राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायाद ऑफिस की याद सताने पर जरूर देखें ये 6 बेहतरीन ऑफिस कॉमेडी फिल्में, मिलेगा भरपूर मनोरंजनगंगा के बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के घांघर में गहराया चारे का संकट, भुखमरी की कगार पर पहुंचे मवेशीअफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी परेशानी, नेट प्रैक्टिस के दौरान चोटिल हुए ईशान किशननई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का बिना प्रोटोकॉल वाला इशारा, अजित डोभाल से पुतिन की मुलाकात के क्या हैं कूटनीतिक मायने?कर्क साप्ताहिक राशिफल 13-19 सितंबर के लिए: मंगल के गोचर से करियर और आर्थिक जीवन में बदलाव, जानें अपना भाग्यभाई किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद नॉर्वे की राजकुमारी ऐस्ट्रिड का निधन121 दिनों तक देवगुरु बृहस्पति की वक्री चाल: 6 राशियों के करियर और धन लाभ में आएगा बड़ा मोड़पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य, एयर इंडिया घटना के बाद DGCA का आदेशगूगल फोटोज की इन 10 सीक्रेट सेटिंग्स से बचाएं स्टोरेज और सुरक्षित रखें अपनी प्राइवेसी
मुक्तसर रैली से अकाली दल के चुनावी शंखनाद के दौरान भगवंत मान और अमृतपाल सिंह पर बरसे सुखबीर सिंह बादलराजनीति
26 अग॰ 2026, 11:29 pm (16 दिन पहले)· 2

मुक्तसर रैली से अकाली दल के चुनावी शंखनाद के दौरान भगवंत मान और अमृतपाल सिंह पर बरसे सुखबीर सिंह बादल

पंजाब विधानसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और खडूर साहिब सांसद अमृतपाल सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।

पंजाब विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुक्तसर साहिब में आयोजित 'पंजाब बचाओ' रैली के जरिए अपने आधिकारिक चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी है। रैली के दौरान एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अकाली दल प्रमुख ने राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए। अपनी इस जनसभा के दौरान उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यशैली पर सवाल उठाए, बल्कि जेल में निरुद्ध सांसद अमृतपाल सिंह और उनके संगठन की गतिविधियों पर भी कड़े सवाल खड़े किए।

भगवंत मान की कार्यशैली और धार्मिक प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल

मुक्तसर साहिब की रैली में सुखबीर सिंह बादल के भाषण का सबसे बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री भगवंत मान की आलोचना पर केंद्रित रहा। अकाली दल के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य के मुख्यमंत्री सिख धर्म और उसकी मान्यताओं का लगातार अनादर कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान शराब का सेवन करने के बाद पवित्र गुरुद्वारों में प्रवेश करते हैं और सिख महापुरुषों का अपमान करते हैं। इसके बावजूद हैरान करने वाली बात यह है कि विपक्षी राजनीतिक दल राज्य सरकार की नाकामियों को उजागर करने के बजाय अकाली दल को निशाना बनाने में अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं।

ये भी पढ़ें

बादल ने मुख्यमंत्री के पांच साल के कार्यकाल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि भगवंत मान ने अपने पूरे शासनकाल को सिर्फ चुटकुले सुनाने और मंच संचालन तक ही सीमित रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के बुनियादी विकास, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पंजाब के विकास के मोर्चे पर मान सरकार पूरी तरह से विफल साबित हुई है और राज्य की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

अमृतपाल सिंह के राजनीतिक उभार और पारिवारिक संबंधों पर घेराबंदी

मुख्यमंत्री के अलावा सुखबीर सिंह बादल के निशाने पर खडूर साहिब लोकसभा सीट से निर्वाचित सांसद अमृतपाल सिंह भी रहे। गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह ने वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए लड़ा और उसमें जीत हासिल की, और वह वर्तमान में भी जेल में ही निरुद्ध हैं। उनके राजनीतिक सफर पर सवाल उठाते हुए अकाली दल के अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2022 में अमृतपाल सिंह अचानक दुबई से पंजाब आए थे और महज दो वर्षों के भीतर ही सांसद बनने में कामयाब हो गए।

