नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को देश के सर्वोच्च न्यायालय से एक बड़ा झटका लगा है। अदालत ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले स्थित सर्किट हाउस को खाली कराने के निर्देश के खिलाफ दाखिल की गई उनकी याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया। महुआ मोइत्रा ने जिला प्रशासन के इस कदम को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले में दखल देने से मना कर दिया और टिप्पणी की कि इस याचिका को संबंधित हाईकोर्ट में भी सुना जा सकता है।
नादिया में सरकारी आवास से बेदखली का विवाद
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की मुख्य शिकायत यह है कि पश्चिम बंगाल के नादिया जिला प्रशासन ने तमाम अदालती आदेशों को दरकिनार करते हुए उन्हें वहां के सर्किट हाउस स्थित उनके सरकारी आवास से जबरन बाहर निकाल दिया। यह पूरा घटनाक्रम 14 अगस्त का है। तब विवाद तब और गहरा गया जब स्थानीय प्रशासन ने उन्हें आधी रात के वक्त सर्किट हाउस का कमरा खाली करने का फरमान सुनाया। महुआ मोइत्रा के अनुसार, वह उस दिन शाम करीब 6.15 बजे सर्किट हाउस पहुंची थीं, जहां उन्हें उनका नियमित कमरा आवंटित किया गया और उनके लिए चाय तथा भोजन की व्यवस्था भी की गई थी।
रात के वक्त फोन कॉल और व्हाट्सएप संदेश से गरमाया मामला
सांसद ने दावा किया कि रात के ठीक 9.47 बजे अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट का फोन आया जिन्होंने उन्हें तुरंत परिसर खाली करने का निर्देश दिया और कहा कि यह हुक्म ऊपर से आया है। इसके तुरंत बाद डिप्टी कलेक्टर की तरफ से एक व्हाट्सएप संदेश भी भेजा गया, जिसमें 12 अगस्त का एक पुराना आदेश संलग्न था। इस आदेश में सर्किट हाउस में रखरखाव और साफ-सफाई का काम चलने का हवाला दिया गया था। इसी कार्रवाई से आहत होकर उन्होंने अदालत का रुख किया था।
हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप
सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा के वकील ने दलील दी कि स्थानीय प्रशासन ने कलकत्ता हाईकोर्ट के पहले से दिए गए आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई हैं। वकीलों का यह भी कहना था कि यह पूरा प्रकरण भारतीय संघवाद से जुड़े कई गंभीर और बुनियादी सवाल खड़े करता है, जिसके लिए एक निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। कानूनी पक्ष की दलील थी कि यह कार्रवाई तब अंजाम दी गई जब हाईकोर्ट पहले ही सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी कर चुका था। बहरहाल, तमाम दलीलों के बावजूद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनने से मना कर दिया।



















