पहाड़ों को काटकर रास्ते बनाने और भूमिगत मेट्रो परियोजनाओं के लिए अनिवार्य मानी जाने वाली विशालकाय टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति बाधित करने के प्रयासों को भारत ने आत्मनिर्भरता की नई रणनीति में बदल दिया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि बाहर से इन भारी उपकरणों की आपूर्ति रोकी जाती है, तो देश दूसरे विकल्पों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं अपनी टनल बोरिंग मशीनें तैयार करेगा। इस कदम से साफ है कि बुनियादी ढांचे के विकास की गति को बाहरी रुकावटों के चलते थमने नहीं दिया जाएगा।
रेयर-अर्थ धातुओं की चुनौती और देसी स्टार्टअप्स का नवाचार
इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा उपकरणों में बड़े पैमाने पर काम आने वाले रेयर-अर्थ पदार्थों पर वैश्विक निर्भरता का फायदा उठाने की कोशिशों का समाधान भी भारत ने तेजी से निकाला है। जब इन जरूरी धातुओं की आपूर्ति को लेकर दिक्कतें खड़ी की गईं, तब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने घरेलू स्टार्टअप्स के साथ विशेष बैठक की। उन्होंने युवा उद्यमियों और इंजीनियरों के सामने यह सीधी चुनौती रखी कि क्या रेयर-अर्थ सामग्री पर निर्भर रहे बिना उच्च क्षमता वाली मोटरें बनाई जा सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय स्टार्टअप्स ने ऐसी नई मोटरें विकसित कर दिखाई हैं जो बिना किसी दुर्लभ विदेशी धातु के भी समान गुणवत्ता, दक्षता और पावर आउटपुट देती हैं।
रणनीतिक हितों की सुरक्षा के साथ कूटनीतिक संतुलन
पीयूष गोयल ने यह रेखांकित किया कि तकनीकी प्रतिबंधों या दबाव की नीति के आगे भारत कभी भी अपने रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा। दुनिया के कई देश भले ही दबाव में आकर समझौते की राह चुनते हों, लेकिन भारत का दृष्टिकोण पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने का है। इसके साथ ही एक परिपक्व कूटनीतिक रुख दर्शाते हुए उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत किसी देश के साथ बेवजह तनाव या दुश्मनी बढ़ाने का इच्छुक नहीं है। यदि दूसरे पक्ष की तरफ से सहयोग के रास्ते में जानबूझकर कोई अड़चन नहीं डाली जाती है, तो द्विपक्षीय रिश्ते सामान्य और बेहतर बने रह सकते हैं।
सप्लाई चेन के दबाव से उभरता मजबूत विनिर्माण तंत्र
बाहरी प्रतिबंधों और आपूर्ति की अनिश्चितताओं ने भारत के भीतर मेक इन इंडिया की मुहिम को एक नई रफ्तार दी है। चाहे जमीन चीरने वाली भारी मशीनें हों या आधुनिक वाहनों के लिए मोटरें, विदेशी स्तर पर खड़े किए जा रहे अवरोध अब घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहे हैं। वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली अड़चनें अब देश की रफ्तार को रोकने के बजाय भारतीय उद्योगों और तकनीकी स्टार्टअप्स के लिए नए अवसरों और बड़े बाजारों के द्वार खोल रही हैं।



















