दिल्ली पुलिस ने किया इंटरनेशनल नार्को-टेरर मॉड्यूल का पर्दाफाश, कनाडा भेजे जा रहे थे ड्रग्स और पाकिस्तान से आ रहे थे हथियारश्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की आईसीसी से गुहार, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अधिक टेस्ट मैचों की मांगमाइंस-मिनरल्स एक्ट में बदलाव पर केंद्र और राज्यों में ठनी, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारीऐप्पल के नए शॉर्टकट ऐप और डिस्क्राइब ए शॉर्ट फीचर से ऐसे बनाएं बेसिक टास्क ऑटोमेशनकेरल लॉटरी समृद्धि एसएम 69 रिजल्ट आज दोपहर 3 बजे, जानिए इनाम और नियम5 से 6 लाख के बजट में नई कार खरीदें या पुरानी? 5 साल के गणित से जानें क्या है फायदे का सौदाचंदौली में त्वचा की समस्याओं के लिए हाइड्रा ट्रीटमेंट का क्रेज, जानें पूरा सेशन और डॉक्टर की सलाहराजस्थान और यूपी के स्कूल एंट्री बैन पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, वकीलों ने दी दलीलमानसिक तनाव से परेशान हैं? इन 7 आसान आदतों को अपनाकर पा सकते हैं मानसिक शांतिओणम और रक्षाबंधन पर जबरदस्त ट्रैवल रश, होटल और फ्लाइट बुकिंग में 50% से ज्यादा का उछाल
मुजफ्फरपुर में एलजेपी विधायक अमित कुमार रानू के घर पुलिस की छापेमारी, जमीन विवाद में भाई सोनू सिंह पर केस दर्ज होने के बाद कोर्ट वारंट लेकर पहुंची पुलिसराजनीति
23 अग॰ 2026, 1:40 pm (2 घंटे पहले)· 1

मुजफ्फरपुर में एलजेपी विधायक अमित कुमार रानू के घर पुलिस की छापेमारी, जमीन विवाद में भाई सोनू सिंह पर केस दर्ज होने के बाद कोर्ट वारंट लेकर पहुंची पुलिस

बिहार के मुजफ्फरपुर में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक अमित कुमार रानू के घर रविवार सुबह पुलिस ने सर्च वारंट के साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई विधायक के भाई सोनू सिंह के खिलाफ जमीन विवाद और रंगदारी के दर्ज मामले को लेकर की गई है।

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित सरस्वती नगर में रविवार सुबह लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक अमित कुमार रानू के आवास पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की। सीतामढ़ी जिले की बेलसंड विधानसभा सीट से विधायक अमित कुमार रानू के घर यह कार्रवाई कोर्ट से मिले सर्च वारंट के बाद की गई। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी के विधायक के घर हुई इस रेड के दौरान डीएसपी स्तर के अधिकारी के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा। यह पूरी कार्रवाई विधायक के भाई सोनू सिंह पर जमीन कब्जाने, बाउंड्री तोड़ने और रंगदारी मांगने के गंभीर आरोपों के सिलसिले में की गई है।

कोर्ट के सर्च वारंट के बाद संपत्ति के कागजातों की जांच

पुलिस अधिकारियों ने विधायक अमित कुमार रानू की मौजूदगी में उनके सरस्वती नगर स्थित आवास में मौजूद जमीन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की गहराई से जांच की। पुलिस टीम ने घर में रखे विभिन्न भू-स्वामित्व से संबंधित कागजातों के साथ-साथ अन्य कानूनी दस्तावेजों को खंगाला और उनकी प्रामाणिकता की जांच की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पहले ही अदालत से तलाशी लेने का सर्च वारंट प्राप्त कर लिया था। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विधायक के घर और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

ये भी पढ़ें

अहियापुर में 20 अगस्त को हुई घटना का पूरा मामला

यह मामला 20 अगस्त को अहियापुर थाना क्षेत्र में घटित एक जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। पीड़ित पक्ष द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विवादित जमीन पर बनी बाउंड्री वॉल और आसपास के कुछ निर्माणों को जबरन तोड़ा गया था। आरोप है कि विधायक के भाई सोनू सिंह करीब 20 गाड़ियों के काफिले के साथ मौके पर पहुंचे थे। इस काफिले में शामिल कई वाहनों पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का झंडा लगा हुआ था।

