असम के सिलचर नगर निगम चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने जबरदस्त जीत दर्ज करते हुए 32 वार्डों पर अपना परचम लहराया है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस मात्र दो सीटों पर सिमट कर रह गया। यह स्थानीय निकाय चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बजाय पारंपरिक मतपत्रों यानी बैलेट पेपर के जरिए कराया गया था। एसआईआर के विरोध प्रदर्शनों के बीच संपन्न हुए इस चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखा राजनीतिक हमला बोला।
बैलेट पेपर से हुए मतदान पर मुख्यमंत्री की टिप्पणी
चुनाव नतीजों के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस लगातार ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल उठाती रही है, लेकिन मतपत्रों से कराए गए चुनाव में भी जनता ने उसे नकार दिया। सरमा ने कहा, 'बैलेट पेपर पर कांग्रेस थोड़ा ज्यादा ही हार गई।' उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मशीनों में कभी-कभी लोग भ्रमित होकर नोटा दबा देते हैं या गलत बटन दब जाता है, लेकिन मतपत्र पर मतदान की प्रक्रिया से हर मतदाता भली-भांति वाकिफ होता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जब भी चुनाव मतपत्रों से कराए जाते हैं, कांग्रेस का प्रदर्शन और भी खराब हो जाता है।
धार्मिक अल्पसंख्यक बहुल वार्डों के आंकड़े
सिलचर के क्षेत्रीय समीकरणों पर चर्चा करते हुए सरमा ने बताया कि इस नगर निकाय क्षेत्र में 10 वार्ड धार्मिक अल्पसंख्यकों की आबादी वाले थे। इन 10 वार्डों को लेकर ऐसी राजनीतिक संभावना थी कि अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन से कांग्रेस वहां आसानी से जीत हासिल कर सकती है। हालांकि नतीजों में कांग्रेस को वहां से भी पर्याप्त जनसमर्थन नहीं मिला और पूरी परिषद में वह सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई। इन नतीजों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने उससे बेहतर प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जिसके चलते कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक गई। सरमा ने इस मौके पर नया राजनीतिक नारा देते हुए कहा कि विपक्षी दल मशीन के साथ-साथ मतपत्र पर भी पराजित होने वाला है।
सिलचर नगर निगम का संपूर्ण सीट परिणाम
सिलचर नगर निकाय के कुल 42 वार्डों के लिए चुनावी प्रक्रिया निर्धारित की गई थी, जिनमें से 40 वार्डों में तीन अक्टूबर को मतदान हुआ। वार्ड संख्या 9 और वार्ड संख्या 20 में पहले ही मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी थी, क्योंकि भाजपा के प्रत्याशी बिजेंद्र प्रसाद सिंह और भक्ति सेन तालुकदार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए थे। कुल 42 वार्डों के अंतिम नतीजों में भाजपा ने 32 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि उसकी सहयोगी असम गण परिषद ने 2 सीटों पर जीत हासिल की। इसके विपरीत कांग्रेस केवल 2 वार्ड ही जीत सकी, वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 6 सीटें गईं।



















