शनि गोचर 2024: अगले 95 दिनों तक तुला, मकर और वृषभ राशि के जातकों पर होगी धन वर्षाविकासपुरी में रिंग रोड की सड़क पर सियासी घमासान, प्रवेश वर्मा और जरनैल सिंह आमने-सामनेखाली पेट या रात में केला खाना कितना सही, जानिए फल खाने का सही वक्त और सावधानियांवृषभ राशिफल 28 सितंबर: वृषभ राशि के जातक रहें सतर्क, खर्च पर नियंत्रण और संवाद में स्पष्टता जरूरीबरसाती मौसम में उगने वाली ककोरा सब्जी के क्या हैं फायदे, जानिए इसके पोषण और खानपान से जुड़ी खास बातेंबैंकों में तीन दिन का शटडाउन, जानिए कब और क्यों रहेगी राष्ट्रव्यापी हड़तालबिहार के इस जिले में सड़क किनारे बिकता है विदेशी जायका, ₹200 किलो है कीमतमेष राशिफल 28 सितंबर: सुबह की उलझनें होंगी दूर, जानिए कैसा रहेगा आज का दिनयूपीआई पेमेंट पर नया एमडीआर नियम: 6 हजार के बिल को तीन टुकड़ों में चुकाने पर क्या होगा?गोविंदा की पत्नी सुनीता के समर्थन में उतरीं कश्मीरा शाह, कोमल रानी के बयानों पर उठाए गंभीर सवाल
यूपी चुनाव 2027 से पहले मायावती का बड़ा दांव, राजाराम को बनाया बसपा का राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटरराजनीति
27 सित॰ 2026, 6:26 pm (2 घंटे पहले)· 0

यूपी चुनाव 2027 से पहले मायावती का बड़ा दांव, राजाराम को बनाया बसपा का राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए अनुभवी नेता राजाराम को नया राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी ने अपनी राजनीतिक रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने सबसे भरोसेमंद और पुराने रणनीतिकार राजाराम को बसपा का नया राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर नियुक्त कर दिया है। इस बदलाव को आगामी चुनावी मुकाबले के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी अपने विशेष अभियानों के जरिए चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के आक्रामक प्रचार तंत्र से मुकाबला करने के लिए मायावती ने संगठनात्मक फेरबदल का रास्ता चुना है। इस नियुक्ति से पहले मायावती ने अपने परिवार से जुड़े ईशान आनंद को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी, जिससे साफ जाहिर होता है कि पार्टी में युवाओं के साथ-साथ पुराने अनुभवी चेहरों को भी अहम भूमिका दी जा रही है।

ये भी पढ़ें

राजाराम का राजनीतिक सफर और ट्रैक रिकॉर्ड

राजाराम बहुजन समाज पार्टी के उन चुनिंदा वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं जो मीडिया की सुर्खियों से दूर रहकर पूरी तरह से जमीनी स्तर पर काम करने में विश्वास रखते हैं। उनका राजनीतिक इतिहास काफी लंबा और वफादारी से जुड़ा रहा है। राजाराम उत्तर प्रदेश से दो बार राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। संसद के उच्च सदन में उनकी 89 प्रतिशत तक उपस्थिति उनके काम के प्रति समर्पण और संसदीय अनुशासन की गवाही देती है। इसी कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए मायावती ने उन्हें पार्टी की कमान का एक बड़ा हिस्सा सौंपा है।

कुछ समय पहले ही अगस्त 2026 में मायावती ने उन पर भरोसा जताते हुए मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों के संगठनात्मक कामकाज की जिम्मेदारी सौंपी थी। राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि मायावती ने उन्हें पार्टी के युवा चेहरों को तराशने की बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी है। कुछ दिन पहले ही ईशान आनंद को राजाराम के मार्गदर्शन में पार्टी की नीतियों और कैडर प्रबंधन के गुर सीखने की बात कही गई थी।

इस बड़े राजनीतिक फेरबदल के क्या हैं मायने?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजाराम को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाए जाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि राजाराम मान्यवर कांशीराम के दौर से बहुजन आंदोलन और पार्टी की विचारधारा से पूरी तरह जुड़े रहे हैं। उन्हें भली-भांति पता है कि बसपा के पारंपरिक वोट बैंक और बामसेफ से जुड़े कार्यकर्ताओं को किस तरह से फिर से एक मंच पर लाया जाए।

दूसरा अहम पहलू यह है कि मायावती पार्टी में युवा नेतृत्व को आगे तो बढ़ा रही हैं, लेकिन किसी भी प्रकार की राजनीतिक या प्रशासनिक चूक से बचाने के लिए राजाराम जैसे अनुभवी संरक्षक को उनके साथ खड़ा किया गया है। राजाराम पार्टी के भीतर किसी भी तरह की गुटबाजी से दूर रहे हैं और विभिन्न राज्यों में स्थानीय इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने में माहिर माने जाते हैं।

यूपी चुनाव 2027 और दलित वोटबैंक पर असर

दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले राजाराम की इस नियुक्ति का सीधा असर पार्टी के कैडर पर पड़ना तय माना जा रहा है। वह सुस्त पड़े बसपा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने के लिए ग्रामीण स्तर पर लगातार कैडर कैंप आयोजित करने के लिए जाने जाते हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और दक्षिण भारत के राज्यों में बहुजन जनाधार को फिर से मजबूत करना उनके सामने एक बड़ी चुनौती होगी।

मायावती ने राजाराम को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपकर यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी केवल चुनावी जुमलों के सहारे नहीं, बल्कि अपने पुराने भरोसेमंद कार्यकर्ताओं और अनुभवी रणनीतिकारों के बूते चुनावी मैदान में उतरेगी। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि राजाराम का यह लंबा अनुभव और सांगठनिक कौशल बसपा को मुख्य मुकाबले में कितनी मजबूती से वापस ला पाता है।

सवाल-जवाब

मायावती ने बसपा का नया राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर किसे बनाया है?
मायावती ने वरिष्ठ नेता राजाराम को बसपा का नया राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया है।
राजाराम किस राज्य से दो बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं?
राजाराम उत्तर प्रदेश से दो बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं।
राजाराम को इससे पहले किन राज्यों का प्रभार सौंपा गया था?
अगस्त 2026 में उन्हें मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात और कर्नाटक का संगठनात्मक प्रभार सौंपा गया था।
इस नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य 2027 के यूपी चुनाव से पहले पार्टी के कैडर को सक्रिय करना और पारंपरिक दलित वोटबैंक को एकजुट करना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp