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लुधियाना नगर निगम बैठक में भारी हंगामा, आम आदमी पार्टी और बीजेपी पार्षदों के बीच हाथापाईराजनीति
25 अग॰ 2026, 3:19 pm (17 दिन पहले)· 4

लुधियाना नगर निगम बैठक में भारी हंगामा, आम आदमी पार्टी और बीजेपी पार्षदों के बीच हाथापाई

लुधियाना के गुरुनानक देव भवन में नगर निगम हाउस की बैठक के दौरान आम आदमी पार्टी और बीजेपी पार्षदों के बीच तीखी झड़प और हाथापाई हो गई। यह विवाद फाइनेंस एंड कॉन्ट्रेक्ट कमेटी के सदस्यों के चुनाव को लेकर हुआ।

लुधियाना नगर निगम के गुरुनानक देव भवन में मेयर इंदरजीत कौर की अध्यक्षता में बुलाई गई हाउस की मीटिंग के दौरान माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोक के बाद हाथापाई की नौबत आ गई। यह पूरा विवाद फाइनेंस एंड कॉन्ट्रेक्ट कमेटी यानी F&CC के दो नए सदस्यों के चुनाव को लेकर सामने आया, जहां विपक्षी पार्षद तुरंत मतदान कराने की जिद पर अड़े हुए थे, जबकि सत्ता पक्ष ने इसके लिए अलग तारीख तय कर रखी थी।

विवाद की मुख्य वजह और दोनों पक्षों का रुख

बैठक के दौरान विपक्षी पार्षदों ने पुरजोर मांग उठाई कि फाइनेंस एंड कॉन्ट्रेक्ट कमेटी के सदस्यों का चुनाव आज ही करवाया जाना चाहिए। इसके उलट मेयर इंदरजीत कौर ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले पर मतदान 29 अगस्त को संपन्न होगा। विपक्ष की तरफ से यह आरोप लगाया गया कि आम आदमी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार मौके पर मौजूद नहीं हैं, और इसी वजह से जानबूझकर चुनाव की प्रक्रिया को टाला जा रहा है। स्थिति को स्पष्ट करते हुए निगम सेक्रेटरी विवेक वर्मा ने बताया कि शाम 5 बजे तक नामांकन फॉर्म स्वीकार किए जाएंगे और नियमों के मुताबिक उसके ठीक तीन दिन बाद वोटिंग कराई जाएगी।

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इसके साथ ही मतदान के तरीके को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच गहरा मतभेद देखने को मिला। मेयर ने स्पष्ट कर दिया कि पूरी चुनाव प्रक्रिया बैलेट पेपर के माध्यम से होगी। इसके विपरीत, बीजेपी पार्षदों की मांग थी कि मतदान बैलेट से न कराकर हाथ खड़े करवाकर किया जाए। इस बीच, कांग्रेस पार्षद गौरव भट्टी, जिन्होंने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, ने दावा किया कि अदालत ने एफएंडसीसी के नए सदस्यों का चुनाव 25 अगस्त यानी आज ही संपन्न कराने का निर्देश दिया है। इस पूरे गतिरोध के बीच कॉरपोरेशन कमिश्नर ओजस्वी अलंकार ने यह जानकारी दी कि मेयर ही इस चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका निभाएंगी। हंगामे की गंभीर स्थिति को देखते हुए हाउस की कार्यवाही को तुरंत 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।

पार्षदों के बीच तीखी झड़प और हाथापाई

हंगामे की शुरुआत उस वक्त हुई जब बीजेपी पार्षद सदस्यों के चुनाव के मुद्दे को लेकर विधायक दलजीत भोला से तीखी बहस कर रहे थे। इस तीखी बातचीत से नाराज होकर आम आदमी पार्टी के पार्षद अश्विनी शर्मा, जो पहले विधायक भोला के पीए यानी पर्सनल असिस्टेंट रह चुके हैं, बीच-बचाव करने के बजाय विवाद में कूद पड़े और दोनों पक्षों में गर्मागर्म बहस छिड़ गई। बात इतनी बढ़ गई कि आप पार्षद अश्विनी शर्मा और बीजेपी पार्षद गौरवजीत गोरा के बीच हाथापाई शुरू हो गई। स्थिति को बिगड़ता देख मौके पर मौजूद अन्य पार्षदों और पुलिस बल ने तत्परता दिखाते हुए बीच-बचाव किया और दोनों को अलग किया।

