लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी पार्टी का रुख पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि देश में लागू आरक्षण किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा दी गई कोई खैरात नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर नागरिकों का मौलिक संवैधानिक अधिकार है।
आरक्षण की समीक्षा पर कड़ा ऐतराज़
चिराग पासवान ने स्पष्ट शब्दों में यह भी कहा है कि इस देश में आरक्षण को खत्म करने की बात तो दूर, इसकी समीक्षा किए जाने का विचार भी उनकी पार्टी को कदापि स्वीकार्य नहीं है। सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर अधिकारों की रक्षा करना उनकी पार्टी की पहली प्राथमिकता रही है।
संसद से लेकर सड़क तक गूंज
इससे पहले फरवरी 2020 में भी संसद के भीतर चिराग पासवान ने इसी बात को पूरी मजबूती के साथ उठाया था। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने एक पोस्ट के माध्यम से अपने पुराने भाषण का जिक्र करते हुए इस बात को दोहराया कि वंचित वर्गों के उत्थान के लिए यह व्यवस्था बेहद जरूरी है और इस पर किसी भी प्रकार का आघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



















