महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े उलटफेर की ओर बढ़ती दिख रही है। जिस घटनाक्रम को सियासी गलियारों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ कहा जा रहा है, उसकी हलचल अब चरम पर है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 में से 6 सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और चर्चा है कि ये आज ही पार्टी से अपना नाता तोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम सकते हैं।
कौन हैं बगावत के चेहरे
जिन सांसदों के नाम इस संभावित टूट से जुड़े बताए जा रहे हैं, उनमें संजय देशमुख, दीना पाटिल, नागेश पाटिल अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल हैं। यानी पार्टी के लोकसभा में मौजूद दो-तिहाई सांसद इस वक्त दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं, जिससे उद्धव खेमे की मुश्किलें साफ नजर आ रही हैं।
शिंदे की दिल्ली में सक्रियता
दूसरी ओर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने पहले मुंबई में अपने करीबी नेताओं के साथ बैठक की, जिसके बाद उनकी अगली चालों को लेकर अटकलें और तेज हो गईं। इसके बाद शिंदे खुद भी दिल्ली पहुंच गए। सूत्रों की मानें तो वह आज सुबह अपने बेटे और शिवसेना संसदीय दल के नेता श्रीकांत शिंदे के आवास पर इन बागी सांसदों से मुलाकात कर सकते हैं।
सूत्रों का यह भी कहना है कि इसी मुलाकात के पूरा होने के बाद सभी बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलेंगे। इस दौरान वे ओम बिरला को एक पत्र सौंपेंगे, जिसमें शिवसेना (यूबीटी) से अलग होने की बात कही जाएगी। यानी पूरा कार्यक्रम तय रणनीति के तहत आगे बढ़ता दिख रहा है।
उद्धव खेमे का पलटवार
इस बगावत की काट के लिए शिवसेना (यूबीटी) ने भी अपनी चाल चल दी है। उद्धव ठाकरे के भरोसेमंद माने जाने वाले सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पार्टी के किसी भी सांसद के अलग गुट बनाने या किसी दूसरे दल में विलय को मान्यता न दी जाए।
सावंत ने अपने पत्र में दलील दी है कि शिवसेना (यूबीटी) एक ही राजनीतिक दल है और कानून की नजर में वही मान्य है। पार्टी का तर्क है कि संसद में किसी दल का अस्तित्व उसके मूल राजनीतिक दल से ही आता है, इसलिए अलग-अलग गुट बनाकर उसी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं किया जा सकता। ऐसे में आने वाले घंटे महाराष्ट्र की सियासत के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकते हैं।













