मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में उतरे विपक्षी दलों के नेताओं पर पुलिस ने व्यापक कार्रवाई की है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, चंडीगढ़ और मुंबई समेत कई प्रमुख शहरों में आयोजित प्रदर्शनों के दौरान राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों के प्रमुख चेहरों को सुरक्षा बलों ने अपनी हिरासत में ले लिया। दिल्ली में सीजेपी आंदोलन के समर्थन में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि सड़कों पर उतरे थे, लेकिन प्रशासनिक बंदोबस्त के बीच अधिकांश नेताओं को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने या सभा करने से पहले ही रोक दिया गया।
साउथ एवेन्यू पर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को रोका गया
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी अपने पार्टी सहयोगियों के साथ नई दिल्ली के साउथ एवेन्यू स्थित बस स्टॉप पर एकत्रित होकर अपना विरोध दर्ज करा रही थीं। इस शांतिपूर्ण जमावड़े के दौरान दिल्ली पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। उनके साथ मौजूद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओब्रायन, सांसद प्रतिमा मंडल और डोला सेन को भी सुरक्षा कर्मियों ने अपनी गाड़ी में बैठाकर हिरासत केंद्र भेज दिया।
अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर दिल्ली पुलिस का पहरा
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उनके आवास 95 लोधी एस्टेट के बाहर से ही पुलिस ने रोक लिया। वे विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के उद्देश्य से अपने घर से बाहर कदम रख रहे थे, तभी मौके पर तैनात पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी और वहीं हिरासत में ले लिया। आम आदमी पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं पर भी इसी तरह की कार्रवाई देखने को मिली। वरिष्ठ नेता संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और गोपाल राय को भी पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में अपनी कस्टडी में लिया। इसके साथ ही चंडीगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे पार्टी नेता मनीष सिसोदिया को पंजाब पुलिस ने हिरासत में लिया।
जंतर-मंतर पर वामपंथी दलों के नेताओं की गिरफ्तारी
ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने पहुंचे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एम.ए.बेबी और पार्टी की वरिष्ठ नेत्री वृंदा करात को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। करात के अनुसार, जंतर-मंतर जाने से पूर्व वामपंथी नेता केरल भवन में एकत्र हुए थे। प्रदर्शन स्थल पर उपस्थित कार्यकर्ताओं और नेताओं ने 'अमित शाह, देखो हम जंतर-मंतर आ गए' जैसे तीखे नारे लगाए। इसके तुरंत बाद पुलिस ने सभी नेताओं को बसों में बैठाया और उन्हें सुभाष नगर पुलिस थाने ले गई। वामपंथी छात्र संगठन की नेता नेहा बोरा को भी इसी अभियान के तहत पकड़ा गया।
मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में भी पुलिस की सख्त कार्रवाई
विरोध की यह गूंज केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि मुंबई में भी इसका असर देखने को मिला। 'हम भारत के लोग' नामक सामाजिक संगठन के प्रमुख और महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को अगस्त क्रांति मैदान में सभा की तैयारी के दौरान हिरासत में लिया गया। तुषार गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्टर साझा करके नागरिकों से अपराह्न साढ़े तीन बजे अगस्त क्रांति मैदान में एकत्रित होकर विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया था। पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बांद्रा से अपनी हिरासत में लिया और डीएन नगर पुलिस थाने ले गई, जहां उनके संगठन के अन्य सदस्यों को भी रखा गया।


















