मध्य प्रदेश विधानसभा ने अपने मानसून सत्र के दौरान कई बड़े कानूनी और सामाजिक सुधारों को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सदन ने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया, जो राज्य में नागरिक और आपराधिक कानूनों को एक नई दिशा देते हैं।
बीएनएसएस संशोधन बिल को मिली मंजूरी
कानूनी सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, विधानसभा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) संशोधन विधेयक को पारित कर दिया है। सदन में चर्चा के बाद इस बिल को ध्वनिमत से मंजूरी मिल गई। यह कदम आपराधिक न्याय प्रणाली को नए सांचे में ढालने की व्यापक राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है और राज्य सरकार के लिए एक अहम विधायी सफलता माना जा रहा है।
यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य बना एमपी
आपराधिक कानून में बदलाव के साथ ही, सदन ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल भी पास कर दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस कदम को मध्य प्रदेश के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय करार दिया, जिसके साथ ही एमपी इस कानून को लागू करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। खास बात यह है कि इस कानून के दायरे से आदिवासी समुदाय को पूरी तरह बाहर रखा गया है, जिससे उनकी सदियों पुरानी परंपराओं को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान हो गया है।
फायर सेफ्टी और अन्य अहम फैसले
मानसून सत्र की कार्यवाही सिर्फ नागरिक और आपराधिक कानूनों तक सीमित नहीं रही। आपदाओं को रोकने के मकसद से विधानसभा में फायर सेफ्टी कानून भी पारित किया गया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नए फायर सेफ्टी नियमों से राज्य में जन और धन की हानि काफी कम होगी। इससे पहले राज्य कैबिनेट ने मानसून सत्र में पेश करने के लिए कुल नौ अहम विधेयकों को मंजूरी दी थी, जिनमें सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के लिए लागू किए गए शिक्षा सुधार के नए नियम भी शामिल हैं।



















