राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायाद ऑफिस की याद सताने पर जरूर देखें ये 6 बेहतरीन ऑफिस कॉमेडी फिल्में, मिलेगा भरपूर मनोरंजनगंगा के बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के घांघर में गहराया चारे का संकट, भुखमरी की कगार पर पहुंचे मवेशीअफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी परेशानी, नेट प्रैक्टिस के दौरान चोटिल हुए ईशान किशननई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का बिना प्रोटोकॉल वाला इशारा, अजित डोभाल से पुतिन की मुलाकात के क्या हैं कूटनीतिक मायने?कर्क साप्ताहिक राशिफल 13-19 सितंबर के लिए: मंगल के गोचर से करियर और आर्थिक जीवन में बदलाव, जानें अपना भाग्यभाई किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद नॉर्वे की राजकुमारी ऐस्ट्रिड का निधन121 दिनों तक देवगुरु बृहस्पति की वक्री चाल: 6 राशियों के करियर और धन लाभ में आएगा बड़ा मोड़पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य, एयर इंडिया घटना के बाद DGCA का आदेशगूगल फोटोज की इन 10 सीक्रेट सेटिंग्स से बचाएं स्टोरेज और सुरक्षित रखें अपनी प्राइवेसी
ममता बनर्जी पर सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला, कहा- आप बूढ़ी हो गई हैं, सड़क पर नहीं उतरने दूंगाराजनीति
25 अग॰ 2026, 11:28 am (18 दिन पहले)· 2

ममता बनर्जी पर सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला, कहा- आप बूढ़ी हो गई हैं, सड़क पर नहीं उतरने दूंगा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में अन्नपूर्णा योजना और अन्य मुद्दों को लेकर ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं। सुवेंदु ने ममता के फेसबुक लाइव पर पलटवार करते हुए उनके बयानों और राजनीतिक गतिविधियों पर तीखा कटाक्ष किया है।

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच बयानबाजी का दौर चरम पर पहुंच गया है। दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग का यह सिलसिला हाल ही में पार्क स्ट्रीट में एक बच्चे के लिए दूध गर्म करने वाली महिला की घटना से शुरू हुआ था, जो अब अन्नपूर्णा योजना को लेकर और अधिक तूल पकड़ चुका है। हाल ही में इन दोनों ही मामलों को लेकर ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर कई तरह के सवाल खड़े किए थे, जिसमें उन्होंने सरकार और मंत्रियों की कार्यशैली पर भी बात की थी। उनके इन बयानों के बाद सुवेंदु अधिकारी ने मैदान में उतरकर कड़ा पलटवार किया है और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी है।

अन्नपूर्णा योजना को लेकर फेसबुक लाइव पर सवाल

विवाद की मुख्य वजह अन्नपूर्णा योजना को लेकर दिए गए बयान रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार दोपहर को एक फेसबुक लाइव के दौरान ममता बनर्जी ने इस योजना के क्रियान्वयन पर कई गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि कुछ पात्र लड़कियों को अन्नपूर्णा भंडार का लाभ नहीं मिल पा रहा है और इस कल्याणकारी योजना में जाति के आधार पर लाभ बांटे जाने का आरोप लगाया था। इस दौरान उन्होंने लोगों से ऐसे मामलों में नाम और पते जुटाने की अपील भी की थी। ममता ने यह भी दोहराया था कि वह संकट के समय हमेशा जनता के साथ खड़ी रही हैं और भविष्य में इस मुद्दे पर कुछ ठोस कदम उठाने की बात कही थी। उनके इसी लाइव प्रसारण और आरोपों के बाद सुवेंदु अधिकारी ने आंकड़ों के साथ प्रेसवार्ता में जवाब देना जरूरी समझा।

ये भी पढ़ें

आंकड़ों के जरिए सुवेंदु अधिकारी का पलटवार

ममता बनर्जी के आरोपों का करारा जवाब देते हुए सुवेंदु अधिकारी ने अन्नपूर्णा योजना से जुड़े विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत अब तक कुल 1 करोड़ 45 लाख 64 हजार 472 लोग लाभार्थी बन चुके हैं। इन आंकड़ों काे स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि इनमें 19 लाख 20 हजार मुस्लिम लाभार्थी भी शामिल हैं, जिससे यह साबित होता है कि योजना के वितरण में किसी भी प्रकार का जातिगत या धार्मिक भेदभाव नहीं किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पहाड़ी क्षेत्रों की करीब एक लाख महिलाओं के खातों में भी इस योजना का पैसा पहुंच चुका है। अपनी बात को और मजबूती देने के लिए उन्होंने नंदीग्राम के एक विशेष ब्लॉक का उदाहरण भी दिया, जहां आवास योजना के तहत दो हिंदू और 52 मुस्लिम परिवारों को पैसे दिए गए थे। उनका यह स्पष्ट दावा था कि प्रशासन बिना किसी भेदभाव के हर पात्र व्यक्ति तक मदद पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रहा है।

योजना से जुड़ी शिकायतों और पोर्टल का जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने अन्नपूर्णा योजना को लेकर सामने आ रही प्रशासनिक शिकायतों का भी खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस योजना से संबंधित लगभग 4.5 लाख शिकायतें सरकार तक पहुंची हैं। इन शिकायतों की प्रकृति दोनों तरह की है, जिसमें कुछ लोग सूची में नाम जोड़े जाने की मांग कर रहे हैं तो कुछ लोगों को बाहर किए जाने की शिकायतें शामिल हैं। उन्होंने तंज कसते हुए यह सवाल भी उठाया कि जब इस योजना का लाभ हर वर्ग तक पहुंचाने की बात कही जा रही थी, तो शुरुआत में इसे 25 से 60 वर्ष की आयु सीमा तक ही सीमित क्यों रखा गया था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए एक समर्पित पोर्टल भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से आम नागरिक अपनी किसी भी तरह की परेशानी को सीधे सरकार तक पहुंचा सकते हैं।

सोशल मीडिया पर सक्रियता और राजनीतिक तंज

सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के दोपहर के समय फेसबुक लाइव करने की आदत पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि वह केवल दोपहर में फेसबुक पर ही सक्रिय रहती हैं और उन्हें सड़कों पर उतरने की कोई आवश्यकता नहीं है। अधिकारी ने यहाँ तक कह दिया कि वह ऐसी राजनीतिक व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे जिससे ममता को सड़क पर निकलने का मौका ही न मिले। इसके अलावा, उन्होंने बारुईपुर और हलीशहर में ममता बनर्जी की हालिया राजनीतिक गतिविधियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि बारुईपुर में जब वह खेलने उतरीं तो एक गोल खाकर वापस लौटीं और जब हलीशहर में अपनी राजनीतिक किस्मत आजमाने की कोशिश की तो उन्हें दो गोल खाने पड़े। इन्हीं हार और सक्रियता का हवाला देते हुए उन्होंने सलाह दी कि उन्हें अब कम बोलना चाहिए और आराम करना चाहिए क्योंकि वह बहुत बूढ़ी हो चुकी हैं।

सवाल-जवाब

सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के किस बयान पर तीखा हमला बोला?
सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी द्वारा अन्नपूर्णा योजना को लेकर फेसबुक लाइव पर उठाए गए सवालों और आरोपों पर पलटवार किया।
अन्नपूर्णा योजना के अब तक कुल कितने लाभार्थी बताए गए हैं?
सुवेंदु अधिकारी के अनुसार इस योजना में अब तक कुल 1 करोड़ 45 लाख 64 हजार 472 लाभार्थी शामिल हैं।
योजना को लेकर सरकार के पास कितनी शिकायतें दर्ज हुई हैं?
अन्नपूर्णा योजना से जुड़ी लगभग 4.5 लाख शिकायतें सरकार के पास आई हैं जिनमें नाम शामिल करने और हटाने के मामले शामिल हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की राजनीतिक गतिविधियों पर क्या तंज कसा?
उन्होंने बारुईपुर और हलीशहर में राजनीतिक कोशिशों का जिक्र करते हुए कहा कि वह गोल खाकर लौटी हैं और उन्हें अब आराम करना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

पश्चिम बंगाल की इस सियासी रस्साकशी से यह साफ है कि कल्याणकारी योजनाओं के आंकड़े अब चुनावी तीर-कमान बन चुके हैं। जब विपक्ष सोशल मीडिया के जरिए सरकार को घेरता है, तो सत्ता पक्ष सीधे लाभार्थियों की जातीय और धार्मिक संख्या सार्वजनिक कर पलटवार करता है। यह रणनीति बताती है कि आने वाले दिनों में हर छोटी प्रशासनिक योजना पर ध्रुवीकरण और तीखे जुबानी हमलों का यह दौर क्षेत्रीय राजनीति की दशा तय करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

पश्चिम बंगाल की इस राजनीतिक जंग में कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक आंकड़ों का मोहरे की तरह इस्तेमाल होना राज्य के वित्तीय प्रबंधन और राजकोषीय अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब राजनीतिक दल जनकल्याण के मुद्दों को केवल जातीय और धार्मिक समीकरणों या जुबानी जंग तक सीमित कर देते हैं, तब आम जनता के वास्तविक विकास से ध्यान भटक जाता है। इस प्रकार की बयानबाजी और ध्रुवीकरण की रणनीति आने वाले समय में राज्य के कारोबारी माहौल और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है, जिससे निवेशकों का भरोसा भी डगमगा सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR