पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कोलकाता में आयोजित विशाल शहीद दिवस कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर अत्यंत तीखा राजनीतिक प्रहार किया है। इस भव्य जनसभा में उमड़ी लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने बड़े आत्मविश्वास के साथ दावा किया कि यह असीम जनसैलाब उनके प्रति राज्य के नागरिकों के अटूट विश्वास और प्रेम का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष प्रमाण है। पार्टी प्रमुख ने मंच से स्पष्ट किया कि हर कठिन समय, राजनीतिक उथल-पुथल और बड़ी चुनौती के बीच आम लोग उनके साथ हमेशा चट्टान की तरह मजबूती से खड़े रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह आपसी तालमेल ही उनकी सबसे बड़ी जीत है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी की अटूट प्रतिबद्धता को भी दोहराया और कहा कि उनका संगठन भी हमेशा बिना किसी स्वार्थ के जनता के हितों की रक्षा के लिए उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलता रहा है।
विद्रोहियों को कड़ा संदेश और असली संगठन का दावा
हाल के समय में पार्टी से बगावत करने वाले नेताओं और सीधे तौर पर विपक्षी खेमे को लक्ष्य करते हुए ममता बनर्जी ने अपनी राजनीतिक ताकत का कड़ा एहसास कराया। उन्होंने विद्रोहियों को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया कि केवल एक नया दफ्तर खोल लेने या कोई नया साइनबोर्ड लगा लेने से कोई भी गुट असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा हरगिज नहीं कर सकता। पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी अगुवाई वाला संगठन ही वास्तविक पार्टी है, जिसकी जड़ें जमीन से जुड़ी हुई हैं। जनता की तरफ से मिल रहे अपार समर्थन को अपनी राजनीतिक ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत बताते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकों का यह निरंतर भरोसा ही उन्हें मजबूती प्रदान करता है। यह स्नेह उन्हें हमेशा अत्यधिक विनम्रता और कड़े संकल्प के साथ राज्य की निस्वार्थ सेवा करते रहने के लिए प्रेरित करता है। इसी जोश और उत्साह के बीच उन्होंने अपने समर्थकों को एक नया नारा भी दिया, जिसमें वास्तविक संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ देश और बंगाल दोनों की रक्षा करने का जोरदार आह्वान किया गया था।
चुनाव पूर्व सौदेबाजी और दलबदलुओं पर सख्त रुख
राज्य के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का गहराई से जिक्र करते हुए तृणमूल प्रमुख ने एक बहुत बड़ा आरोप लगाया कि पिछले चुनावों से ठीक पहले कुछ विशेष राजनीतिक ताकतों ने पर्दे के पीछे छिपकर कई तरह की सौदेबाजी और गुप्त समझौते किए थे। हालांकि, उन्होंने भारी भीड़ के सामने यह भी दावा किया कि सच्चाई कभी छिपती नहीं है और अब ऐसी सभी गुप्त रणनीतियों और अनैतिक समझौतों की असलियत धीरे-धीरे कर के राज्य की आम जनता के सामने पूरी तरह से उजागर हो रही है। इस दौरान, उन नेताओं के बारे में जो मुश्किल समय में पार्टी का साथ छोड़कर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे, उन्होंने अपना रुख बेहद कड़ा कर लिया है। ममता बनर्जी ने बहुत ही साफ शब्दों में यह सार्वजनिक घोषणा कर दी है कि ऐसे अवसरवादी और दलबदलू नेताओं को किसी भी परिस्थिति में पार्टी में वापस स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह सख्त और दो टूक बयान उन सभी पूर्व नेताओं के लिए एक बहुत ही स्पष्ट और सीधा संदेश माना जा रहा है जो भविष्य में राजनीतिक समीकरण बदलने पर घर वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे।
गिरफ्तारी का डर छोड़ने और जेल जाने की चुनौती
