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पंजाब चुनाव 2027 में अकेले सभी सीटों पर उतरेगी बीजेपी, सतीश पूनिया ने अकाली दल से गठबंधन की अटकलों पर लगाया विरामराजनीति
1 सित॰ 2026, 7:05 pm (55 दिन पहले)· 2

पंजाब चुनाव 2027 में अकेले सभी सीटों पर उतरेगी बीजेपी, सतीश पूनिया ने अकाली दल से गठबंधन की अटकलों पर लगाया विराम

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चाओं पर विराम लग गया है। पंजाब बीजेपी के प्रभारी सतीश पूनिया ने स्पष्ट किया है कि पार्टी राज्य की सभी 117 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।

चंडीगढ़ में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर तस्वीर साफ होने लगी है। पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि भारतीय जनता पार्टी और उसका पुराना सहयोगी दल एक बार फिर हाथ मिला सकते हैं। हालांकि, पंजाब बीजेपी के नवनियुक्त संगठनात्मक प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सतीश पूनिया ने इन तमाम अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। चंडीगढ़ में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने दो टूक शब्दों में यह बात दोहराई कि यह बात भले ही सुनने में नीरस लगे, लेकिन बीजेपी अपनी खुद की ताकत और क्षमता के बल पर पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेगी। इस बड़े बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या 2027 के चुनावी समर में सुखबीर सिंह बादल के साथ पार्टी की बात किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई?

पार्टी के भीतर और बाहर उठ रहे थे अलग-अलग सुर

सतीश पूनिया का यह तीखा और स्पष्ट बयान ऐसे समय में सामने आया है जब खुद बीजेपी के भीतर से ही विरोधाभासी राय सामने आ रही थीं। पार्टी के कई दिग्गज नेता, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ शामिल हैं, लगातार अकाली दल के साथ दोबारा गठबंधन करने की पैरवी कर रहे थे। उनका मानना था कि ऐसा करने से पंथिक और हिंदू वोटों को एकजुट करने में आसानी होगी। इसके अलावा, अकाली दल के नेताओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकातों ने भी इन कयासों को हवा दी थी। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रधानमंत्री और अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात हुई थी, और हाल ही में बादल पर हुए हमले के बाद प्रधानमंत्री ने उनका हालचाल भी जाना था। इन सब घटनाओं के बावजूद, नए प्रभारी द्वारा सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दिए जाने से तमाम राजनीतिक कयासों का अंत हो गया है।

अकाली दल से दूरी और बीजेपी की नई राजनीतिक रणनीति

सतीश पूनिया ने यह भी साफ कर दिया कि वे दिल्ली स्थित पार्टी आलाकमान का सीधा संदेश लेकर आए हैं। नेताओं की प्रधानमंत्री से होने वाली शिष्टाचार मुलाकातों का मतलब राजनीतिक गठबंधन निकाला जाना सही नहीं है। आपको बता दें कि साल 2020 में तीन कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल से नाता टूटने से पहले, बीजेपी पंजाब में छोटे भाई की भूमिका निभाते हुए महज 23 सीटों पर ही चुनाव लड़ा करती थी। अब राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं और पार्टी किसी क्षेत्रीय दल की छत्रछाया में रहने के बजाय पंजाब में खुद को एक मजबूत मुख्य राष्ट्रीय विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है। अकेले चुनाव लड़ने के इस आधिकारिक ऐलान से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं तक भी एक साफ संदेश पहुंच गया है कि उन्हें राज्य की सभी 117 सीटों पर अपनी जड़ें मजबूत करनी होंगी।

मिशन 2027 की तैयारी और बूथ स्तर पर फोकस

पंजाब की कमान संभालते ही सतीश पूनिया ने अपने तीन दिवसीय संगठनात्मक दौरे की शुरुआत कर दी है। 'मिशन 2027' के तहत पार्टी राज्य में अपनी जमीनी पकड़ को और अधिक धार देने के लिए एक बहुस्तरीय योजना पर तेजी से काम कर रही है। चंडीगढ़ से लेकर जालंधर तक वे लगातार कोर कमेटी, जिला अध्यक्षों और जिला प्रभारियों के साथ मैराथन बैठकें कर रहे हैं। इस पूरी रणनीति का मुख्य केंद्र बिंदु बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और काडर को फिर से पूरी तरह सक्रिय करना है। बीजेपी आने वाले दिनों में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार को राज्य में बढ़ते नशे के कारोबार, नारको-आतंकवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर घेरने का मुकम्मल खाका तैयार कर रही है। पार्टी की योजना 17 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच पूरे पंजाब में एक व्यापक सामाजिक सेवा अभियान चलाने की है, जिसके जरिए शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाई जा सकेगी।

दिलचस्प और बहुकोणीय मुकाबला बनने के आसार

आगामी चुनाव के मद्देनजर बीजेपी पुराने अनुभवी कार्यकर्ताओं की मेहनत और कांग्रेस तथा अन्य दलों से आए कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ जैसे बड़े नेताओं के जनाधार के बीच एक बेहतरीन संतुलन बिठाने में जुटी हुई है। सतीश पूनिया के इस कड़े संदेश से यह बिल्कुल साफ हो गया है कि अकाली दल के साथ भविष्य में किसी भी तरह के समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है और पार्टी अपने बूते पर ही चुनावी वैतरणी पार करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी के मैदान में अलग-अलग उतरने की स्थिति में पंजाब का यह आगामी विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय संघर्ष में तब्दील हो सकता है।

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सवाल-जवाब

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव कितने सीटों पर होंगे?
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव सभी 117 सीटों पर होंगे।
बीजेपी की तरफ से अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किसने किया है?
यह ऐलान पंजाब बीजेपी के नए संगठनात्मक प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सतीश पूनिया ने किया है।
क्या अकाली दल और बीजेपी के बीच गठबंधन की कोई संभावना बची है?
नहीं, सतीश पूनिया ने साफ कर दिया है कि गठबंधन की अब कोई गुंजाइश नहीं है और बीजेपी सभी सीटों पर अकेले उतरेगी।
कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल ने बीजेपी से नाता कब तोड़ा था?
अकाली दल ने साल 2020 में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर बीजेपी से नाता तोड़ लिया था।
बीजेपी पंजाब में किस अभियान के जरिए मतदाताओं से संपर्क साधेगी?
बीजेपी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक पंजाब भर में सामाजिक सेवा अभियान चलाएगी।
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