मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है और कांग्रेस ने इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी को घेरने के लिए एक विस्तृत और आक्रामक योजना को अंतिम रूप दे दिया है। सत्ताधारी दल के मुख्यमंत्रियों के आक्रामक रुख के बाद अब विपक्षी दल ने भी पलटवार करने का ठोस खाका खींच लिया है। पार्टी सांसद राहुल गांधी पहले से ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं और अब आयोग के भीतर से मतभेद की खबरें सामने आने के बाद कांग्रेस इस राजनीतिक मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती है। इस पूरी रणनीति को दस प्रमुख बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है।
देशभर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन
आंदोलन की शुरुआत करते हुए 28 सितंबर को देश भर के तमाम जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। कार्यकर्ता जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय का घेराव करेंगे और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग से जुड़ा एक ज्ञापन सौंपेंगे। देश भर में कांग्रेस की कुल जिला इकाइयां एक हजार से अधिक हैं, क्योंकि कई स्थानों पर संगठनात्मक सुविधा के लिए शहरी और ग्रामीण स्तर पर दो अलग-अलग जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं।
कांग्रेस कार्यसमिति की उच्चस्तरीय बैठक
अगले ही दिन यानी 29 सितंबर को पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में सुबह साढ़े दस बजे कांग्रेस कार्यसमिति की एक अहम बैठक बुलाई जाएगी। मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में होने वाली इस बैठक में राहुल गांधी समेत पार्टी के तमाम दिग्गज नेता और कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी हिस्सा लेंगे। इस बैठक में कथित वोट चोरी के मामलों और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक के दौरान एक औपचारिक प्रस्ताव पारित कर ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराई जाएगी और हालिया खुलासों के साथ एसआईआर पर भी व्यापक चर्चा होगी।
इंडिया गठबंधन की बैठक और साझा रणनीति
इसके ठीक बाद 30 सितंबर को विपक्षी इंडिया गठबंधन की एक विशेष बैठक प्रस्तावित है। यह बैठक मुख्य तौर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पहल पर बुलाई गई है जिसकी जानकारी तृणमूल कांग्रेस की तरफ से दी गई थी। इस मंच पर कांग्रेस चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर अपना पक्ष रखेगी तथा राहुल गांधी के उठाए गए मुद्दों को मजबूती से रखेगी। हालांकि गठबंधन के अन्य सहयोगी दल मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग पर भी जोर दे रहे हैं।
मुख्यमंत्रियों और मीडिया विभाग की आक्रामक भूमिका
कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी पार्टी की आधिकारिक लाइन पर चलते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को पुरजोर तरीके से उठाएंगे और मीडिया के सामने इस विषय पर अपनी सक्रियता बढ़ाएंगे। इसके साथ ही पार्टी का केंद्रीय मीडिया विभाग देश भर में कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त पर केंद्र सरकार से मिलीभगत के आरोपों को लेकर सिलसिलेवार प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा। पार्टी के प्रवक्ता टेलीविजन डिबेट्स और साक्षात्कारों में राहुल गांधी के रुख का आक्रामक बचाव करेंगे।
केरल के विवादित मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना
केरल के पूर्व मुख्य सचिव को कथित तौर पर ज्ञानेश कुमार द्वारा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिए जाने के विवाद को अब राष्ट्रीय फलक पर जोर-शोर से उठाया जाएगा। केरल इकाई के नेता पहले से ही इस मुद्दे को लेकर काफी मुखर रहे हैं और अब इसे व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाएगा। पार्टी का सोशल मीडिया प्रकोष्ठ इस अभियान को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेहद आक्रामक रूप से चलाएगा जिसमें विजुअल सामग्री, मीम और रील्स के माध्यम से राहुल गांधी के संदेश को आम जनता तक पहुंचाया जाएगा और सरकार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का आरोप प्रमुखता से उछाला जाएगा।
संसद में महाभियोग और शीतकालीन सत्र का एजेंडा
खुद राहुल गांधी विभिन्न मंचों से इस मसले पर लगातार आवाज उठाते रहेंगे। संसद के आगामी शीतकालीन सत्र से ठीक पहले कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का औपचारिक नोटिस संसद में पेश करने की तैयारी में है और इस संबंध में इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के साथ शुरुआती बातचीत भी पूरी हो चुकी है। शीतकालीन सत्र के दौरान पार्टी का मुख्य एजेंडा केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहना होगा, जिसके चलते सत्र के सुचारू रूप से चलने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है।



















