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जंतर-मंतर पर डिंपल यादव के तेवर ने सपा में 2027 की सियासत छेड़ दीराजनीति
27 जुल॰ 2026, 10:24 pm (1 दिन पहले)· 0

जंतर-मंतर पर डिंपल यादव के तेवर ने सपा में 2027 की सियासत छेड़ दी

नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान मैनपुरी सांसद डिंपल यादव के तेवर वायरल हुए, जिसके बाद यूपी चुनाव 2027 में उन्हें सपा का यूथ आइकॉन बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुआ एक प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की सियासत में सुर्खियां बटोर रहा है। मौका नीट-यूजी पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के आंदोलन का था, लेकिन उस दिन सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं मैनपुरी की सपा सांसद डिंपल यादव। पुलिस की सख्ती के बीच सड़क पर उतरकर छात्रों के साथ खड़ी हुईं डिंपल यादव की तस्वीरें अब यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि क्या यूपी चुनाव 2027 में समाजवादी पार्टी उन्हें अपना सबसे बड़ा युवा चेहरा बनाने की तैयारी में है।

जंतर-मंतर पर उस दिन क्या हुआ

कॉकरोच जनता पार्टी और कई छात्र संगठनों ने नीट-यूजी पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर संसद घेराव का ऐलान किया था। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर भारी बैरिकेडिंग कर दी और जब छात्र आगे बढ़े तो पुलिस ने बल प्रयोग किया। गहमागहमी के इसी माहौल में डिंपल यादव अपने साथियों के साथ सीधे छात्रों के बीच पहुंच गईं। अपनी हमेशा की शांत और सौम्य छवि से हटकर, साड़ी पहने डिंपल यादव पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ती नजर आईं और हिरासत में लिए जा रहे छात्रों से बात करने की कोशिश करती दिखीं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर रातों-रात वायरल हो गया। इससे भी आगे बढ़कर, लाठीचार्ज में घायल हुए छात्रों को पुलिस की वैन से बाहर निकालकर उन्हें पानी पिलाते और संभालते हुए डिंपल यादव घंटों मौके पर डटी रहीं, जो किसी सांसद की सामान्य सार्वजनिक छवि से बिल्कुल अलग नजारा था।

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डिंपल यादव की तीखी प्रतिक्रिया

घटना के बाद डिंपल यादव ने पुलिस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा, "यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है।" उनका आरोप था कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों की छाती पर लाठियां बरसाई गईं। पुलिस से भिड़ते हुए और घायल छात्रों के आंसू पोंछते हुए डिंपल यादव की यह निडर तस्वीर लाखों युवाओं, खासकर जेन-जी पीढ़ी के दिलों में सीधे उतर गई है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि एक सांसद का इस तरह मैदान में उतरकर घंटों डटे रहना आम बात नहीं है, और यही वजह है कि यह तस्वीरें इतनी तेजी से फैलीं।

क्या अखिलेश यादव उन्हें यूथ आइकॉन बनाएंगे

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी जंतर-मंतर पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे "क्रांति की शुरुआत" करार दिया। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि यूपी चुनाव 2027 मुख्य रूप से युवाओं की बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मुद्दों पर लड़ा जाएगा। यही वजह है कि अखिलेश यादव अब डिंपल यादव को पार्टी के सबसे प्रमुख युवा और महिला चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। सपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक अब तक डिंपल यादव पार्टी के चुनावी अभियानों और प्रचार कार्यक्रमों तक ही सीमित रहती थीं, लेकिन जंतर-मंतर की घटना ने यह साबित कर दिया कि वे युवाओं के हक में सड़क पर उतरकर सीधी लड़ाई भी लड़ सकती हैं। पार्टी के भीतर अब उन्हें अखिलेश यादव के बाद 'नंबर-2' और सबसे भरोसेमंद युवा आवाज के तौर पर देखा जाने लगा है।

PDA फॉर्मूले से जुड़ेगा युवा और महिला वोट

उत्तर प्रदेश में युवा और महिला मतदाताओं का एक बड़ा तबका अब तक किसी एक पार्टी से पूरी तरह जुड़ा नहीं रहा है। डिंपल यादव की यह नई, आक्रामक और संवेदनशील छवि आने वाले चुनाव पर गहरा असर डाल सकती है। विश्लेषकों के मुताबिक अखिलेश यादव के 'PDA' फॉर्मूले को आगे बढ़ाने में डिंपल यादव जेन-जी छात्रों और महिला मतदाताओं से सीधा जुड़ाव बना सकती हैं। पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि अगर यह छवि यूं ही बनी रही, तो डिंपल यादव सिर्फ मैनपुरी की सांसद नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में युवाओं और महिलाओं की आवाज बनकर उभर सकती हैं।

सपा को मिलेगा दोहरा फायदा

विश्लेषकों का कहना है कि अगर अखिलेश यादव औपचारिक रूप से युवा अभियानों की कमान डिंपल यादव को सौंपते हैं, तो इससे समाजवादी पार्टी को दोहरा फायदा मिल सकता है। पहला फायदा महिलाओं में पैठ बढ़ने का है, क्योंकि डिंपल यादव की सादगी और निडरता महिला मतदाताओं को तेजी से आकर्षित कर सकती है। दूसरा फायदा युवाओं का भरोसा मजबूत होने का है, क्योंकि भर्ती परीक्षाओं में देरी और गड़बड़ियों से निराश जेन-जी पीढ़ी को डिंपल यादव के रूप में एक ऐसी नेता दिखेगी, जो उनके साथ खुद लाठियां खाने को भी तैयार है।

लखनऊ की सियासत पर असर

जंतर-मंतर पर पुलिस के सामने डटकर खड़ी रहीं डिंपल यादव की इन तस्वीरों ने सिर्फ दिल्ली का सियासी पारा नहीं बढ़ाया, बल्कि लखनऊ की सत्ता की लड़ाई का रुख भी मोड़ दिया है। अगर समाजवादी पार्टी इस मौके का फायदा 2027 तक बनाए रखने में कामयाब रहती है, तो डिंपल यादव यूपी चुनाव 2027 में पार्टी की सबसे बड़ी यूथ आइकॉन बनकर उभर सकती हैं।

सवाल-जवाब

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को क्या हुआ था?
नीट-यूजी पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग कर बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए।
डिंपल यादव ने वहां क्या किया?
वे पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़कर हिरासत में लिए जा रहे छात्रों से बात करने की कोशिश करती दिखीं और घायल छात्रों को पानी पिलाकर उन्हें संभालती रहीं।
डिंपल यादव ने पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?
उन्होंने इसे 'लोकतंत्र के लिए काला दिन' बताया और आरोप लगाया कि छात्रों की छाती पर लाठियां बरसाई गईं।
अखिलेश यादव ने इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे 'क्रांति की शुरुआत' करार दिया।
क्या अखिलेश यादव डिंपल यादव को यूपी चुनाव 2027 में यूथ आइकॉन बनाएंगे?
पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव डिंपल यादव को पार्टी के सबसे प्रमुख युवा-महिला चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं, हालांकि अभी इसकी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
सपा को इससे क्या फायदा हो सकता है?
विश्लेषकों के मुताबिक इससे पार्टी को महिला मतदाताओं में पैठ बढ़ाने और भर्ती परीक्षाओं से नाराज युवाओं का भरोसा जीतने में मदद मिल सकती है।
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