भारतीय जनता पार्टी ने भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के गायन को सीमित करने के प्रयासों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण 10 सूत्रीय संकल्प प्रस्ताव पारित किया है। पार्टी ने कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा 19 अगस्त 2026 को लिए गए उस निर्णय की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है, जिसमें 1937 के पुराने प्रस्ताव को दोहराते हुए वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो पदों के गायन की बात कही गई थी। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वंदे मातरम् केवल कुछ पंक्तियां नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति अटूट श्रद्धा, स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक मंत्र और राष्ट्रीय चेतना का अजर-अमर प्रतीक है।
कांग्रेस के फैसले की निंदा और राष्ट्रीय गीत के सम्मान का संकल्प
भाजपा द्वारा पारित इस संकल्प पत्र में मुख्य रूप से कांग्रेस के रुख की तीव्र आलोचना की गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि 19 अगस्त 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा लिया गया निर्णय देश की ऐतिहासिक विरासत के विपरीत है। भारतीय जनता पार्टी पूर्ण वंदे मातरम् की गरिमा, राष्ट्रीय स्वरूप और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी का मानना है कि छह पदों वाले इस संपूर्ण गीत को किसी भी प्रकार की संकीर्णता में नहीं बांधा जा सकता, क्योंकि यह भारत की आजादी की लड़ाई की पहचान रहा है।
संविधान सभा और संसद के वैधानिक संरक्षण की पुष्टि
संकल्प में कानूनी और संवैधानिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा गया है कि वर्ष 1950 में संविधान सभा द्वारा की गई ऐतिहासिक घोषणा और वर्ष 2026 में भारतीय संसद द्वारा पारित अधिनियम के जरिए वंदे मातरम् को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान ही वैधानिक दर्जा और संरक्षण प्रदान किया गया है। भाजपा ने इस स्थापित स्थिति की पूर्ण दृढ़ता से पुष्टि की है। इसके साथ ही कांग्रेस को चेताया गया है कि उसकी कार्यसमिति का कोई भी राजनीतिक प्रस्ताव देश के संवैधानिक संस्थानों और संसद द्वारा बनाए गए कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। वर्ष 1937 का राजनीतिक समझौता वर्ष 1950 के संवैधानिक फैसले और वर्ष 2026 के संसदीय कानून के समक्ष मान्य नहीं है।
तुष्टीकरण की राजनीति और ऐतिहासिक संदर्भ का उद्घाटन
प्रस्ताव में इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया है कि राष्ट्रीय गीत को सांप्रदायिक दबावों, राजनीतिक तुष्टीकरण अथवा वोट-बैंक की राजनीति के अधीन करने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा ने संकल्प लिया है कि वह देश की जनता के सामने उन तमाम ऐतिहासिक और राजनीतिक परिस्थितियों को उजागर करेगी, जिनके तहत अतीत में वंदे मातरम् के गायन को सीमित करने का प्रयास हुआ था। इसमें तत्कालीन मुस्लिम लीग की आपत्तियां और बाद में पनपी अलगाववादी राजनीति के तथ्य शामिल हैं। इसके साथ ही, पार्टी महात्मा गांधी के उस ऐतिहासिक कथन को भी जन-जन तक पहुंचाएगी, जिसमें उन्होंने वंदे मातरम् को साम्राज्यवाद-विरोधी चेतना और शुद्धतम राष्ट्रीय भावना का प्रतीक करार दिया था।
देशव्यापी अभियान और युवा पीढ़ी को जागरूक करने की योजना
वंदे मातरम् के अर्थ और महत्व को हर नागरिक तक पहुंचाने के उद्देश्य से भाजपा कार्यकर्ताओं के माध्यम से एक व्यापक अभियान शुरू किया जाएगा। इस राष्ट्रव्यापी पहल का मुख्य उद्देश्य गीत के छह पदों के अर्थ, इसके इतिहास और गौरवशाली गाथा को देश के कोने-कोने तक पहुंचाना है। विशेष रूप से युवा पीढ़ी को इस अभियान से जोड़ा जाएगा, ताकि समय के साथ इस राष्ट्रीय गीत का इतिहास विस्मृत न हो। आने वाली पीढ़ियां यह अच्छी तरह समझ सकें कि इस गीत के साथ भारत के स्वाधीनता संग्राम, अमर बलिदानियों के त्याग और राष्ट्र-जागरण की कितनी गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
2047 के विकसित भारत का संकल्प
प्रस्ताव के अंत में स्पष्ट किया गया है कि राजनीतिक सुविधा या चुनावी गणित के लिए वंदे मातरम् की मर्यादा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह किसी एक राजनीतिक दल की बात नहीं, बल्कि भारत के मान-सम्मान और उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों की साझी विरासत का सवाल है, जिन्होंने देश की बलिवेदी पर अपना जीवन न्योछावर कर दिया। देशवासियों का आह्वान करते हुए कहा गया है कि अंग्रेजों की औपनिवेशिक सत्ता भी वंदे मातरम् के शब्दों से भयभीत रहती थी, क्योंकि इसने भारतीयों में प्रतिरोध की ज्वाला जलाई थी। वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता का उद्घोष 'वंदे मातरम्' बना था, और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण का महाघोष भी 'वंदे मातरम्' ही रहेगा।



















