राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायाद ऑफिस की याद सताने पर जरूर देखें ये 6 बेहतरीन ऑफिस कॉमेडी फिल्में, मिलेगा भरपूर मनोरंजनगंगा के बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के घांघर में गहराया चारे का संकट, भुखमरी की कगार पर पहुंचे मवेशीअफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी परेशानी, नेट प्रैक्टिस के दौरान चोटिल हुए ईशान किशननई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का बिना प्रोटोकॉल वाला इशारा, अजित डोभाल से पुतिन की मुलाकात के क्या हैं कूटनीतिक मायने?कर्क साप्ताहिक राशिफल 13-19 सितंबर के लिए: मंगल के गोचर से करियर और आर्थिक जीवन में बदलाव, जानें अपना भाग्यभाई किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद नॉर्वे की राजकुमारी ऐस्ट्रिड का निधन121 दिनों तक देवगुरु बृहस्पति की वक्री चाल: 6 राशियों के करियर और धन लाभ में आएगा बड़ा मोड़पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य, एयर इंडिया घटना के बाद DGCA का आदेशगूगल फोटोज की इन 10 सीक्रेट सेटिंग्स से बचाएं स्टोरेज और सुरक्षित रखें अपनी प्राइवेसी
ईरान और अमेरिका के बीच शांतिदूत बनने की जुगत में असीम मुनीर, तेहरान की यात्रा पर जाएंगे पाक सेना प्रमुखराजनीति
23 अग॰ 2026, 9:39 pm (19 दिन पहले)· 2

ईरान और अमेरिका के बीच शांतिदूत बनने की जुगत में असीम मुनीर, तेहरान की यात्रा पर जाएंगे पाक सेना प्रमुख

पाकिस्तान अपने आंतरिक मोर्चों पर चुनौतियों से जूझने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश में जुटा है। इसी क्रम में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर तेहरान का दौरा करने वाले हैं।

अपने देश के भीतर बलूचिस्तान और पीओके जैसे गंभीर संकटों को संभालने में असफल रहने के बावजूद पाकिस्तान ने वैश्विक मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभाने की ठान ली है। अमेरिका और ईरान के बीच गहराते तनाव के बीच पाकिस्तान अब दोनों देशों के बीच सुलह कराने की कोशिशों में जुट गया है। इसी कूटनीतिक पहल के तहत पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर सोमवार, 24 अगस्त को ईरान की राजधानी तेहरान की यात्रा पर रवाना होंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी इस उच्च स्तरीय दौरे की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।

कड़े प्रतिबंधों और ठप पड़ी वार्ताओं के साये में दौरा

असीम मुनीर की यह तेहरान यात्रा ऐसे नाज़ुक वक्त पर हो रही है जब अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध थोपने की पूरी तैयारी कर चुका है। इसके साथ ही, इस साल जून महीने में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को टालने या खत्म करने को लेकर जो आपसी समझ बनी थी, उसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ती खटास को पाटने के लिए इस्लामाबाद अब सक्रिय रूप से बीच-बचाव की मुद्रा में आ गया है.

ये भी पढ़ें

किन अहम मुद्दों पर होगी तेहरान में चर्चा

सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, असीम मुनीर तेहरान पहुंचकर वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठकें करेंगे। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई कूटनीति वार्ता को दोबारा पटरी पर लाना है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले नए प्रतिबंधों, सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों के आवागमन और लगातार सुलगते तनाव के अन्य पहलुओं पर भी विचार-विमर्श होने की पूरी संभावना है। पाकिस्तान की यह कोशिश है कि दोनों पक्ष किसी तरह बातचीत के रास्ते पर वापस लौट आएं.

वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए क्यों अहम है होर्मुज का मुद्दा

होर्मुज का समुद्री मार्ग दुनिया भर के ऊर्जा बाजार के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया भर में भारी मात्रा में कच्चे तेल और एलएनजी की सप्लाई होती है। इस क्षेत्र में तनाव और टकराव बढ़ने का नुकसान केवल ईरान या अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ईरान ने हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले कुछ जलपोतों के खिलाफ काफी सख्त रुख अपनाया है, जिससे तेल आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव काफी बढ़ गया है.

मध्यस्थ की भूमिका में क्यों कूद पड़ा है पाकिस्तान

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बढ़ने के बाद से ही इस्लामाबाद ने खुद को दोनों पक्षों के बीच एक प्रभावी सेतु या मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर दिया है। इससे पहले भी पाकिस्तान की तरफ से दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने के प्रयास किए गए थे, और असीम मुनीर का यह तेहरान दौरा उसी कूटनीति का अगला चरण है। मुनीर के इस दौरे से ठीक पहले पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी ईरान की यात्रा की थी। इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना प्रमुख की ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ भी बातचीत हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान एक साथ तेहरान और वाशिंगटन दोनों के संपर्क में बने रहने की रणनीति पर चल रहा है.

मक्का रक्षा समझौते और कूटनीतिक उलझनें

इस पूरी यात्रा का महत्व इस बात से भी बढ़ जाता है कि गत 7 अगस्त को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत तीनों देशों ने सहमति जताई है कि यदि उनमें से किसी पर भी कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हुआ हमला माना जाएगा। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सामूहिक रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करना है। हालांकि, इसे ऐसे समय में आकार दिया गया है जब ईरान और अमेरिका आमने-सामने हैं, जिससे पाकिस्तान के लिए एक कठिन कूटनीतिक संतुलन बनाने की चुनौती पैदा हो गई है.

