भोजपुर के शाहपुर बिटौली में कथित पुलिस एनकाउंटर का मामला अब राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से गंभीर चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, जिसमें कथित तौर पर आरोपी को सरेंडर करते हुए दिखाया गया है, संजय झा ने स्पष्ट किया है कि इस वीडियो ने पुलिस की एनकाउंटर थ्योरी पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुशासन के राज में कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह अपराधी हो या पुलिसकर्मी।
वायरल वीडियो से गहराया विवाद: संजय झा ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
पटना में पत्रकारों से बात करते हुए JDU नेता संजय झा ने स्वीकार किया कि इंटरनेट पर प्रसारित हो रहे वीडियो को देखकर मन में कई शंकाएं पैदा होती हैं। उन्होंने कहा कि जो वीडियो सामने आया है, उसे देखने के बाद निश्चित रूप से संदेह की स्थिति बनती है। इस गंभीर घटना के बाद राज्य सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। हालांकि, संजय झा का मानना है कि केवल निलंबन की कार्रवाई इस मामले में काफी नहीं है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस कथित फर्जी मुठभेड़ की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि पूरा सच जनता के सामने आ सके।
वर्दी के पीछे छिपने वालों को नहीं मिलेगी छूट
संजय झा ने सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली NDA सरकार की प्राथमिकताओं को दोहराते हुए कहा कि इस शासन में कानून का राज सबसे ऊपर है। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि विपक्ष इस पूरी घटना को पुलिस द्वारा की गई हत्या करार दे रहा है, तो उन्होंने बेहद कड़ा रुख अपनाया। JDU नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब सरकार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती है, तो उसमें वर्दीधारी अपराधी भी शामिल होते हैं। अगर रक्षक बनकर पुलिसकर्मी ही कानून का उल्लंघन करेंगे या किसी निर्दोष पर गोली चलाएंगे, तो उन्हें भी आम अपराधियों की तरह ही कड़ी सजा भुगतनी होगी।
चार पुलिसकर्मी पहले ही निलंबित, विपक्ष ने बताया हत्या
यह पूरा विवाद भोजपुर जिले के शाहपुर बिटौली में हुए भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर से पैदा हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मुठभेड़ के दौरान आरोपी ने पहले ही अपने हथियार फेंक दिए थे और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उस पर गोलियां चला दीं। इस घटना के बाद से ही पुलिस की थ्योरी पर उंगलियां उठ रही हैं। संजय झा ने गृह विभाग और बिहार सरकार से मांग की है कि किसी बेहद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर इस पूरे मामले की कड़ियों को आपस में जोड़ा जाए। साथ ही, इस जांच के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जानी चाहिए ताकि बिना किसी बाहरी दबाव के दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।













