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टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति में रुकावट के बाद भारत ने उठाया घरेलू विनिर्माण का कदम, पीयूष गोयल ने दी जानकारीव्यापार
3 नव॰ 2026, 5:54 pm (5 मिनट पहले)· 0

टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति में रुकावट के बाद भारत ने उठाया घरेलू विनिर्माण का कदम, पीयूष गोयल ने दी जानकारी

सुरंग खोदने वाली भारी मशीनों और जरूरी कलपुर्जों की आपूर्ति रोकने की चीनी कोशिशों के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत अब इन उपकरणों का निर्माण खुद करेगा।

पहाड़ों को काटकर रास्ते बनाने और भूमिगत मेट्रो परियोजनाओं के लिए अनिवार्य मानी जाने वाली विशालकाय टनल बोरिंग मशीनों की आपूर्ति बाधित करने के प्रयासों को भारत ने आत्मनिर्भरता की नई रणनीति में बदल दिया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि बाहर से इन भारी उपकरणों की आपूर्ति रोकी जाती है, तो देश दूसरे विकल्पों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं अपनी टनल बोरिंग मशीनें तैयार करेगा। इस कदम से साफ है कि बुनियादी ढांचे के विकास की गति को बाहरी रुकावटों के चलते थमने नहीं दिया जाएगा।

रेयर-अर्थ धातुओं की चुनौती और देसी स्टार्टअप्स का नवाचार

इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा उपकरणों में बड़े पैमाने पर काम आने वाले रेयर-अर्थ पदार्थों पर वैश्विक निर्भरता का फायदा उठाने की कोशिशों का समाधान भी भारत ने तेजी से निकाला है। जब इन जरूरी धातुओं की आपूर्ति को लेकर दिक्कतें खड़ी की गईं, तब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने घरेलू स्टार्टअप्स के साथ विशेष बैठक की। उन्होंने युवा उद्यमियों और इंजीनियरों के सामने यह सीधी चुनौती रखी कि क्या रेयर-अर्थ सामग्री पर निर्भर रहे बिना उच्च क्षमता वाली मोटरें बनाई जा सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय स्टार्टअप्स ने ऐसी नई मोटरें विकसित कर दिखाई हैं जो बिना किसी दुर्लभ विदेशी धातु के भी समान गुणवत्ता, दक्षता और पावर आउटपुट देती हैं।

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रणनीतिक हितों की सुरक्षा के साथ कूटनीतिक संतुलन

पीयूष गोयल ने यह रेखांकित किया कि तकनीकी प्रतिबंधों या दबाव की नीति के आगे भारत कभी भी अपने रणनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगा। दुनिया के कई देश भले ही दबाव में आकर समझौते की राह चुनते हों, लेकिन भारत का दृष्टिकोण पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने का है। इसके साथ ही एक परिपक्व कूटनीतिक रुख दर्शाते हुए उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत किसी देश के साथ बेवजह तनाव या दुश्मनी बढ़ाने का इच्छुक नहीं है। यदि दूसरे पक्ष की तरफ से सहयोग के रास्ते में जानबूझकर कोई अड़चन नहीं डाली जाती है, तो द्विपक्षीय रिश्ते सामान्य और बेहतर बने रह सकते हैं।

सप्लाई चेन के दबाव से उभरता मजबूत विनिर्माण तंत्र

बाहरी प्रतिबंधों और आपूर्ति की अनिश्चितताओं ने भारत के भीतर मेक इन इंडिया की मुहिम को एक नई रफ्तार दी है। चाहे जमीन चीरने वाली भारी मशीनें हों या आधुनिक वाहनों के लिए मोटरें, विदेशी स्तर पर खड़े किए जा रहे अवरोध अब घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहे हैं। वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली अड़चनें अब देश की रफ्तार को रोकने के बजाय भारतीय उद्योगों और तकनीकी स्टार्टअप्स के लिए नए अवसरों और बड़े बाजारों के द्वार खोल रही हैं।

सवाल-जवाब

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने टनल बोरिंग मशीनों को लेकर क्या घोषणा की?
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बाहर से सुरंग खोदने वाली मशीनों की आपूर्ति रोकी जाती है, तो भारत इन भारी मशीनों का निर्माण खुद देश के भीतर करेगा।
रेयर-अर्थ धातुओं की आपूर्ति बाधित होने पर भारत ने क्या समाधान निकाला?
भारतीय स्टार्टअप्स ने ऐसी आधुनिक मोटरें तैयार की हैं जो इन दुर्लभ चीनी धातुओं के बिना भी समान गुणवत्ता और शक्ति प्रदान करती हैं।
क्या भारत ने अन्य देशों के साथ संबंधों को लेकर कोई नीतिगत रुख स्पष्ट किया?
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अपने रणनीतिक हितों से समझौता किए बिना संतुलित संबंध चाहता है, बशर्ते दूसरे पक्ष की ओर से कोई अड़चन न डाली जाए।
विदेशी पाबंदियों का भारतीय विनिर्माण पर क्या प्रभाव पड़ा है?
पाबंदियों के चलते देश में भारी मशीनों और उन्नत मोटरों के निर्माण का एक नया घरेलू ईकोसिस्टम और बड़ा बाजार तैयार हो रहा है।
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