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एनडीए में शामिल होने के न्योते पर अभिजीत दिपके का तंज, पूछा एक महीने पहले एंटी-नेशनल कौन थाराजनीति
19 अग॰ 2026, 8:33 am (24 दिन पहले)· 3

एनडीए में शामिल होने के न्योते पर अभिजीत दिपके का तंज, पूछा एक महीने पहले एंटी-नेशनल कौन था

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले द्वारा आरपीआई (ए) में शामिल होने का प्रस्ताव दिए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए तीखा तंज कसा है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले द्वारा अपनी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) में शामिल होने का न्योता दिए जाने के बाद दिपके ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की।

प्रस्ताव और दिपके की तीखी प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले की पार्टी RPI (A) केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाले एनडीए का प्रमुख हिस्सा है। आठवले ने सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके को अपनी पार्टी और गठबंधन में शामिल होने का विचार करने का प्रस्ताव दिया था। इस पेशकश के सामने आने के बाद दिपके ने इंस्टाग्राम पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, “अभी एक महीने पहले तो मैं तुम्हारे लिए एंटी-नेशनल था?”

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दबाव समूह और राजनीतिक खींचतान

अभिजीत दिपके की अगुवाई वाली कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य रूप से एक दबाव समूह के तौर पर काम करती है, जो युवाओं और सामाजिक मुद्दों को लगातार उठाती रही है। दिपके ने पहले भी यह दावा किया था कि उन पर सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होने के लिए धमकियों और दबाव का सहारा लिया जा रहा था। इसके साथ ही, आंदोलनों के दौरान हुए लाठीचार्ज और अस्पताल में भर्ती घायल कार्यकर्ताओं जैसे देवेंद्र महतो का हाल जानने के बाद दिपके ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर भी कड़े सवाल खड़े किए थे।

सवाल-जवाब

रामदास आठवले ने अभिजीत दिपके को क्या प्रस्ताव दिया?
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को अपनी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) में शामिल होने का न्योता दिया, जो एनडीए का हिस्सा है।
प्रस्ताव पर अभिजीत दिपके ने क्या प्रतिक्रिया दी?
अभिजीत दिपके ने इंस्टाग्राम पर एक रिपोर्ट साझा करते हुए तंज कसा कि महज एक महीने पहले जिन्हें एंटी-नेशनल बताया जा रहा था, उन्हें अब गठबंधन में क्यों बुलाया जा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) क्या है?
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अभिजीत दिपके द्वारा स्थापित एक राजनीतिक संगठन है, जो मुख्य रूप से युवाओं और नागरिक मुद्दों पर दबाव समूह के रूप में कार्य करता है।
अभिजीत दिपके ने इससे पहले क्या आरोप लगाए थे?
दिपके ने पहले आरोप लगाया था कि उन्हें धमकियां दी गई थीं और सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होने का दबाव बनाया गया था।
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टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·23 दिन पहले

अभिजीत दिपके और रामदास आठवले के बीच का यह राजनीतिक घटनाक्रम सिर्फ सत्ताई समीकरण नहीं, बल्कि आज की फूड और लाइफस्टाइल संस्कृति पर भी परोक्ष असर डालता है। जब युवा राजनीतिक दबावों और पुलिसिया लाठीचार्ज से जूझ रहे हों, तो यह माहौल युवाओं की मानसिक सेहत, फूड चॉइस और शहरी कैफे संस्कृति को प्रभावित करता है। आने वाले समय में ऐसे तनावपूर्ण हालात युवा नेतृत्व को हाशिए पर धकेल सकते हैं, जिससे ग्रासरूट लेवल पर सामाजिक सहभागिता और वैकल्पिक मुद्दों पर बात करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·23 दिन पहले

अभिजीत दिपके और रामदास आठवले के बीच का यह राजनीतिक घटनाक्रम मनोरंजन और सिनेमा जगत के लिए भी एक दिलचस्प सबक है। जिस तरह से मुख्यधारा की राजनीति में विरोधियों को अचानक अपने पाले में लाने की पटकथा रची जाती है, वैसी ही यू-टर्न वाली कहानियां अब वेब सीरीज और ओटीटी के राजनीतिक ड्रामों में खूब भुनाई जा रही हैं। आने वाले समय में इस तरह के सत्ता समीकरणों का असर कंटेंट क्रिएशन और युवा-केंद्रित सिनेमा के विषयों पर भी साफ दिखाई देगा, जहां विद्रोही तेवर और राजनीतिक सौदेबाजी मुख्य कथानक बनेंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·23 दिन पहले

यह घटनाक्रम राजनीतिक गठजोड़ और दबाव की राजनीति के बीच के विरोधाभास को उजागर करता है। जब एक दबाव समूह के नेता को कुछ ही हफ्तों के भीतर तीखे वैचारिक विरोध से सीधे गठबंधन के प्रस्ताव तक का सामना करना पड़ता है, तो यह मुख्यधारा की राजनीति में अवसरवादिता और राजनीतिक व्यवहारिता के बदलते समीकरणों को दर्शाता है। इससे आने वाले समय में युवाओं और सामाजिक मुद्दों पर आधारित क्षेत्रीय दबाव समूहों की मोलभाव करने की क्षमता और राजनीतिक रणनीतियों पर गहरा असर पड़ सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

अभिजीत दिपके और रामदास आठवले के बीच का यह घटनाक्रम क्षेत्रीय राजनीति में दबाव समूहों की बदलती भूमिका को उजागर करता है। जब एक तरफ युवा आधारित दल लगातार पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव का सामना कर रहे हैं, वहीं गठबंधन की राजनीति में ऐसे दलों को पाले में लाने के प्रयास भी तेज हो गए हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या इस तरह की राजनीतिक पेशकशों से क्षेत्रीय विरोध के स्वर शांत होते हैं या फिर युवा नेतृत्व सत्तारूढ़ गठबंधन के सामने और अधिक आक्रामक रुख अख्तियार करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

यह घटनाक्रम सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच का लेन-देन नहीं, बल्कि राज्य तंत्र और असहमति के बीच चल रहे कानूनी संघर्ष का गंभीर पहलू है। जब किसी युवा दबाव समूह के प्रमुख को एक महीने पहले 'राष्ट्र-विरोधी' कहा जाए और फिर सत्ता समीकरण साधने के लिए उसी व्यक्ति को गठबंधन का न्योता दिया जाए, तो यह आपराधिक और राजनीतिक मामलों में जांच एजेंसियों तथा पुलिस प्रशासन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि लाठीचार्ज और कानूनी दबावों के बीच इस तरह की सौदेबाजी हावी रहेगी, तो सार्वजनिक व्यवस्था और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा डगमगाएगा।

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