कार्यक्रम के दौरान अपने हजारों कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए उन्होंने आने वाले समय में एक बहुत ही कड़े और लंबे राजनीतिक संघर्ष की स्पष्ट रूपरेखा पेश की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि अगर मौजूदा सरकार और विपक्षी दल उनके समर्थकों की आवाज दबाने के लिए उन पर तरह-तरह के कानूनी मामले दर्ज करते हैं, तो उन्हें इस कार्रवाई से बिल्कुल भी घबराने या पीछे हटने की कोई आवश्यकता नहीं है। ममता बनर्जी ने मंच से सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा, "हम जेल जाने के लिए तैयार हैं।" उन्होंने विरोधियों को ललकारते हुए यहां तक कह दिया कि वे चाहें तो पूरे राज्य को ही एक बड़ी जेल में तब्दील कर दें, लेकिन उनके कार्यकर्ता जेल जाने से कभी खौफ नहीं खाएंगे। उन्होंने अपने लोगों को यह पक्का भरोसा दिलाया कि जिन भी निष्ठावान कार्यकर्ताओं को राजनीतिक साजिश के तहत झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा जाएगा, उनका रिहा होकर बाहर आने पर समाज में एक असली नायक की तरह भव्य सम्मान किया जाएगा। उनके अनुसार, विरोधियों की चालों के कारण पहले ही बड़ी संख्या में बेकसूर लोगों पर ऐसे राजनीति से प्रेरित मामले लादे जा चुके हैं।
विपक्षी दलों को एकजुट होने का खुला निमंत्रण
देश में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती ताकत का कड़ा मुकाबला करने के लिए उन्होंने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर व्यापक विपक्षी एकता की तत्काल आवश्यकता पर सबसे अधिक जोर दिया। राज्य के भीतर राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए, उन्होंने बंगाल के उन सभी छोटे-बड़े राजनीतिक संगठनों से एक साझा मंच पर आने का विनम्र आग्रह किया जो वर्तमान सत्ताधारी दल की नीतियों के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रीय परिदृश्य पर बेबाकी से बात करते हुए उन्होंने इंडिया ब्लॉक के सभी घटक दलों से अपने आपसी मतभेदों, मनमुटावों और व्यक्तिगत अहंकार को पूरी तरह से किनारे रखने की जोरदार अपील की। उनका दृढ़ विश्वास है कि इस बड़ी और महत्वपूर्ण राजनीतिक लड़ाई में हर किसी को बिना किसी शर्त के एक साथ आना ही होगा। उनका साफ मानना है कि जब तक सारे दल एकजुट होकर एक सामूहिक ताकत नहीं बनेंगे, तब तक इस शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी का डटकर सामना करना किसी के लिए भी संभव नहीं होगा।
आंदोलन तेज करने और जनसंपर्क की आगामी रणनीति
शहीद दिवस के इस विशाल कार्यक्रम के बिल्कुल अंत में उन्होंने अपने संगठन के सभी सक्रिय सदस्यों को भविष्य के बड़े विरोध प्रदर्शनों के लिए अभी से कमर कसने का सख्त निर्देश दिया। अपनी आगे की राजनीतिक रणनीति का विस्तार से खुलासा करते हुए उन्होंने उपस्थित जनसमूह को बताया कि सभी कार्यकर्ता अब सीधे अलग-अलग जिलों का रुख करेंगे। वे जमीनी स्तर पर आम जनता के बीच जाकर एक बहुत ही सघन जनसंपर्क अभियान चलाएंगे ताकि दूरदराज के लोगों को भी राजनीतिक सच्चाई से भली-भांति अवगत कराया जा सके और उनका समर्थन हासिल किया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने इस बात के भी बहुत स्पष्ट और सीधे संकेत दिए कि आने वाले कुछ ही दिनों में राज्य के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक शक्ति केंद्रों, जिनमें नबन्ना और ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग विशेष रूप से शामिल हैं, के ठीक बाहर बहुत बड़े और उग्र स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। उनके इस अत्यंत आक्रामक और जुझारू रुख से यह पूरी तरह से साफ हो गया है कि आने वाले समय में राज्य की सड़कों पर राजनीतिक हलचल और भी अधिक तीव्र होने वाली है, जिसका सीधा असर राज्य के आम जनजीवन पर पड़ सकता है।


