बादल ने इस तीव्र राजनीतिक उभार के पीछे किसी बड़ी अदृश्य ताकत का हाथ होने की आशंका जताई। उन्होंने दावा किया कि इतने कम समय में एक अज्ञात व्यक्ति का सांसद बन जाना यह स्पष्ट संकेत देता है कि उन्हें आगे बढ़ाने के पीछे पर्दे के पीछे से सहायता दी जा रही थी। इसके साथ ही सुखबीर सिंह बादल ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि अमृतपाल सिंह के परिवार के संबंध पुराने समय से ही कांग्रेस पार्टी के साथ रहे हैं।

'वारिस पंजाब दे' संगठन और बंदी सिखों के मुद्दे पर तीखा प्रहार

संगठन 'वारिस पंजाब दे' की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए अकाली दल प्रमुख ने कहा कि अकाली दल का एक गौरवशाली इतिहास रहा है और उसके नेताओं ने अपनी रिहाई के लिए कभी किसी के सामने दया की भीख नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि वास्तविक बहादुर वही होते हैं जो अपने सिद्धांतों और प्राथमिकताओं के लिए लड़ते हैं। बादल ने तंज कसते हुए कहा कि यह संगठन जनहित के मुद्दों से दूर होकर केवल अपने नेता की रिहाई तक सीमित रह गया है।

अमृतपाल सिंह को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की कोशिशों पर बादल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह एक मजाक जैसा लगता है, क्योंकि किसी को भी उनके पिछले रिकॉर्ड या भविष्य के विजन की कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि यह संगठन लंबे समय से जेलों में बंद 'बंदी सिखों' की रिहाई के वास्तविक मुद्दे की पूरी तरह उपेक्षा कर रहा है। संगठन का पूरा ध्यान केवल अपने व्यक्तिगत नेता को जेल से बाहर निकालने पर ही केंद्रित है।

पूर्व मुख्यमंत्री सरदार प्रकाश सिंह बादल का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने अपने जीवन के 16 वर्ष जेल की सलाखों के पीछे बिताए थे, लेकिन कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इसके विपरीत 'वारिस' संगठन महज दो साल के भीतर ही अपनी मांगों को लेकर विलाप कर रहा है। उन्होंने बंदी सिखों के वास्तविक आंदोलन से भटकने पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए इसे एक शर्मनाक स्थिति करार दिया।

हालिया हमला और राज्य में सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां

इस राजनीतिक घटनाक्रम के साथ ही यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हाल ही में महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित एक परिसर में सुखबीर सिंह बादल पर एक जानलेवा हमला हुआ था। उस घटना के दौरान एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला कर दिया था, जिसके बाद उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि हमलावर पंजाब में लगातार बढ़ रही नशे की समस्या को लेकर नाराज था। इस पृष्ठभूमि के बावजूद सुखबीर सिंह बादल ने अपने सार्वजनिक अभियानों को जारी रखते हुए मुक्तसर साहिब रैली से राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।

सवाल-जवाब

सुखबीर सिंह बादल ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कहां से की?
सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब के मुक्तसर साहिब में आयोजित 'पंजाब बचाओ' रैली से अपने विधानसभा चुनाव अभियान का आगाज किया।
सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सिख मान्यताओं का अनादर करते हैं, विकास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय पांच साल चुटकुले सुनाने में बिताए और अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे।
अमृतपाल सिंह को लेकर सुखबीर बादल ने क्या सवाल खड़े किए?
उन्होंने सवाल उठाया कि 2022 में दुबई से लौटकर अमृतपाल सिंह महज दो साल में खडूर साहिब से सांसद कैसे बन गए, जिससे उनके पीछे किसी बाहरी बैकअप का संकेत मिलता है।
सुखबीर सिंह बादल ने 'वारिस पंजाब दे' संगठन की क्या आलोचना की?
उन्होंने कहा कि यह संगठन बंदी सिखों की रिहाई के बजाय केवल अपने एक नेता को छुड़ाने और उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाने के प्रयास में लगा हुआ है।
सुखबीर बादल पर हाल ही में कहां हमला हुआ था?
महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक निहंग ने सुखबीर सिंह बादल पर कृपाण से हमला कर दिया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·15 दिन पहले

