अमेरिकी प्रशासन की तरफ से लागू की जा रही सख्त आव्रजन नीतियों के बीच लातीनी बस्तियों में अप्रत्याशित चुनावी हलचल देखने को मिल रही है। जिन इलाकों में आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन यानी आईसीई (ICE) की सख्त कार्रवाई का व्यापक असर देखा गया, वहां लोग सहमकर घरों में बैठने के बजाय रिकॉर्ड संख्या में मतदान केंद्रों का रुख कर रहे हैं। दक्षिण टेक्सास में मतदाताओं को प्रेरित करने वाले संगठन लूपे वोट्स (LUPE Votes) से जुड़े प्रचारक माइकल मिरेल्स के अनुसार, स्थानीय स्तर पर ऐसा कोई डर नजर नहीं आ रहा कि आईसीई की मौजूदगी की आशंका लोगों को वोट डालने से रोक देगी। बल्कि सच यह है कि इस सख्त कार्रवाई से उपजे गुस्से ने आम नागरिकों को मतदान केंद्रों तक जाने के लिए और अधिक प्रेरित किया है।
साल 2024 के चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अप्रत्याशित समर्थन देने वाले कई लातीनी समुदाय अब इन कठोर आव्रजन नीतियों से सीधे प्रभावित हुए हैं। इन अभियानों का सबसे बड़ा असर लातीनी बहुल रिहायशी इलाकों पर पड़ा है, जहां कई कानून का पालन करने वाले अमेरिकी नागरिक भी सुरक्षा जांच और कार्रवाइयों के दायरे में आ गए। हालांकि आंतरिक सुरक्षा विभाग और सरकार की ओर से लगातार यह स्पष्ट किया गया कि मतदान के दिन पोलिंग बूथों पर सुरक्षा बल या आईसीई एजेंट तैनात करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, आंतरिक सुरक्षा विभाग के सचिव मार्कवेन मुलिन और अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच के बयानों से किसी न किसी तरह की तैनाती के संकेत लगातार मिलते रहे। इसके बावजूद लातीनी मतदाताओं का स्पष्ट संदेश है कि वे डरने के बजाय पहले से कहीं अधिक संख्या में बाहर निकलकर अपना मत दर्ज कराएंगे।
शुरुआती मतदान के आंकड़े बयां कर रहे हैं बड़ी भागीदारी
मतदान केंद्रों पर लोगों की इस सक्रियता की पुष्टि शुरुआती मतदान के आधिकारिक आंकड़ों से भी हो रही है। लोग हालिया चुनावों की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। सोमवार दोपहर तक 5 करोड़ 70 लाख (57 मिलियन) से अधिक लोग शुरुआती मतदान के तहत अपने वोट डाल चुके थे, जो कि 2022 के मध्यावधि चुनावों में पड़े कुल शुरुआती वोटों से 1 करोड़ (10 मिलियन) अधिक है। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के इलेक्शन लैब के विश्लेषणात्मक आंकड़ों के अनुसार, कई प्रमुख राज्यों में लातीनी समुदाय की कुल मतदान में हिस्सेदारी पिछले सालों की तुलना में काफी बढ़ गई है।
टेक्सास राज्य के आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति बेहद दिलचस्प नजर आती है। डेटा कंपनी टारगेटस्मार्ट के सलाहकार और डेमोक्रेट रणनीतिकार टॉम बोनियर ने एक साक्षात्कार में बताया कि टेक्सास में 4 लाख से अधिक ऐसे लोगों ने 2026 में वोट डाला है, जिन्होंने 2024 के चुनाव में मतदान नहीं किया था। खास बात यह है कि इस नए मतदान समूह में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले लातीनी मतदाताओं की है। यह रुख केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में समान रूप से देखा जा रहा है।
टारगेटस्मार्ट के आंकड़ों के अनुसार, 27 अक्टूबर तक देशभर में 38 लाख (3.8 मिलियन) हिस्पैनिक और लातीनी मतदाता अपने मतपत्र जमा कर चुके थे। अगर इसकी तुलना 2022 के मध्यावधि चुनाव से की जाए, तो उस समय इसी तारीख तक 23.5 लाख (2.35 मिलियन) हिस्पैनिक और लातीनी मतदाताओं ने वोट डाले थे। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा इलेक्शन लैब के प्रमुख माइकल मैकडोनाल्ड ने अपने विश्लेषण में स्पष्ट किया कि टेक्सास में जहां भी बड़े हिस्पैनिक समुदाय मौजूद हैं, वहां मतदान की दर राज्य की तेज औसत गति से भी कहीं अधिक दर्ज की जा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि टेक्सास के साथ-साथ फ्लोरिडा, जॉर्जिया और नॉर्थ कैरोलिना में भी हिस्पैनिक मतदाता पिछले चुनावों की तुलना में काफी उच्च स्तर पर मतदान कर रहे हैं।
स्थानीय सीटों पर वोटों का बड़ा असर
नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाले देश के सबसे बड़े लातीनी संगठन लीग ऑफ यूनाइटेड लैटिन अमेरिकन सिटिजन्स द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से भी इस रुझान की पुष्टि होती है। संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, टेक्सास के 15वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में, जिसके तहत रियो ग्रांडे वैली का एक हिस्सा भी आता है, 12,000 से अधिक ऐसे नागरिकों ने शुरुआती मतदान किया जिन्होंने पिछले चुनावों में हिस्सा नहीं लिया था।