क्या मक्का समझौते में ईरान की होगी एंट्री

कुछेक रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि इस नए रक्षा ढांचे के भीतर ईरान को भी शामिल किए जाने पर चर्चा चल रही है। हालांकि, यह अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ईरान को औपचारिक रूप से इस व्यवस्था से कैसे जोड़ा जा सकता है। अगर ऐसा संभव होता है, तो यह मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक बहुत बड़ा फेरबदल साबित हो सकता है, क्योंकि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के साथ ईरान का आना क्षेत्रीय तनाव को थामने के लिए एक नया मंच मुहैया करा सकता है।

तनाव कम करने की राह में बड़ी चुनौतियां

इसके बावजूद, ईरान इस नए समझौते को लेकर बहुत अधिक सतर्कता बरत रहा है। यही वजह है कि असीम मुनीर के लिए तेहरान के हुक्मरानों को यह विश्वास दिलाना आसान नहीं होगा कि यह गठबंधन ईरान के विरुद्ध नहीं है। इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी यह साफ किया है कि मक्का समझौता किसी खास देश के निशाने पर नहीं है, बल्कि इसका मकसद केवल सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है। सऊदी अरब और तुर्की समेत कई प्रमुख देशों की अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा जरूरतें इसी क्षेत्र से पूरी होती हैं, इसलिए पाकिस्तान ऐसी राह तलाश रहा है जिससे तेल आपूर्ति और समुद्री यातायात फिर से सामान्य हो सके।

क्या असीम मुनीर हासिल कर पाएंगे सफलता

विश्लेषकों का मानना है कि असीम मुनीर की यह तेहरान यात्रा महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं है। ऐसे समय में जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है और अमेरिका नए प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है, अगर पाकिस्तान दोनों पक्षों को वार्ता की टेबल पर लाने में कामयाब हो जाता है, तो यह इस्लामाबाद के खाते में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता होगी। हालांकि, इसके लिए राह बेहद कठिन है क्योंकि पाकिस्तान को एक ही वक्त पर ईरान, अमेरिका, सऊदी अरब और तुर्की के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों में बहुत ही सावधानी से संतुलन साधना होगा।

सवाल-जवाब

असीम मुनीर की तेहरान यात्रा कब निर्धारित है?
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर सोमवार, 24 अगस्त को ईरान की राजधानी तेहरान की यात्रा पर जाने वाले हैं।
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच क्या भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है?
पाकिस्तान दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू कराने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
मक्का रक्षा समझौता किन देशों के बीच हुआ है?
मक्का रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने हस्ताक्षर किए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
इस रास्ते से दुनिया भर में बड़े पैमाने पर तेल और एलएनजी की आवाजाही होती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·18 दिन पहले

यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि किस तरह कूटनीति का उपयोग अक्सर घरेलू संकटों और विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए किया जाता है। बलूचिस्तान और पीओके जैसी आंतरिक समस्याओं को सुलझाने में नाकाम रहने वाला प्रशासन यदि वैश्विक मंच पर शांतिदूत बनने की कोशिश करे, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उसकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच मध्यस्थता की यह पहल कितनी सफल होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश इस्लामाबाद के प्रभाव को कितना महत्व देते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

असीम मुनीर की तेहरान यात्रा केवल कूटनीतिक मध्यस्थता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक समीकरणों पर इसके गहरे प्रभाव हो सकते हैं। आंतरिक अशांति से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह देखना अहम होगा कि क्या उसकी यह पहल वैश्विक ऊर्जा गलियारों और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच कोई ठोस संवाद स्थापित कर पाती है या यह केवल कूटनीतिक दिखावा बनकर रह जाती है।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·18 दिन पहले

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की यह कोशिश ऐसे समय हो रही है जब वाशिंगटन के नीति-निर्माता तेहरान पर अधिकतम दबाव की रणनीति पर कायम हैं। व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम और नए प्रतिबंधों को लेकर पहले से ही संशय की स्थिति है। ऐसे में, पाकिस्तानी सेना प्रमुख की यह कूटनीतिक पहल अमेरिकी विदेश नीति के रणनीतिकारों के लिए कितनी स्वीकार्य होगी, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या वॉशिंगटन वास्तव में इस्लामाबाद को इस मोर्चे पर कोई बड़ी भूमिका सौंपने को तैयार है, या यह केवल कूटनीतिक दिखावा बनकर रह जाएगा?

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

पाकिस्तान के सेना प्रमुख की यह तेहरान यात्रा केवल कूटनीतिक मध्यस्थता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और वित्तीय स्थिरता पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का डर पहले से ही वैश्विक शेयर बाजारों और कमोडिटी फ्यूचर्स में अनिश्चितता पैदा कर रहा है। यदि अमेरिका नए प्रतिबंध लगाता है और ईरान इस समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ाता है, तो वैश्विक मुद्रास्फीति और वित्तीय बाजारों पर इसका गंभीर असर दिख सकता है, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर है।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

पाकिस्तान द्वारा इस मध्यस्थता की कोशिश के दूरगामी भू-राजनीतिक निहितार्थ हैं। जब देश के भीतर आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर गंभीर चुनौतियाँ बनी हुई हैं, तब सेना प्रमुख का तेहरान जाना यह दर्शाता है कि रावलपिंडी वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए हरसंभव कूटनीतिक कार्ड खेल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य की संवेदनशीलता के बीच इस कूटनीति के नतीजे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा तय करेंगे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR