राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायाद ऑफिस की याद सताने पर जरूर देखें ये 6 बेहतरीन ऑफिस कॉमेडी फिल्में, मिलेगा भरपूर मनोरंजनगंगा के बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के घांघर में गहराया चारे का संकट, भुखमरी की कगार पर पहुंचे मवेशीअफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी परेशानी, नेट प्रैक्टिस के दौरान चोटिल हुए ईशान किशननई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का बिना प्रोटोकॉल वाला इशारा, अजित डोभाल से पुतिन की मुलाकात के क्या हैं कूटनीतिक मायने?कर्क साप्ताहिक राशिफल 13-19 सितंबर के लिए: मंगल के गोचर से करियर और आर्थिक जीवन में बदलाव, जानें अपना भाग्यभाई किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद नॉर्वे की राजकुमारी ऐस्ट्रिड का निधन121 दिनों तक देवगुरु बृहस्पति की वक्री चाल: 6 राशियों के करियर और धन लाभ में आएगा बड़ा मोड़पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य, एयर इंडिया घटना के बाद DGCA का आदेशगूगल फोटोज की इन 10 सीक्रेट सेटिंग्स से बचाएं स्टोरेज और सुरक्षित रखें अपनी प्राइवेसी
गृह मंत्री अमित शाह पर बयानबाजी के बाद राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, विशेषाधिकार शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने 28 अगस्त तक मांगा जवाबराजनीति
14 अग॰ 2026, 11:20 pm (28 दिन पहले)· 1

गृह मंत्री अमित शाह पर बयानबाजी के बाद राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, विशेषाधिकार शिकायत पर लोकसभा सचिवालय ने 28 अगस्त तक मांगा जवाब

संसद के मानसून सत्र के दौरान पेपर लीक रोधी विधेयक पर चर्चा के समय अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी करने पर राहुल गांधी को लोकसभा सचिवालय ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक नई संसदीय परेशानी में घिर गए हैं। संसद के मानसून सत्र के दौरान पेपर लीक विरोधी कानून, यानी सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा चल रही थी। इसी बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर राहुल गांधी द्वारा की गई टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के दो वरिष्ठ सांसदों की शिकायत के बाद लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी को औपचारिक नोटिस भेजकर उनसे जवाब तलब किया है।

लोकसभा सचिवालय का निर्देश और तय समय सीमा

लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी किए गए पत्र में राहुल गांधी को दोनों शिकायतकर्ता सांसदों की अर्जियों की प्रतियां भी साथ में भेजी गई हैं। सचिवालय ने कांग्रेस नेता को निर्देश दिया है कि वे 28 अगस्त तक इन शिकायतों पर अपना विस्तृत स्पष्टीकरण और टिप्पणियां लिखकर जमा कराएं। राहुल गांधी द्वारा जवाब प्रस्तुत किए जाने के बाद, पूरी फाइल को अंतिम विचार और आगे की अनुशासनात्मक प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने पेश किया जाएगा।

ये भी पढ़ें

अनुराग ठाकुर और संजय जायसवाल की शिकायत के मुख्य बिंदु

यह पूरी अनुशासनात्मक प्रक्रिया सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के दो प्रमुख सांसदों की लिखित शिकायतों के आधार पर शुरू हुई है। भाजपा के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने 29 जुलाई को पहली शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से प्रक्रियात्मक नियमों का हवाला देते हुए राहुल गांधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसके अगले ही दिन, 30 जुलाई को पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग ठाकुर ने भी एक पृथक शिकायत सौंपी।

दोनों भाजपा सांसदों का आरोप है कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ असंसदीय, अमर्यादित और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अनुराग ठाकुर ने अपनी शिकायत में विशेष रूप से रेखांकित किया कि राहुल गांधी ने संसदीय नियमों की अनदेखी करते हुए गृह मंत्री पर गंभीर आक्षेप लगाए, जबकि नियम के अनुसार किसी सदस्य पर आरोप लगाने से पहले पूर्व सूचना या नोटिस देना अनिवार्य होता है। शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि बिना पूर्व नोटिस दिए सदन के पटल पर ऐसे आरोप लगाना विशेषाधिकार का उल्लंघन और सदन की अवमानना की श्रेणी में आता है।

