवले ने प्रह्लाद जोशी पर लगे आरोपों को नकारा
दूसरी ओर, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी पर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से झूठा और निराधार करार दिया। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रह्लाद जोशी पर जो आरोप लगाए हैं, वे असत्य हैं।” आठवले ने स्पष्ट किया कि प्रह्लाद जोशी दशकों से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और राज्य में भारतीय जनता पार्टी के संगठन को मजबूत करने में उनका अभूतपूर्व योगदान रहा है।
रामदास आठवले ने कहा कि प्रह्लाद जोशी ने केंद्र सरकार में भी अपनी विभिन्न प्रशासनिक और विधायी जिम्मेदारियों को बेहद कुशलता से निभाया है। इसी अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार सौंपा है। उन्होंने विश्वास जताया कि वह इस दायित्व को पूरी निष्ठा के साथ पूरा करेंगे। आठवले ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें बिना आधार के आरोप लगाने की आदत हो गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राहुल गांधी दिल्ली में छात्रों के प्रति हमदर्दी जताते हैं, लेकिन केरल में उनकी सहयोगी सरकार के समय छात्रों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाइयां की जाती हैं।



















