मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी खेमे की नाराजगी अब कानूनी दांवपेच और सड़क पर उतरने की रणनीतियों के रूप में सामने आ रही है। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर देश की शीर्ष अदालत में पहले से ही कानूनी चुनौती लंबित है, और इसी बीच आयोग के फैसलों पर सवाल खड़े करती एक नई याचिका भी अदालत के समक्ष पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस ताज़ा अर्जी पर अगले सप्ताह सुनवाई करने की रजामंदी दे दी है, जबकि दूसरी ओर राजनीतिक दलों ने सड़कों पर बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू करने की रूपरेखा तैयार कर ली है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती और लगाए गए आरोप
शीर्ष अदालत में दाखिल याचिकाओं में चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज के तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि SIR से संबंधित कई नीतिगत निर्णय आयोग के अन्य सदस्यों की सहमति लिए बिना ही तय कर दिए गए। दायर अर्जी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध ठोस कदम उठाने की मांग भी शामिल की गई है। अदालत ने इन दलीलों पर विचार करते हुए मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है, हालांकि ये तमाम बातें याचिकाकर्ताओं की ओर से रखे गए आरोप हैं जिन पर न्यायिक निर्णय आना अभी बाकी है।
मुंबई के शिवाजी पार्क से आंदोलन की घोषणा
चुनाव आयोग के वर्तमान रुख के खिलाफ अब अन्य राजनीतिक संगठन भी लामबंद होने लगे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ व्यापक जनांदोलन छेड़ने का ऐलान कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष निर्णायक मोड़ तक पहुंचेगा और जब तक ज्ञानेश कुमार पद से नहीं हटते, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन थमेगा नहीं। दीपके ने बताया कि यह आंदोलन मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क से प्रारंभ किया जाएगा। पार्टी की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज करने, चालू SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने और पुरानी मतदाता सूची के आधार पर ही चुनाव संपन्न कराने की मांग रखी गई है।
ममता बनर्जी के कड़े तेवर और वोट चोरी का आरोप
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोला है। देश की राजधानी में विपक्षी खेमे के शीर्ष नेताओं के परस्पर विमर्श के दौरान ममता ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार सत्ताधारी दल बीजेपी की 'कठपुतली' बनकर काम कर रहे हैं और सत्तापक्ष 'वोट चोरी' के सहारे चुनावी जीत हासिल कर रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र में सत्तारूढ़ व्यवस्था की उल्टी गिनती अब शुरू हो चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के उद्देश्य से सभी विपक्षी दल आपसी मतभेदों को दरकिनार कर एक मंच पर एकजुट हुए हैं। ममता के अनुसार, अब ज्ञानेश कुमार की विदाई आवश्यक हो गई है और केंद्र की मोदी सरकार का सत्ता से बाहर होना भी तय है।
अधीर रंजन चौधरी का चौंकाने वाला सियासी प्रस्ताव
इस तीखी बयानबाजी के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने एक अप्रत्याशित राजनीतिक दांव चलते हुए ममता बनर्जी को मूल दल में लौटने का खुला प्रस्ताव दे दिया। चौधरी ने याद दिलाया कि ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर कांग्रेस से ही शुरू हुआ था, लिहाजा अगर वह अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का विलय कांग्रेस में कर देती हैं तो इससे संयुक्त विपक्ष का आधार बेहद मजबूत होगा। चौधरी ने ममता बनर्जी से आग्रह किया कि वे अपने वर्तमान सांसदों और विधायकों के साथ कांग्रेस में वापस लौट आएं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल के भीतर ममता बनर्जी के नेतृत्व को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करने के लिए तैयार है।























