उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारी बारिश के बाद राजमार्ग के एक हिस्से में 10 मीटर गहरा गड्ढा बनने के महज एक हफ्ते के भीतर ही उन्नाव के पास मरम्मत की गई जगह पर नई दरारें दिखाई देने लगी हैं। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने पूर्व में मिट्टी के धंसने और कटाव से प्रभावित हुए इस हिस्से पर पैचवर्क करके मरम्मत का कार्य पूरा किया था। हालांकि, पैचवर्क के तुरंत बाद फिर से उभरी इन दरारों ने निर्माण कार्य के टिकाऊपन और एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक बहस छेड़ दी है।
अखिलेश यादव का सरकार पर तीखा प्रहार
सड़क निर्माण की बिगड़ती स्थिति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्य सरकार के प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो शेयर किया, जिसमें सड़क की सतह पर फैली गहरी दरारें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। वीडियो साझा करते हुए अखिलेश यादव ने लिखा कि "सावधान… ख़तरें में है आपकी जान!" और साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राजमार्ग पर नदी की धाराओं की तरह फैली ये अनगिनत दरारें भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार की प्रत्यक्ष गवाही दे रही हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को जनसुरक्षा से खिलवाड़ और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के रूप में रेखांकित कर रहे हैं।
बार-बार होने वाले नुकसान और हादसे
गंगा एक्सप्रेसवे पर ढांचागत खराबी की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व 18 अगस्त को मेरठ से प्रयागराज जाने वाले कैरिजवे पर 421वें किलोमीटर के समीप एक अत्यंत विशाल गड्ढा बन गया था। मूसलाधार बारिश के चलते सड़क का एक बड़ा हिस्सा और उससे सटा हुआ तटबंध बह गया था। इसके अतिरिक्त, चालू वर्ष के जुलाई माह में भारी वर्षा के पश्चात् उन्नाव स्थित सोनिक टोल प्लाज़ा को जोड़ने वाली 7 मीटर लंबी अप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हो गई थी। उस दौरान तटबंध के समीप भारी मिट्टी का कटाव दर्ज किया गया था और कैरिजवे का एक हिस्सा ढह गया था, जिसे बाद में अधिकारियों द्वारा मिट्टी भरकर और पैचवर्क करके अस्थाई रूप से ठीक किया गया था। उद्घाटन के बाद से ही राजमार्ग के विभिन्न खंडों में लगातार क्षति दर्ज की जा रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे की मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य
राज्य के सबसे बड़े सड़क गलियारों में शामिल 594 किलोमीटर लंबे और छह-लेन वाले इस एक्सप्रेसवे का औपचारिक उद्घाटन इसी वर्ष 29 अप्रैल को संपन्न हुआ था। यह प्रमुख राजमार्ग मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है और उत्तर प्रदेश के कुल 12 जिलों से होकर गुजरता है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण का मुख्य उद्देश्य मेरठ और प्रयागराज के बीच लगने वाले यात्रा समय को लगभग 12 घंटे से घटाकर मात्र छह घंटे करना था। राज्य सरकार ने इसे प्रदेश के आर्थिक विकास और बेहतर संपर्क व्यवस्था के लिए एक मील का पत्थर माना था। परंतु उद्घाटन के कुछ ही महीनों के भीतर बार-बार हो रही टूट-फूट ने इसकी तकनीकी गुणवत्ता और निर्माण मानकों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
अंकित बालियान हत्याकांड पर भी गहराया राजनीतिक विवाद
एक्सप्रेसवे के मुद्दे के साथ-साथ अखिलेश यादव ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा है। उन्होंने हरियाणवी गायक अंकित बालियान की दिनदहाड़े हुई हत्या का उल्लेख करते हुए शासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। अंकित बालियान पर हमलावरों द्वारा 18 राउंड गोलियां चलाकर उनकी दर्दनाक हत्या कर दी गई, जिससे पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल व्याप्त है। अखिलेश यादव ने अंकित बालियान की शोकाकुल मां द्वारा अपने बेटे के पार्थिव शरीर को गोद में रखकर सड़क पर बैठने की घटना को अत्यंत हृदयविदारक बताया। इस वारदात के विरोध में जाट समाज ने सड़कों पर उतरकर अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। इसके साथ ही, इस जघन्य हत्याकांड की निष्पक्ष जांच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के कोण से भी कराने की मांग जोर पकड़ रही है।



















