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चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, राहुल और खरगे ने राजघाट पर दिया धरनाराजनीति
8 अक्तू॰ 2026, 11:30 pm (1 घंटे पहले)· 0

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, राहुल और खरगे ने राजघाट पर दिया धरना

कनॉट प्लेस में विपक्षी नेताओं के रणनीतिक मंथन के बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे बसों में सवार होकर राजघाट पहुंचे, जहां सुरक्षा बलों की निगरानी में एक घंटे का शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ।

कनॉट प्लेस स्थित मोएट होटल में गुरुवार को उस समय सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई, जब दोपहर के भोजन के दौरान विपक्षी दलों के दिग्गज नेता आगे की रूपरेखा तैयार करने बैठे। होटल के भीतर जब आगामी रणनीति पर गहन चर्चा चल रही थी, उस वक्त बाहर दिल्ली पुलिस के जवान सतर्क पहरे पर तैनात थे। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभिषेक बनर्जी, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई प्रमुख विपक्षी सांसद शामिल हुए। होटल के बाहर लगातार जमा हो रहे कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह उत्सुकता बनी रही कि बीते दो दिनों के घटनाक्रम के बाद विपक्ष का अगला कदम क्या होगा।

लंच टेबल पर तय हुआ राजघाट कूच का फैसला

बैठक खत्म होने के बाद जब मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, अभिषेक बनर्जी और मनोज झा बाहर निकले, तब साफ हुआ कि विपक्षी प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के दफ्तर या जंतर-मंतर की ओर मार्च नहीं करेगा। नेताओं ने बापू की समाधि राजघाट जाकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया। इसके बाद सांसदों और नेताओं को लेकर तीन बसें रवाना हुईं, जिनमें खुद राहुल गांधी भी सवार थे। बस के आगे-पीछे हाथों में तिरंगा लिए भारी संख्या में कार्यकर्ता पैदल मार्च करते हुए चल रहे थे, जिससे मध्य दिल्ली की सड़कों पर समर्थकों का बड़ा हुजूम दिखाई दिया।

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ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से हटने को लेकर है। इस मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन विरोध प्रदर्शन जारी रहा। इससे पहले 6 अक्टूबर को जब विपक्षी नेता पैदल मार्च पर निकले थे, तब पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया था। इसके बाद 7 अक्टूबर को भी पैदल मार्च के दौरान नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। इसी पृष्ठभूमि में 8 अक्टूबर को नेताओं ने पैदल चलने के बजाय बसों के जरिए कूच करने का फैसला किया। बसों का काफिला मिंटो रोड होकर राजघाट की दिशा में बढ़ा। रास्ते में कुछ प्रदर्शनकारियों ने भारतीय जनता पार्टी कार्यालय की ओर जाने वाली सड़क पर बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन दिल्ली पुलिस ने वहां पहले से ही मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा बना रखा था।

राजघाट पर एक घंटे का शांतिपूर्ण धरना

राजघाट परिसर में एनएसयूआई और कांग्रेस के कार्यकर्ता पहले से ही तख्तियां लेकर मौजूद थे और नारे लगा रहे थे। चूंकि 6 अक्टूबर को नेताओं ने अचानक आकाशवाणी भवन पहुंचकर लगभग आठ घंटे तक धरना दिया था, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस बात पर थी कि बसों का काफिला कहीं अचानक अपना रास्ता न बदल ले। राजघाट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गई, जहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर नमन कर श्रद्धांजलि दी। प्रशासन की ओर से विपक्षी नेताओं को राजघाट में केवल एक घंटे रुकने की इजाजत दी गई थी। निर्धारित समय पूरा होने के बाद सभी सांसद और नेता वहां से रवाना हो गए और उस दिन का विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ।

कांग्रेस मुख्यालय के बाहर बीजेपी महिला मोर्चा का जवाबी मोर्चा

जिस समय विपक्षी नेता राजघाट पर एकत्र थे, उसी दौरान राजनीतिक टकराव का एक और दृश्य कांग्रेस मुख्यालय के बाहर देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस दफ्तर के सामने एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहां भी महिला और पुरुष सुरक्षाकर्मियों की टुकड़ियां मुस्तैद थीं। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

सवाल-जवाब

विपक्षी दल किस मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं?
विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
गुरुवार को विपक्षी नेताओं की बैठक कहां हुई थी?
यह बैठक कनॉट प्लेस स्थित मोएट होटल में दोपहर के भोजन के दौरान हुई थी।
बैठक में कौन-कौन से प्रमुख नेता मौजूद थे?
बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अभिषेक बनर्जी और मनोज झा सहित कई सांसद उपस्थित थे।
नेताओं ने विरोध प्रदर्शन के लिए किस स्थान को चुना?
नेताओं ने चुनाव आयोग या जंतर-मंतर जाने के बजाय राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि पर जाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
नेताओं को राजघाट पर रुकने की कितनी देर की अनुमति मिली थी?
दिल्ली पुलिस ने विपक्षी नेताओं को राजघाट परिसर में केवल एक घंटे रुकने की अनुमति दी थी।
कांग्रेस मुख्यालय के बाहर किसने प्रदर्शन किया?
भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय के बाहर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·11 मिनट पहले

सड़क पर मार्च करने से रोक लगे तो बस पकड़कर राजघाट पहुंच जाना रणनीति तो हो सकती है, पर क्या इससे वाकई कोई बड़ा बदलाव आएगा, इस पर थोड़ा संदेह है।

Rohan Verma@rohan-verma·33 मिनट पहले

चुनाव आयोग पर दबाव बनाने के लिए विपक्ष का यह नया पैंतरा है। राजघाट पर धरना देने से सरकार पर असर पड़ेगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·32 मिनट पहले

रोहन जी, आपकी बात ठीक है, पर क्या सच में सिर्फ राजघाट जाने से सरकार इनकी मांग मानेगी?

Ravikash Gupta@ravikash·58 मिनट पहले

संसद सत्र से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। चुनाव आयोग पर इस तरह का दबाव आने वाले दिनों में वित्तीय बाजारों और निवेशकों की धारणा पर भी असर डाल सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·57 मिनट पहले

रविकेश जी, बात सही है कि माहौल गरमाया है, पर चुनाव आयोग के बाहर सुरक्षा व्यवस्था और लगातार हिरासत में लेने की कार्रवाई पर भी तो गौर कीजिए। धारा-144 और बैरिकेडिंग के बीच ये प्रदर्शन आखिर कानून-व्यवस्था के किस दायरे में चल रहे हैं?

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