भोपाल में मध्य प्रदेश विधानसभा के भीतर भारी शोरशराबे और नारेबाजी के बीच समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी से जुड़ा विधेयक पारित कर दिया गया। सत्ता पक्ष ने विपक्षी विधायकों के तीखे विरोध के बावजूद इसे सदन में पास करा लिया, जिसके बाद अब राज्य में शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम पूरी तरह बदलने वाले हैं।
शादी और तलाक के लिए अब रजिस्ट्रेशन जरूरी
नए कानून के तहत जनजातीय समुदायों को छोड़कर बाकी सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही एक से ज्यादा शादी यानी बहुविवाह पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। तीन तलाक और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को अब दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है, यानी इन्हें अपनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकेगी।
लिव-इन में रहने वालों पर भी शिकंजा
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए भी सख्त प्रावधान जोड़े गए हैं। रिश्ते में आने के एक महीने के भीतर इसका रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर तीन महीने तक की जेल हो सकती है। हालांकि इसका एक सकारात्मक पहलू भी है, अगर पुरुष साथी बाद में महिला साथी को छोड़ देता है तो महिला अदालत के जरिए भरण-पोषण यानी गुजारा भत्ता मांग सकेगी। इससे लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलने का रास्ता खुलेगा।
हर बच्चे को बराबर हक, आदिवासी समाज दायरे से बाहर
यह कानून बच्चों के अधिकारों को लेकर भी बड़ा बदलाव लाता है। चाहे बच्चा जैविक तरीके से जन्मा हो, गोद लिया गया हो, सरोगेसी से आया हो या फिर सहायक प्रजनन तकनीक यानी एआरटी से जन्मा हो, सभी को कानून की नजर में बराबर दर्जा और उत्तराधिकार में समान हक मिलेगा। लिव-इन रिश्तों से जन्मे बच्चों को भी अब वैधानिक मान्यता मिल जाएगी। हालांकि इस पूरे कानून के दायरे से अनुसूचित जनजातियों के समुदायों को अलग रखा गया है, यानी यूसीसी उन पर लागू नहीं होगा।
सीएम मोहन यादव की प्रतिक्रिया, कांग्रेस का विरोध जारी
विधेयक पास होने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा, "यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड का पास होना मध्य प्रदेश के 8.5 करोड़ लोगों के लिए एक सुनहरा दिन है।" मोहन यादव ने इसे डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों से जोड़ते हुए दावा किया कि यह कदम महिलाओं को एक से ज्यादा शादी की वजह से होने वाली तकलीफों से राहत देगा। साथ ही उन्होंने पूरे प्रदेश को इस कानून के लिए बधाई भी दी। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी हमेशा से हिंदू समाज में फूट डालने की कोशिश करती रही है और आजादी के वक्त देश के बंटवारे के पीछे भी कांग्रेस की यही सोच जिम्मेदार थी। हालांकि विपक्षी दल कांग्रेस विधेयक के कई प्रावधानों का सदन के भीतर और बाहर, दोनों जगह लगातार कड़ा विरोध जताती रही।

