यह नया मतदान इस सीट के चुनावी नतीजों पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि वर्तमान रिपब्लिकन सांसद मोनिका डी ला क्रूज ने 2022 में करीब 12,000 वोटों के अंतर से ही जीत दर्ज की थी। ऐसे में नए मतदाताओं की यह भारी संख्या किसी भी दल के समीकरण को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।
जमीनी कार्यकर्ताओं की सीधी और स्पष्ट रणनीति
लातीनी मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने के लिए देशभर में दर्जनों संगठन और कार्यकर्ता महीनों से दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। 614 आईसीई वॉच और ओहायो गुड नेबर नेटवर्क की आयोजक लिलियाना रिवेरा बैमन का कहना है कि उन्होंने मतदाताओं से संवाद करते समय किसी भी बात को छुपाने या झूठा भरोसा देने की कोशिश नहीं की। कार्यकर्ताओं ने लोगों के सामने वही कड़वी सच्चाई रखी जो जमीन पर घट रही थी।
लिलियाना रिवेरा बैमन के अनुसार, लोगों को साफ शब्दों में समझाया गया कि उनके पास केवल दो विकल्प हैं। या तो वे मतदान केंद्र पर पहुंचकर अपनी आवाज दर्ज कराएं और हालात को बदलने की कोशिश करें, या फिर घर पर बैठकर आने वाले दो या तीन साल, अथवा उससे भी लंबे समय तक इसी तरह की सख्त कार्रवाइयों का सामना करते रहें। कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस सीधी और दो-टूक बातचीत ने बड़ी संख्या में लोगों को बूथ तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया।
कठिन परिस्थितियों और सुरक्षा अभियानों का प्रत्यक्ष सामना कर चुके नागरिकों का व्यक्तिगत अनुभव भी इस जागरूकता का एक बड़ा आधार बना है। सत्तावादी प्रवृत्तियों और राजनीतिक उग्रवाद के खिलाफ सक्रिय संस्था स्टेट्स एट द कोर की कार्यकारी निदेशक जिल गार्वे बताती हैं कि जो लोग सबसे कठिन स्थितियों से गुजरे हैं, वे समझ चुके हैं कि किसी भी संकट से निपटने के लिए तैयारी कितनी जरूरी होती है।
जिल गार्वे का मानना है कि पहले ही इस तरह के दबाव को झेल चुके समुदायों के भीतर से अब डर काफी हद तक कम हो चुका है। वे जानते हैं कि परिस्थितियां कितनी तेजी से गंभीर रूप ले सकती हैं, इसलिए वे हर स्थिति का सामना करने के लिए खुद को मानसिक और सामाजिक रूप से तैयार रखकर मतदान करने निकल रहे हैं।
एरिज़ोना, जॉर्जिया और नेवादा से आ रही जमीनी रिपोर्ट
एरिज़ोना में कामगार वर्ग के लातीनी मतदाताओं के बीच सक्रिय संगठन लिविंग यूनाइटेड फॉर चेंज इन एरिज़ोना (LUCHA) के स्वयंसेवकों ने हाल ही में हजारों घरों के दरवाजे खटखटाए। संगठन के प्रवक्ता सीज़र फिएरोस ने बताया कि अकेले एक हफ्ते के भीतर 1,000 लोगों ने उन्हें पुष्टि की कि वे पहले ही वोट डाल चुके हैं या डाक मतपत्र भेज चुके हैं। सीज़र फिएरोस का कहना है कि यह एक बेहद सकारात्मक संकेत है जो पहले कभी देखने को नहीं मिला। लोग खुलकर कह रहे हैं कि उनके सामने कई तरह की चेतावनियां और खतरे हैं, लेकिन वे हर हाल में मतदान करने जाएंगे।
जॉर्जिया के डेकाल्ब काउंटी में भी ऐसा ही माहौल देखने को मिला। सेव अमेरिका मूवमेंट की सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक मैरी कोरकोरन के अनुसार, मतदान केंद्र खुलने से लेकर बंद होने तक मतदाताओं का तांता लगा रहा। मैरी कोरकोरन ने बताया कि केंद्र पर पहुंचने वाले हर व्यक्ति का यही कहना था कि कोई भी दबाव उन्हें इस साल मतदान करने से नहीं रोक सकता। मतदाता समझ रहे हैं कि प्रशासनिक फैसलों का क्या मकसद है और वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों को छोड़ने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं।
उधर नेवादा में, विदेश मंत्री सिस्को एगुइलर, जो चुनाव परिणामों को नकारने वाले जिम मार्चेंट के खिलाफ फिर से चुनाव लड़ रहे हैं, का मानना है कि मतदाताओं से सीधे और बेबाक अंदाज में बात करने की जरूरत है। सिस्को एगुइलर ने बताया कि जब नेताओं द्वारा खुलकर यह भरोसा दिलाया जाता है कि वे जनता के अधिकारों के लिए पूरी मजबूती से लड़ेंगे, तभी मतदाता भी खुलकर मतदान केंद्रों तक आने का फैसला करते हैं।
मतदाता अधिकार संगठन कॉमन कॉज की वाइस प्रेसिडेंट सुजैन अल्मीडा ने भी इस भावना का समर्थन किया। सुजैन अल्मीडा का कहना है कि इस निडरता को आगे बढ़ाना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर वोट में ताकत न होती तो कोई भी इसे मुश्किल बनाने की कोशिश नहीं करता। उनका कहना है कि चुनौतियां अपनी जगह वास्तविक हैं, लेकिन लोकतंत्र के उत्सव में हिस्सा लेने का अपना एक अलग उत्साह और संतोष भी है।



















