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असम में कोयला और बालू सिंडिकेट के खिलाफ कांग्रेस छेड़ेगी बड़ा राज्यव्यापी आंदोलनराजनीति
17 अग॰ 2026, 11:38 am (26 दिन पहले)· 4

असम में कोयला और बालू सिंडिकेट के खिलाफ कांग्रेस छेड़ेगी बड़ा राज्यव्यापी आंदोलन

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य में हाल ही में आए भीषण बाढ़ के लिए अवैध कोयला, पत्थर और बालू सिंडिकेट को जिम्मेदार ठहराया है। रविवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में पार्टी ने इसके खिलाफ व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है।

गुवाहाटी में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान राज्यभर में बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने का ठोस फैसला किया है। पार्टी का मानना है कि कोयला, पत्थर और बालू के अवैध सिंडिकेट्स ने क्षेत्र में हालिया बाढ़ की तबाही को और अधिक गंभीर बना दिया है।

इस अहम बैठक की अध्यक्षता असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने रविवार को की, जिसका मुख्य उद्देश्य पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करना था। इस दौरान आगामी लोकसभा उपचुनाव, स्वायत्त परिषद चुनावों और नगर पालिका चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों का भी जायजा लिया गया।

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बैठक में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की गहराई से समीक्षा की गई और इसके साथ ही सोशल मीडिया विभाग की एक अलग बैठक भी आयोजित की गई। शीर्ष नेतृत्व ने ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित जिलों में जिला कांग्रेस समितियों और सेवा दल, महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस तथा एनएसयूआई जैसे सभी अनुषांगिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे राहत एवं पुनर्कार्य कार्यों का पूरा ब्योरा लिया।

कांग्रेस की ओर से जारी बयान के अनुसार, राहत अभियानों के तहत क्षतिग्रस्त मकानों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, सार्वजनिक और धार्मिक संस्थानों की सफाई की जा रही है, तथा स्कूलों में कक्षाएं दोबारा शुरू कराने में मदद के लिए श्रमदान किया जा रहा है। इसके अलावा किसानों को धान के पौधे बांटे जा रहे हैं और धान की रोपाई के लिए सीधी सहायता भी पहुंचाई जा रही है।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसने ऊपरी असम में हालिया आपदा के मुख्य कारणों के रूप में चिह्नित कोयला, पत्थर और बालू सिंडिकेट के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। इसके विरोध में पूरे राज्य में एक बड़ा जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

बैठक में इसके अलावा काजीरंगा नेशनल पार्क के चारों ओर पर्यावरण के प्रति संवेदनशील यानी इको-सेंसिटिव जोन के दायरे को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करने का भी निर्णय लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने एंग्लेंग पाथार में स्थानीय लोगों की जमीन के अधिग्रहण और उसे बड़े कॉरपोरेट घरानों को सौंपे जाने के प्रस्ताव पर भी कड़ी आपत्ति जताई।

पार्टी ने जोर देकर कहा कि वह इन तमाम जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता की राय एकजुट करने के वास्ते एक बड़े जनआंदोलन का नेतृत्व करेगी। बैठक में इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए जोनल स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

बैठक में नेताओं ने असम और अन्य विश्वविद्यालयों में कुलपति के पदों पर आरएसएस से जुड़े व्यक्तियों की नियुक्ति तथा कॉलेजों में प्राचार्यों के पदों पर वैचारिक रूप से अनुकूल उम्मीदवारों को तरजीह दिए जाने की खबरों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

इसके अलावा नेतृत्व ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर जन-जेड पीढ़ी के बीच बढ़ रही बेचैनी पर भी लंबी चर्चा की। युवाओं से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने और उन पर समाधान खोजने के वास्ते पार्टी ने एक राज्य स्तरीय युवा सम्मेलन आयोजित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