संसदीय नियमों की अवहेलना और बढ़ता सियासी घमासान

संसदीय परंपराओं और प्रक्रियाओं के अनुसार, जब भी कोई सांसद सदन के भीतर किसी मंत्री या अन्य सदस्य पर सीधा व्यक्तिगत आरोप लगाता है, तो उसे पहले लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित मंत्री को लिखित सूचना देनी होती है ताकि तथ्य सामने रखे जा सकें। भाजपा सांसदों का दावा है कि इस कानूनी बहस के दौरान नियमों को दरकिनार किया गया। इस नए प्रशासनिक कदम के बाद आने वाले दिनों में सत्तापक्ष और विपक्षी खेमे के बीच जुबानी जंग और अधिक तीखी होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

सवाल-जवाब

लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी को नोटिस क्यों भेजा है?
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणियों के संबंध में भाजपा सांसदों की शिकायतों पर स्पष्टीकरण मांगने के लिए यह नोटिस भेजा गया है।
राहुल गांधी से कब तक जवाब मांगा गया है?
लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी को 28 अगस्त तक अपना विस्तृत जवाब जमा करने का निर्देश दिया है।
किन नेताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी?
भाजपा के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने 29 जुलाई को और पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद अनुराग ठाकुर ने 30 जुलाई को शिकायत दर्ज कराई थी।
भाजपा सांसदों का मुख्य आरोप क्या है?
उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने गृह मंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया और बिना किसी पूर्व नोटिस के आरोप लगाकर संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन किया।
राहुल गांधी का जवाब मिलने के बाद क्या प्रक्रिया होगी?
जवाब प्राप्त होने के बाद लोकसभा सचिवालय उसे अंतिम निर्णय और आगे की कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष प्रस्तुत करेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·27 दिन पहले

संसदीय बहसों में राजनीतिक टकराव का असर अब व्यक्तिगत तनाव और मानसिक दबाव के रूप में जनप्रतिनिधियों पर भी दिखने लगा है, जिससे विधायी कार्यवाहियों का माहौल और सदन की गरिमा प्रभावित होती है। ऐसे तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल में मानसिक स्वास्थ्य और सहनशीलता बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा असर नीतिगत चर्चाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े विधायी निर्णयों की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। आगामी 28 अगस्त तक आने वाले स्पष्टीकरण से यह तय होगा कि इस विशेषाधिकार मामले में आगे क्या अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·28 दिन पहले

संसदीय विशेषाधिकार हनन का यह नोटिस केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर विधायी कार्यवाहियों और कॉर्पोरेट-बाज़ार की नीतिगत अनिश्चितताओं पर पड़ सकता है। जब सदन के भीतर नीतिगत बहसों के दौरान इस तरह के टकराव बढ़ते हैं, तो निवेशकों और वैश्विक विश्लेषकों का ध्यान विधायी गतिरोध पर जाता है, जिससे प्रमुख आर्थिक विधेयकों और सुधारों के पारित होने की गति प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। 28 अगस्त को जवाब दाखिल होने के बाद स्पीकर का अगला कदम संसद के मानसून सत्र के बाद के राजनीतिक और आर्थिक माहौल की दिशा तय करेगा।

Michael Anderson@michael-anderson·28 दिन पहले

संसदीय विशेषाधिकार मामलों में इस तरह का टकराव अमेरिकी कांग्रेस जैसी विधायी प्रणालियों में भी देखा जाता है, जहां partisan polarization नीतिगत निर्णयों को धीमा कर सकता है। राहुल गांधी को 28 अगस्त तक जवाब देना है, जिसके बाद अध्यक्ष का निर्णय अमेरिकी संसद की एथिक्स कमेटियों और विशेषाधिकार समितियों की कार्यवाही की याद दिलाता है। यह स्थिति भारत के नीतिगत माहौल में अनिश्चितता पैदा कर सकती है, जिसका असर वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·28 दिन पहले

संसद के मानसून सत्र के दौरान सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर हुई बहस और गृह मंत्री पर टिप्पणियों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब विशेषाधिकार हनन के मोर्चे पर गंभीर होता दिख रहा है। 28 अगस्त की समयसीमा तक राहुल गांधी के जवाब के बाद, लोकसभा अध्यक्ष के पास फाइल जाने से यह तय है कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच सदन के भीतर और बाहर सियासी टकराव और अधिक तेज होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

संसदीय मामलों और विशेषाधिकार हनन के कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में नोटिस के बाद जवाब दाखिल करना और फिर अध्यक्ष द्वारा विशेषाधिकार समिति को मामला भेजना एक मानक प्रक्रिया है। हालांकि, तय तिथि तक स्पष्टीकरण आने के बाद अध्यक्ष का यह निर्णय अहम होगा कि क्या इस प्रकरण को आगे की जांच के लिए भेजा जाए, जिससे आगामी संसदीय सत्रों की कार्यप्रणाली पर सीधा असर पड़ सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR