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गुलाबी नगरी में उमड़ा जनसैलाब, जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हजारों लोगराजस्थान
23 अग॰ 2026, 8:40 pm (1 घंटे पहले)· 2

गुलाबी नगरी में उमड़ा जनसैलाब, जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे हजारों लोग

जयपुर की प्राचीन विरासत को बचाने और परकोटा क्षेत्र से हो रहे पलायन के खिलाफ युवा शक्ति मंच राजस्थान के बैनर तले एक विशाल भगवा आक्रोश रैली निकाली गई।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक परकोटे के मूल स्वरूप को बचाए रखने के लिए आम जनता सड़कों पर उतर आई है। युवा शक्ति मंच राजस्थान की ओर से एक भगवा आक्रोश रैली का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में नागरिकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पूरा शहर धार्मिक नारों और भगवा रंग में रंगा हुआ नजर आया।

खोले के हनुमान जी मंदिर से शुरू हुआ मार्च

यह विशाल मार्च दिल्ली रोड स्थित प्रसिद्ध खोले के हनुमान जी मंदिर से रवाना हुआ। सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजामों के बीच आम नागरिकों का जोश देखते ही बन रहा था। इस आयोजन की खास बात यह रही कि सबसे आगे भगवा वस्त्र पहने 2100 महिलाएं हाथों में धार्मिक पताकाएं थामकर चल रही थीं, जो नारी शक्ति की मिसाल पेश कर रही थीं। उनके पीछे उमड़े विशाल जनसमूह के साथ सैकड़ों दोपहिया और चौपहिया वाहन भी चल रहे थे, जिन पर सवार युवा लगातार नारे लगा रहे थे।

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रामलीला मैदान तक गूंजे नारे

विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई यह रैली एमआई रोड स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में जाकर संपन्न हुई। रास्ते में जगह-जगह स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने पुष्पवर्षा कर इस यात्रा का स्वागत किया। रामलीला मैदान पहुंचने के बाद यह मार्च एक बड़ी जनसभा में बदल गया, जहां देश के विभिन्न कोनों से पहुंचे संतों ने सभा को संबोधित करते हुए जयपुर के मूल स्वरूप को संरक्षित करने पर विशेष बल दिया।

विरासत बचाने की पुरजोर मांग

युवा शक्ति मंच राजस्थान के प्रदेश संयोजक सुनील सिंह शेखावत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जयपुर की सांस्कृतिक पहचान केवल एक शहर की धरोहर नहीं है। उन्होंने कहा कि परकोटे के भीतर से बहुसंख्यक समाज का पलायन एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है और इस जनसांख्यिकीय बदलाव को रोकना बेहद जरूरी है।

प्रशासन के लिए एक बड़ा संदेश

यह पूरा आयोजन केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह शहर के सामाजिक ताने-बाने को बचाने के लिए एक सामूहिक हुंकार थी। इसके जरिए प्रशासन तक यह बात पहुंचाई गई कि गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक वैभव की रक्षा के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

सवाल-जवाब

जयपुर में यह रैली क्यों निकाली गई थी?
यह रैली परकोटा क्षेत्र से हो रहे पलायन को रोकने और शहर की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की मांग को लेकर निकाली गई थी।
इस आयोजन का आह्वान किसने किया था?
इस विशाल भगवा आक्रोश रैली का आयोजन युवा शक्ति मंच राजस्थान द्वारा किया गया था।
रैली की शुरुआत किस स्थान से हुई थी?
यह रैली दिल्ली रोड स्थित खोले के हनुमान जी मंदिर से आरंभ हुई थी।
रैली का समापन कहां हुआ था?
यह रैली एमआई रोड स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में समाप्त हुई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 मिनट पहले

यह विरोध प्रदर्शन प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर एक संवेदनशील मोड़ ले सकता है। जब किसी शहर में जनसांख्यिकीय बदलाव और पलायन को लेकर इस तरह की बड़ी लामबंदी होती है, तो यह कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस जनसभा के बाद विरासत संरक्षण और सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने के लिए क्या ठोस नीतियां लागू करता है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 मिनट पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस तरह के आयोजनों का असर केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह नीति-निर्माण और ज़मीनी प्रशासनिक प्राथमिकताओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। परकोटे के भीतर जनसांख्यिकीय बदलाव और पलायन के जिस गंभीर मुद्दे को इस रैली में उठाया गया है, उससे निपटने के लिए अब जिला प्रशासन और शहरी विकास निकायों पर व्यावहारिक व दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने का भारी दबाव बढ़ गया है।

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