पश्चिम बंगाल सरकार में पंचायत मंत्री और खड़गपुर सदर से विधायक दिलीप घोष ने रविवार को स्पष्ट किया कि राज्य प्रशासन आपराधिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दो टूक कहा कि बंगाल की धरती पर अब भय का माहौल पैदा करने वाले तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं बचा है।
अपने संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस बल को अपराधियों के प्रति किसी भी तरह की नरमी न बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि खड़गपुर के इलाके में किसी भी माफिया या असामाजिक तत्व को पैर पसारने की इजाजत नहीं दी जाएगी और कानून का राज स्थापित किया जाएगा।
अंतिम विकल्प के रूप में मुठभेड़ की बात
पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं पर तंज कसते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के तौर-तरीकों को अब पीछे छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को कड़े कदम उठाने की खुली छूट दी गई है ताकि कानून व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त किया जा सके। उन्होंने एक अहम बयान में कहा, "यदि अपराध गंभीर है और स्थिति की मांग है, तो पुलिस द्वारा मुठभेड़ का सहारा लिया जाना अंतिम विकल्प होगा।"
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से राजनीतिक सफर की शुरुआत
दिलीप घोष का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर के संगठनों से होकर गुजरा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में की थी। इस दौरान उन्होंने लंबे अरसे तक सांगठनिक दायित्व निभाए और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह समेत देश के विभिन्न हिस्सों में महत्वपूर्ण संगठनात्मक काम संभाले। इसी वैचारिक और सांगठनिक पृष्ठभूमि ने उन्हें मुख्यधारा की सक्रिय राजनीति में एक मजबूत मुकाम दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
संगठन के लंबे अनुभव को पूंजी बनाते हुए उन्होंने वर्ष 2014 में भाजपा का दामन थामा और पश्चिम बंगाल के भीतर पार्टी संगठन को विस्तार देने के अभियान में जुट गए। दिसंबर 2015 में उन्हें पश्चिम बंगाल भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जिसके बाद उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य के चुनावी फलक पर तेजी से पैर पसारे। उनके सांगठनिक कार्यकाल के दौरान ही वर्ष 2016 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई, जिसने आगे चलकर बंगाल को राष्ट्रीय राजनीति के नक्शे पर भाजपा के लिए एक प्रमुख रणभूमि के रूप में स्थापित कर दिया।
प्रमुख चुनावी सफलताएं और वर्तमान जिम्मेदारियां
अपनी बेबाक कार्यशैली और आक्रामक राजनीतिक तेवर के लिए चर्चित दिलीप घोष ने कई बड़े चुनावी संघर्षों में जीत का स्वाद चखा है। उन्होंने वर्ष 2016 में खड़गपुर सदर निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव में विजय हासिल की और इसके बाद वर्ष 2019 के आम चुनावों में मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। अपनी राजनीतिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में खड़गपुर सदर सीट से एक बार फिर शानदार जीत दर्ज की। वर्तमान में वे राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर आसीन हैं और पंचायती राज, ग्रामीण विकास, कृषि विपणन तथा पशु संसाधन विकास जैसे अहम विभागों की कमान संभाल रहे हैं।





















