बेंगलुरु में देश के जाने-माने उद्योगपति गौतम अदाणी और कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के बीच एक घंटे तक चली गोपनीय बैठक ने राज्य की राजनीतिक फिजाओं में हलचल बढ़ा दी है। इस मुलाकात के सामने आने के बाद से ही कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है, जिससे एक बार फिर कॉर्पोरेट जगत और राजनीति के संबंधों को लेकर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। अदाणी समूह के प्रमुख गौतम अदाणी बेंगलुरु में आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम के एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आए हुए थे। वापसी के दौरान उन्होंने सीधे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डी. के. शिवकुमार के सदाशिवनगर स्थित आवास पर पहुंचकर उनसे मुलाकात की। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय और शिवकुमार के करीबियों ने इस बैठक को केवल एक शिष्टाचार भेंट बताया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसके समय को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
सुरंग सड़क परियोजना और टेंडर की चर्चा
यह बैठक ऐसे संवेदनशील वक्त पर हुई है जब बेंगलुरु में हेब्बाल से सिल्क बोर्ड तक बनाई जाने वाली अरबों रुपये की महत्वाकांक्षी टनल रोड परियोजना के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज सबसे कम बोली लगाने वाली यानी L1 कंपनी के तौर पर सामने आई है। हालांकि इस टेंडर प्रक्रिया पर अभी तक अंतिम आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन इस मुलाकात के सामने आते ही विपक्षी दलों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि इस गुप्त बैठक का मुख्य उद्देश्य इस मेगा प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाना था। इस परियोजना के वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं को लेकर पहले से ही सुगबुगाहट चल रही थी, और इस उच्च स्तरीय मुलाकात ने उन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
भाजपा का तीखा हमला और राहुल गांधी पर तंज
इस मुलाकात के सार्वजनिक होते ही भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सत्ताधारी कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी दिल्ली में अदाणी समूह के खिलाफ लगातार आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक की कांग्रेस सरकार उनके स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार नजर आती है। आर. अशोक ने तंज कसते हुए यह भी पूछा कि क्या राहुल गांधी ने डी. के. शिवकुमार को अदाणी से मिलने की अनुमति दी थी। उन्होंने इसे कांग्रेस पार्टी का दोहरा चरित्र करार दिया और राहुल गांधी को सलाह दी कि वे बेंगलुरु आकर उन पेड़ों को गले लगाएं जो इस बहुप्रतीक्षित सुरंग सड़क परियोजना की वजह से काटे जाने की आशंका के घेरे में हैं।
अदालत तक पहुंचा टनल प्रोजेक्ट का विवाद
बेंगलुरु शहर की गंभीर ट्रैफिक समस्या के स्थायी समाधान के तौर पर पेश की जा रही इस टनल परियोजना का भाजपा शुरुआत से ही पुरजोर विरोध करती आ रही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या पहले ही इस प्रोजेक्ट के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं। अब उद्योगपति गौतम अदाणी और डी. के. शिवकुमार की इस मुलाकात ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक नया और मजबूत हथियार दे दिया है, जिससे आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में गतिरोध और बढ़ने के पूरे आसार हैं।





















