कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के प्रकरण को लेकर तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई (एम) के बीच राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती राजनीतिक समझ की चर्चाओं के बीच, पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को इस नए गठजोड़ को तंज कसते हुए महज सुविधा का रिश्ता बताया। उनका यह बयान एक हालिया मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद आया है, जिसमें भारत निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर आपसी मतभेदों के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सीपीआई (एम) के महासचिव एम.ए. बेबी के बीच आपसी संदेशों के आदान-प्रदान का उल्लेख किया गया था।
राजनीतिक अस्तित्व बचाने की जुगत
सुवेंदु अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि एम.ए. बेबी और ममता बनर्जी के बीच हुए संवाद का सीधा उद्देश्य एक राजनीतिक समझ विकसित करना था। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि एक ऐसा दौर भी था जब पश्चिम बंगाल की आम जनता ने सीपीआई (एम) के लंबे शासन को उखाड़ फेंकने के लिए तृणमूल कांग्रेस को भारी समर्थन देकर सत्ता की कमान सौंपी थी। लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा है कि अब तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई (एम) एक-दूसरे के यार बन गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आपसी मेलजोल केवल खुद को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने की एक सोची-समझी चाल है, लेकिन इन तमाम राजनीतिक जोड़-तोड़ के बावजूद वे राज्य की जमीनी हकीकत को अपने पक्ष में नहीं बदल पाएंगे।
वोटर लिस्ट संशोधन और अदालती प्रक्रिया
नेता प्रतिपक्ष ने ममता बनर्जी की उन तीखी शिकायतों का भी करारा जवाब दिया जिनमें उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के चलते पश्चिम बंगाल में 27 लाख से अधिक वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का दावा किया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपनी आसन्न हार का ठीकरा बेवजह भारतीय जनता पार्टी, निर्वाचन आयोग और एसआईआर के सिर फोड़ने का प्रयास कर रही हैं। हकीकत तो यह है कि खुद ममता बनर्जी ही इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की शरण में गई थीं। शीर्ष अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बाद ही न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी और अंततः इन स्वतंत्र न्यायिक अधिकारियों ने ही तमाम फैसले लिए थे।
जनादेश स्वीकार करने से इनकार
सुवेंदु अधिकारी ने यह भी पुरजोर दावा किया कि ममता बनर्जी समेत तमाम विपक्षी दल आगामी चुनावों में अपनी तयशुदा हार से बचने के लिए एसआईआर को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने 208 सीटें हासिल की थीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस सिमटकर महज 80 सीटों पर ही सिमट कर रह गई। उनका कहना था कि ममता बनर्जी अब जनता के स्पष्ट जनादेश को पचा नहीं पा रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अब तो उन्होंने उस पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न तक खो दिया है जिसे उन्होंने खुद अपने हाथों से गढ़ा था। इसके साथ ही उन्होंने शनिवार दोपहर हुगली जिले के श्रीरामपुर में आयोजित ममता बनर्जी की रैली में समर्थकों की बेहद कम भीड़ का मजाक उड़ाया।



















