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बीजेपी की नई टीम में एएमयू के पूर्व कुलपति तारीक मंसूर बने राष्ट्रीय उपाध्यक्षराजनीति
17 अग॰ 2026, 5:21 pm (25 दिन पहले)· 3

बीजेपी की नई टीम में एएमयू के पूर्व कुलपति तारीक मंसूर बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई कार्यकारिणी में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर तारीक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया गया है। इस नई सांगठनिक संरचना में पार्टी ने बड़ा निर्णय लेते हुए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर प्रोफेसर तारीक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के रूप में कार्य कर रहे प्रोफेसर मंसूर को संगठन के शीर्ष पदों में शामिल करके पार्टी ने एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है।

चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्र से राजनीति का सफर

प्रोफेसर तारीक मंसूर की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक जाने-माने डॉक्टर, शल्य चिकित्सक और शिक्षाविद के तौर पर रही है। उन्होंने लंबे समय तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और प्रिंसिपल के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 2017 से 2023 तक उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का पद संभाला। वीसी के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए। कुलपति पद से इस्तीफा देने के उपरांत बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य (एमएलसी) मनोनीत किया था। अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की केंद्रीय टीम में जगह देकर संगठन ने उनके दीर्घकालिक अनुभव और बौद्धिक क्षमता पर अपना भरोसा जताया है।

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मुस्लिम समाज और बौद्धिक वर्ग तक पहुंच बनाने की रणनीति

केंद्रीय संगठन में प्रोफेसर तारीक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के निर्णय के पीछे बीजेपी की एक सोची-समझी रणनीति देखी जा रही है। पार्टी पिछले कुछ समय से प्रबुद्ध और शिक्षित मुस्लिम समाज को अपने साथ जोड़ने के प्रयासों में लगी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाली एएमयू जैसी शैक्षणिक संस्था के पूर्व प्रमुख और पेशेवर डॉक्टर को अपनी केंद्रीय टीम का प्रमुख चेहरा बनाकर बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने का कदम उठाया है।

संगठन और आगामी अभियानों पर प्रभाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश से आने वाले प्रोफेसर तारीक मंसूर की यह नियुक्ति न केवल बीजेपी के आंतरिक सांगठनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगी, बल्कि आने वाले चुनावों और अभियानों में पार्टी के समावेशी एजेंडे को भी गति देगी। नितिन नवीन की नई कार्यकारिणी में उनकी उपस्थिति दर्शाती है कि पार्टी अब शिक्षित वर्ग और विशेषज्ञों को संगठन की मुख्यधारा में आगे रखने की दिशा में काम कर रही है।

सवाल-जवाब

तारीक मंसूर कौन हैं?
तारीक मंसूर एक प्रसिद्ध डॉक्टर, सर्जन, शिक्षाविद और राजनीतिज्ञ हैं, जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर रह चुके हैं।
बीजेपी की नई टीम में उन्हें क्या पद दिया गया है?
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई कार्यकारिणी में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
एएमयू के वीसी के रूप में उनका कार्यकाल कब तक था?
वे वर्ष 2017 से 2023 तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के रूप में कार्यरत रहे।
वीसी पद से हटने के बाद उन्हें क्या जिम्मेदारी मिली थी?
वीसी पद से इस्तीफा देने के बाद बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) के रूप में मनोनीत किया था।
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टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·25 दिन पहले

तारीक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाना सिर्फ सांगठनिक बदलाव नहीं, बल्कि आर्थिक और कॉरपोरेट जगत में संदेश देने की चाल है। उच्च शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से आने वाले इस चेहरे को शीर्ष पद देने से यह साफ है कि दल अब पेशेवर और बौद्धिक वर्ग को अपने साथ जोड़कर निवेश और विकास के एजेंडे को मजबूत करना चाहता है, जिसका असर भविष्य के कॉर्पोरेट और स्टार्टअप परिदृश्य पर भी पड़ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

रविकेश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह नियुक्ति केवल राजनीतिक समीकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध प्रशासनिक नियंत्रण और बौद्धिक नीति-निर्माण से है। एएमयू जैसे केंद्रीय संस्थान के पूर्व कुलपति और चिकित्सा पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलना यह दर्शाता है कि पार्टी भविष्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुधारों जैसे नीतिगत मामलों में अपने राजनीतिक रुख को अधिक पेशेवर और डेटा-संचालित बनाना चाहती है।

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