सवाल-जवाब

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने किस प्रमुख मुद्दे के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है?
पार्टी ने राज्य में कोयला, पत्थर और बालू के अवैध सिंडिकेट के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है।
इस बैठक की अध्यक्षता किसने की थी?
इस संगठनात्मक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने रविवार को की।
कांग्रेस ने हालिया बाढ़ का मुख्य कारण किसे बताया है?
पार्टी ने ऊपरी असम में आई बाढ़ और आपदा के लिए कोयला, पत्थर और बालू के अवैध सिंडिकेट्स को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है।
बैठक में काजीरंगा नेशनल पार्क को लेकर क्या विरोध दर्ज किया गया?
कांग्रेस नेताओं ने काजीरंगा नेशनल पार्क के चारों ओर इको-सेंसिटिव जोन के दायरे को 10 किलोमीटर से घटाकर 1 किलोमीटर करने के प्रस्ताव का विरोध किया।
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टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·25 दिन पहले

असम में अवैध खनन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस का यह कदम क्षेत्रीय स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक बदलाव ला सकता है। पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान और कॉरपोरेट घरानों को जमीन हस्तांतरण जैसे गंभीर विषयों को उठाकर पार्टी ने स्थानीय जनभावनाओं को भुनाने की रणनीति बनाई है। आने वाले चुनावों से पहले पर्यावरण और आजीविका का यह मुद्दा सत्तारूढ़ दल के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, जिससे राज्य की चुनावी गतिशीलता प्रभावित होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

असम में अवैध कोयला, पत्थर और बालू सिंडिकेट के खिलाफ कांग्रेस के इस राज्यव्यापी आंदोलन के ऐलान से राजनीतिक सरगर्मी तो बढ़ेगी ही, साथ ही इन प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और पर्यावरणीय अपराधों से जुड़े आपराधिक नेक्सेस पर भी जांच एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र का दबाव बन सकता है। काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन के दायरे को घटाने के प्रस्ताव और कॉर्पोरेट भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों पर जनता को एकजुट करने से राज्य में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के मोर्चे पर नए राजनीतिक संघर्ष और प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं, जिसकी निगरानी पुलिस प्रशासन को सतर्कता से करनी होगी।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·25 दिन पहले

असम में अवैध खनन और सिंडिकेट्स के खिलाफ कांग्रेस के इस नए जनआंदोलन से राज्य की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ेगा। चूंकि यह अभियान बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा और पर्यावरणीय चिंताओं जैसे गंभीर मुद्दों से जुड़ा है, इसलिए आने वाले दिनों में यह प्रशासनिक मशीनरी और सत्ता पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। इसके साथ ही, स्थानीय समुदायों और कॉर्पोरेट भूमि अधिग्रहण के मुद्दों पर जनसमर्थन जुटाने की रणनीति से राजनीतिक संघर्ष तेज होने की पूरी संभावना है।

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

असम में प्राकृतिक आपदा को अवैध खनन और सिंडिकेट से जोड़कर कांग्रेस का यह राज्यव्यापी आंदोलन एक बड़ा राजनीतिक दांव है। इस कदम से जहाँ एक तरफ सत्ताधारी दल पर पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर दबाव बढ़ेगा, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी पार्टी को आगामी स्थानीय व उपचुनावों से पहले जनता के बीच अपनी खोई जमीन मजबूत करने का एक ठोस जमीनी मौका मिल गया है।

Ravikash Gupta@ravikash·25 दिन पहले

असम में अवैध खनन और सिंडिकेट के खिलाफ कांग्रेस के इस आक्रामक रुख का सीधा असर राज्य की राजनीतिक गतिशीलता और कॉर्पोरेट निवेश के माहौल पर पड़ सकता है। खासकर जब बात एंग्लेंग पाथार में स्थानीय भूमि अधिग्रहण और काजीरंगा के इको-सेंसिटिव जोन के दायरे को घटाने जैसे मुद्दों की आती है, तो यह आंदोलन क्षेत्रीय व्यापारिक और औद्योगिक प्राथमिकताओं को बाधित कर सकता है। आगामी चुनावों से पहले यह रणनीति कॉरपोरेट घरानों और सरकार के विकास एजेंडे के सामने गंभीर नीतिगत चुनौतियां खड़ी करेगी, जिसका असर अंततः वित्तीय और निवेश प्राथमिकताओं पर भी पड़ना तय है।

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