लुधियाना नगर निगम का दलीय गणित

लुधियाना नगर निगम के राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो सदन में आम आदमी पार्टी सबसे मजबूत स्थिति में है। निगम में आम आदमी पार्टी के कुल 48 पार्षद हैं। इसके बाद कांग्रेस पार्टी के 26 पार्षद सदन का हिस्सा हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के पास 19 पार्षद मौजूद हैं, जबकि शिरोमणि अकाली दल यानी SAD के केवल 2 पार्षद हैं। विभिन्न दलों की इस संख्या के बीच F&CC के दो सदस्यों के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है।

सवाल-जवाब

लुधियाना नगर निगम की बैठक में विवाद किस बात पर हुआ?
यह विवाद फाइनेंस एंड कॉन्ट्रेक्ट कमेटी के दो सदस्यों के चुनाव की तारीख और प्रक्रिया को लेकर हुआ।
बैठक की अध्यक्षता किसने की थी?
इस बैठक की अध्यक्षता मेयर इंदरजीत कौर ने की थी।
किन पार्षदों के बीच हाथापाई हुई?
आम आदमी पार्टी के पार्षद अश्वनी शर्मा और बीजेपी पार्षद गौरवजीत गोरा के बीच हाथापाई हुई।
लुधियाना नगर निगम में किस पार्टी के पास सबसे ज्यादा पार्षद हैं?
लुधियाना नगर निगम में आम आदमी पार्टी के पास सबसे ज्यादा 48 पार्षद हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

लुधियाना नगर निगम की इस घटना से साफ है कि स्थानीय निकायों में समितियों के गठन को लेकर राजनीतिक टकराव किस हद तक बढ़ सकता है। चुनाव की तारीख, मतदान के तरीके और कानूनी दांवपेंच पर उपजा यह विवाद प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यदि समय रहते नियमों को स्पष्ट नहीं किया गया, तो सदन में इस तरह की हिंसा भविष्य की प्रशासनिक बैठकों को भी प्रभावित कर सकती है और विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न होगी।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·17 दिन पहले

यह घटना दर्शाती है कि पंजाब के शहरी स्थानीय निकायों में राजनीतिक असहमतियां अब विधायी दायरे से बाहर निकलकर सड़क और सदन की हाथापाई का रूप ले रही हैं। जब सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच चुनाव तिथियों और मतदान पद्धति पर इस तरह का खुला टकराव होने लगे, तो इसका सीधा असर शहर के बुनियादी ढाँचे के विकास और प्रशासनिक नीतियों पर पड़ता है। यदि राज्य निर्वाचन आयोग या प्रशासनिक तंत्र ने स्थानीय निकायों के संचालन के लिए स्पष्ट और कड़े नियम लागू नहीं किए, तो नगर निगमों की बैठकों में इस प्रकार की अराजकता लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को गंभीर क्षति पहुँचाती रहेगी और आम जनता के विकास कार्य अधर में लटक जाएंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

लुधियाना नगर निगम बैठक में हुआ यह हंगामा सिर्फ राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और सदन की मर्यादा का गंभीर उल्लंघन है। फाइनेंस एंड कॉन्ट्रेक्ट कमेटी के चुनाव को लेकर जिस तरह से बात हाथापाई तक पहुँची और पुलिस को बीच-बचाव करना पड़ा, वह स्थानीय निकायों में बढ़ती हिंसा को दिखाता है। अदालत के आदेशों और नियमों की अनदेखी कर जनप्रतिनिधियों द्वारा इस तरह कानून अपने हाथ में लेना आने वाले दिनों में आपराधिक मामलों और मुकदमों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, जिससे प्रशासनिक कामकाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

लुधियाना नगर निगम की इस घटना से शहरी स्थानीय निकायों के भीतर वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता का संकट गहराता दिख रहा है। F&CC जैसे महत्वपूर्ण पैनल के गठन में इस तरह की खींचतान और प्रशासनिक नियमों पर आम सहमति का अभाव न केवल नीतिगत फैसलों को अनिश्चितता में डालता है, बल्कि कॉरपोरेट गवर्नेंस और म्युनिसिपल बॉन्ड जैसी भविष्य की वित्तीय योजनाओं पर भी निवेशक भरोसे को कमजोर कर सकता है।

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