पंजाब की इस राजनीतिक उठापटक का सीधा असर अब स्थानीय संस्कृति और पॉप कल्चर पर दिखने लगा है, जहाँ चुनावी बयानबाज़ी सोशल मीडिया मीम्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मुख्य चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि युवा मतदाता इस पारंपरिक राजनीतिक नैरेटिव और ओटीटी पर चल रहे राजनीतिक ड्रामे के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·15 दिन पहले

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल द्वारा मुक्तसर साहिब से 'पंजाब बचाओ' रैली के जरिए चुनावी शंखनाद करना और वर्तमान सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलना राज्य की बदलती राजनीतिक गतिशीलता को दर्शाता है। एक तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान की कार्यशैली पर सवाल उठाना और दूसरी तरफ जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह के तेजी से हुए राजनीतिक उभार तथा कथित पारिवारिक संपर्कों पर निशाना साधना यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में क्षेत्रीय राजनीति और धार्मिक मुद्दों पर बयानबाजी और तेज होगी।

Sophie Laurent@sophie-laurent·15 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस भू-राजनीतिक और क्षेत्रीय संदर्भ में यह स्पष्ट है कि सुखबीर सिंह बादल का यह आक्रामक रुख अकाली दल के पारंपरिक पंथक वोटबैंक को एकजुट करने की सोची-समझी रणनीति है। भगवंत मान और अमृतपाल सिंह दोनों को एक ही मंच पर घेरकर अकाली दल ने अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने और सत्ता विरोधी रुझान को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास किया है। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह ध्रुवीकरण और धार्मिक मुद्दों पर केंद्रित बयानबाजी विकास और बेरोजगारी जैसे जमीनी मुद्दों को पीछे छोड़ देगी या जनता इसे खारिज करेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

मुक्तसर रैली से अकाली दल के चुनावी शंखनाद ने पंजाब की सियासत में एक बार फिर धार्मिक और क्षेत्रीय मुद्दों को केंद्र में ला दिया है। एक तरफ सुखबीर सिंह बादल ने सत्ताधारी दल की कार्यशैली और प्रशासनिक विफलताओं पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी तरफ अमृतपाल सिंह के तेजी से हुए राजनीतिक उभार और उनके पारिवारिक संबंधों को लेकर जो गंभीर आशंकाएं जताई गई हैं, वे आने वाले विधानसभा चुनावों में नए समीकरण और ध्रुवीकरण की रूपरेखा तैयार कर सकती हैं। यह देखना अहम होगा कि राज्य के आर्थिक और विकासात्मक मुदों के बीच ये भावनात्मक और राजनीतिक आक्षेप चुनावी नतीजों को किस दिशा में मोड़ते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 दिन पहले

मुक्तसर की इस रैली और उठाए गए राजनीतिक मुद्दों से पंजाब के चुनावी मैदान में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के आयाम फिर से बहस के केंद्र में आ गए हैं। जेल में बंद सांसद के उभार और धार्मिक भावनाओं से जुड़े इन संवेदनशील मामलों पर जिस तरह के आरोप-प्रत्यारोप शुरू हुए हैं, उससे आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों, खुफिया तंत्र और राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ने की पूरी संभावना है। राज्य की आंतरिक सुरक्षा और चुनावी माहौल पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR