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मौलाना फजलुर रहमान का आसिम मुनीर पर बड़ा हमला, कहा- 1971 के सरेंडर जैसा दोहराया जा रहा इतिहासराजनीति
24 अग॰ 2026, 9:37 am (19 दिन पहले)· 4

मौलाना फजलुर रहमान का आसिम मुनीर पर बड़ा हमला, कहा- 1971 के सरेंडर जैसा दोहराया जा रहा इतिहास

मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की तीखी आलोचना करते हुए 1971 के सैन्य सरेंडर की याद दिलाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात देश को गंभीर संकट की ओर धकेल रहे हैं।

पाकिस्तान के सियासी गलियारों में एक बार फिर सेना के शीर्ष नेतृत्व को लेकर तीखी बयानबाजी तेज हो गई है। प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मौलाना फजलुर रहमान ने देश के आर्मी चीफ को आड़े हाथों लेते हुए एक गंभीर बयान दिया है। उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना पाकिस्तान के इतिहास के सबसे काले और शर्मनाक अध्यायों में से एक से की है। मौलाना ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में जिस तरह हिंसा और तनाव का माहौल लंबे समय से बना हुआ है, वह भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

1971 की हार और झूठे दावों का जिक्र

अपनी बात को मजबूती देते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने दिसंबर, 1971 की ऐतिहासिक घटनाओं का विशेष तौर पर हवाला दिया। उन्होंने याद दिलाया कि भारत के सामने पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक आत्मसमर्पण से ठीक एक दिन पहले, उस दौर के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जनरल याह्या खान ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया था। उस भाषण में बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि पाकिस्तानी फौज देश की एक-एक गली, खेत और पहाड़ पर डटकर मुकाबला जारी रखेगी। लेकिन ठीक अगले ही दिन पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकते हुए हथियार डालने पड़े थे।

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सेना प्रमुख पर सीधा और तीखा निशाना

फजलुर रहमान ने सीधे तौर पर सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अपने निशाने पर लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह सेना की कुल ताकत और उसकी क्षमताओं से कोई इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐतिहासिक सच्चाइयों और पिछली गलतियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। मौलाना का मुख्य तर्क यह था कि अतीत की तरह वर्तमान दौर में भी केवल खोखले दावे और बड़े भाषण दिए जा रहे हैं, जबकि जमीन पर स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।

सवाल-जवाब

मौलाना फजलुर रहमान ने किस घटना का जिक्र किया है?
उन्होंने दिसंबर, 1971 में भारत के सामने हुए पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण का जिक्र किया है।
मौलाना फजलुर रहमान ने किस पर सीधा निशाना साधा है?
उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर सीधा निशाना साधा है।
1971 के आत्मसमर्पण से पहले किसने देश को संबोधित किया था?
तत्कालीन राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जनरल याह्या खान ने राष्ट्र को संबोधित किया था।
मौलाना ने मौजूदा हालात की तुलना किससे की है?
मौलाना ने मौजूदा हिंसा और तनावपूर्ण दौर की तुलना 1971 की शर्मनाक हार से की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

मौलाना फजलुर रहमान का यह बयान पाकिस्तान के आंतरिक शक्ति संतुलन में एक बड़े भूचाल का संकेत देता है। 1971 के सरेंडर जैसी ऐतिहासिक और संवेदनशील मिसाल का सीधे सेना प्रमुख आसिम मुनीर के खिलाफ इस्तेमाल यह बताता है कि वहां का राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व अब सैन्य नीतियों पर खुलकर सवाल उठाने लगा है। यदि यह असंतोष बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे अशांत क्षेत्रों के स्थानीय आक्रोश के साथ जुड़ गया, तो यह पाकिस्तान की मौजूदा प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक भीषण संकट का रूप ले सकता है, जिसके परिणाम क्षेत्रीय स्थिरता को भी प्रभावित करेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

मौलाना फजलुर रहमान की यह चेतावनी सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था और कानून-लहोर की बिगड़ती स्थिति पर एक गंभीर संस्थागत तंज है। जिस तरह से सेना प्रमुख की नीतियों को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा किया गया है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में देश के भीतर अदालती मामलों, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव और बढ़ेगा। यदि इस अंदरूनी कलह और सुरक्षा चुनौतियों का कानूनी और प्रशासनिक समाधान नहीं निकाला गया, तो यह राज्य के बुनियादी ढांचे को हिलाकर रख देगा।

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