तमिलनाडु विधानसभा के हालिया सत्र में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की टिप्पणियों और सरकारिया आयोग को लेकर उठाए गए मुद्दों पर डीएमके नेता एमके स्टालिन ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कड़ा जवाब दिया है। स्टालिन का कहना है कि हाल ही में समाप्त हुए विधानसभा सत्र के दौरान घटी कुछ घटनाओं से तमिल जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में काफी रोष पैदा हुआ है। चूंकि उनके जेल जाने का इतिहास इस पूरे विवाद का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है, इसलिए वे इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। स्टालिन ने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री विजय ने जो भी कहा वह पूरी तरह सच था और उसमें कोई झूठ नहीं था। आपातकाल के समय 30 जनवरी 1976 को मरीना बीच पर मीसा कानून के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जिसके तुरंत बाद तत्कालीन डीएमके सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था।
गोपालापुरम आवास और गिरफ्तारी की पुरानी यादें
अपनी गिरफ्तारी के वाकये को याद करते हुए एमके स्टालिन ने बताया कि सरकार बर्खास्त होने के ठीक बाद पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने उनके गोपालापुरम स्थित घर पहुंची थी, लेकिन उस समय वे वहां मौजूद नहीं थे। कलैगनार ने पुलिस अधिकारियों से कहा था कि उनका बेटा चुनाव प्रचार के सिलसिले में बाहर गया है और अगले दिन वापस लौटेगा, जिसके बाद आकर उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। जब वे अगले दिन घर लौटे, तो कलैगनार ने खुद आगे बढ़कर पुलिस से उन्हें गिरफ्तार करने के लिए कहा था। तमिल राजनीति, साहित्य और सिनेमा के इतिहास में कलैगनार एक बेहद सम्मानित और विशिष्ट नाम है। तमिल भाषा में इस शब्द का शाब्दिक अर्थ कला का विद्वान या कलाकार होता है, जो तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत डीएमके नेता एम. करुणानिधि को उनके बहुआयामी योगदान के लिए प्रदान किया गया था।
जेल में हुई यातनाओं और संघर्ष का ब्योरा
वीडियो संदेश में एमके स्टालिन ने अपनी कैद के दौरान झेली गई प्रताड़नाओं को साझा करते हुए कहा कि उन्हें उस जगह पर रखा गया था जहां कुष्ठ रोगियों को रखा जाता था। उन्हें लाठियों से पीटा जाता था और रातभर सोने नहीं दिया जाता था। इसके अलावा आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे खूंखार कैदियों से भी उन्हें बेरहमी से पिटवाया जाता था। उन्होंने बताया कि उनके साथी और सांसद चिट्टीबाबू को जेल के भीतर इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उनकी मौत हो गई थी। इस दौरान हुए हमले में उनका अपना जबड़ा भी टूट गया था, और मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने जबड़े की तरफ इशारा करके जो बात दिखाई थी, वह एकदम सच थी।
स्टालिन ने कहा कि तमिलों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले प्रत्येक व्यक्ति ने इस तरह के दमन का सामना किया है और यही डीएमके का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने सी. एन. अन्नादुरई के दिनों का हवाला देते हुए कहा कि जिन्हें मुख्यमंत्री अपना वैचारिक गुरु मानते हैं, उनके समय से यह संघर्ष चला आ रहा है। उन्हें इस बात का गर्व है कि वे भी इसी इतिहास का एक अभिन्न हिस्सा हैं। कोई कितनी भी ताकत लगा ले, इस सच्चाई को कभी बदला नहीं जा सकता। यदि किसी को इस बारे में कोई भी संदेह है, तो वह विधानसभा की लाइब्रेरी में जाकर दस्तावेजों और उनके संघर्ष के इतिहास को खुद पढ़ सकता है।
सरकारिया आयोग और ईडी की कार्रवाई पर सवाल
सरकारिया आयोग के संबंध में एमके स्टालिन ने कहा कि मुख्यमंत्री उन लोगों के पुराने आरोपों को ही बार-बार दोहरा रहे हैं जो कलैगनार से राजनीतिक द्वेष रखते थे। आयोग के गठन के बाद केंद्र और राज्य दोनों ही स्तरों पर कई बार सत्ता बदली, और यदि इन आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई होती तो अब तक निश्चित रूप से कोई बड़ी कार्रवाई की जा चुकी होती। स्टालिन ने इस बात पर भी जोर दिया कि यह जगजाहिर है कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज किए गए लगभग 95 प्रतिशत मामले राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होकर शुरू किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के अपने गठबंधन में शामिल कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी कई बार ईडी की जांच का सामना करना पड़ा है। जब मुख्यमंत्री केंद्र सरकार को अपना मुख्य वैचारिक विरोधी करार देते हैं, तो उन्हें यह बात समझ क्यों नहीं आई। स्टालिन ने जोसेफ विजय को यह भी याद दिलाया कि तमिलनाडु विधानसभा की एक उच्च गरिमा है, जो वह पवित्र स्थान है जहां कई महान विभूतियों ने मिलकर इस राज्य को आकार दिया है। अब इस महान परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान मुख्यमंत्री के कंधों पर भी है।
व्यक्तिगत मुलाकात और राजनीतिक तीखे हमले
एमके स्टालिन ने पुरानी मुलाकातों का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जोसेफ विजय उनके घर आए थे और उन्होंने हाथ पकड़कर उनका स्वागत किया था। उस समय विजय ने अपने चुनावी प्रचार के दौरान की गई कड़ी आलोचनाओं के लिए माफी भी मांगी थी। स्टालिन ने उस वक्त कहा था कि वे उन बातों को दिल से नहीं लगाते हैं और एक मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए हर किसी के बारे में शालीनता और गरिमा के साथ बात करनी चाहिए। लेकिन अब ऐसा लगता है कि वे उन सभी बातों को पूरी तरह भूल चुके हैं।
स्टालिन ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री केवल उनके द्वारा बनाए गए पुलों पर खड़े होकर अपने फोटो शूट करवा रहे हैं। उन्होंने विधानसभा को रील्स बनाने का अड्डा बना दिया है और पूरे प्रशासन को किसी सिनेमा की शूटिंग की तरह चलाया जा रहा है। अपनी अक्षमता और विफल प्रशासन को छिपाने के लिए तरह-तरह के वीडियो रील्स सोशल मीडिया पर डालकर वे राज्य की पूरी युवा पीढ़ी को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार की विफलताओं को गिनाते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह बदतर हो चुकी है, आए दिन चोरियां हो रही हैं और महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को रद्द कर उन्होंने तमिलनाडु के विकास को कम से कम 15 साल पीछे धकेल दिया है। किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ करने का वादा भी ढंग से लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा छह एलपीजी सिलेंडर देने का वादा करके अब उसे घटाकर केवल तीन सिलेंडर पर ला दिया गया है, और महिलाओं को ढाई हजार रुपए देने के वादे के बजाय डीएमके सरकार द्वारा शुरू की गई एक हजार रुपए की राशि ही दी जा रही है।
अंत में एमके स्टालिन ने अपने सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं से आह्वान किया कि डीएमके ने कभी भी सत्ता से बाहर होने को अपनी हार नहीं माना है। चाहे पार्टी सत्ता में हो या विपक्ष में, तमिलनाडु की प्रगति और उसके अधिकारों के लिए हमेशा डटकर लड़ते रहना होगा। गौरतलब है कि सितंबर महीने के शुरुआती सप्ताह में तमिलनाडु विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पिछली डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए थे और सरकारिया आयोग तथा पुराने मामलों का जिक्र किए जाने के बाद से राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।





