सोनू सिंह के साथ आए कई अज्ञात युवकों ने मौके पर मौजूद रहकर जेसीबी मशीन की मदद से जमीन की बाउंड्री को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना के दौरान पीड़ित पक्ष ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बना लिया था। इसके तुरंत बाद पीड़ित ने पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि अन्य नामजद आरोपियों की तलाश की जा रही है।

सोनू सिंह का आपराधिक इतिहास और पुलिस जांच

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सोनू सिंह के खिलाफ जमीन विवाद, अवैध कब्जे और रंगदारी से संबंधित लगभग 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले में नामजद सोनू सिंह की तलाश में भी विधायक के आवास पर पहुंचे थे। पुलिस फिलहाल 20 अगस्त की घटना के वीडियो फुटेज, पीड़ित की शिकायत, जमीन के दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। जांच में जुटी टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी घटना में विधायक के भाई और अन्य आरोपियों की क्या भूमिका थी।

विधायक का दावा और पुलिस का बयान

छापेमारी की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद विधायक अमित कुमार रानू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पुलिस कोर्ट का सर्च वारंट लेकर उनके मुजफ्फरपुर स्थित आवास पर पहुंची थी। उन्होंने बताया कि जांच अधिकारी जब घर पहुंचे, तो उन्होंने पुलिस टीम को पूरा सहयोग दिया। विधायक का कहना है कि तलाशी के दौरान पुलिस को घर से कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला और पुलिस टीम खाली हाथ वापस लौट गई।

दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही बरामद या जांचे गए दस्तावेजों और आगे की जाने वाली कानूनी कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

सवाल-जवाब

मुजफ्फरपुर में एलजेपी विधायक अमित कुमार रानू के घर पुलिस ने छापेमारी क्यों की?
पुलिस ने विधायक के घर पर कोर्ट से मिले सर्च वारंट के आधार पर कार्रवाई की, जो उनके भाई सोनू सिंह पर दर्ज जमीन विवाद, बाउंड्री तोड़ने और रंगदारी के केस से जुड़ी है।
यह मामला किस घटना से जुड़ा हुआ है?
यह मामला 20 अगस्त को मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाना क्षेत्र में हुई एक घटना से जुड़ा है, जहाँ जेसीबी मशीन से एक विवादित जमीन की बाउंड्री तोड़ी गई थी।
विधायक अमित कुमार रानू के भाई सोनू सिंह पर कितने आपराधिक मामले दर्ज हैं?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सोनू सिंह पर जमीन विवाद और रंगदारी से जुड़े करीब 13 मामले दर्ज हैं।
छापेमारी के बाद विधायक अमित कुमार रानू का क्या बयान आया?
विधायक ने कहा कि उन्होंने पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया और पुलिस को घर से कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला, जिसके बाद टीम वापस लौट गई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह मामला विधि के शासन और राजनीतिक रसूख के बीच के टकराव को स्पष्ट करता है। एक जनप्रतिनिधि के आवास पर अदालत के वारंट के साथ डीएसपी स्तर के अधिकारी की यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता को दर्शाती है। मुख्य आरोपी सोनू सिंह पर पहले से 13 मामले दर्ज होने और घटना में पार्टी के झंडों के इस्तेमाल से राजनीतिक और आपराधिक गठजोड़ की गंभीर परतें खुलती हैं। आगे की कानूनी जांच में यह देखना अहम होगा कि पुलिस विधायक की संलिप्तता के दायरे और राजनीतिक दबाव से निपटने में कितनी निष्पक्ष रहती है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह घटना दिखाती है कि किस तरह स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण अपराधियों के लिए ढाल बन जाता है। बीस वाहनों के काफिले में पार्टी के झंडों का इस्तेमाल और जेसीबी से तोड़फोड़ साफ संकेत देती है कि आरोपियों में कानून का खौफ खत्म हो चुका है। अब जांच का दायरा सिर्फ दस्तावेजों की पड़ताल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी देखना होगा कि इस तरह के रसूखदार तत्वों को सत्ता और संगठन स्तर पर किस तरह का समर्थन मिल रहा था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR