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अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता... नागपुर में नितिन गडकरी के इस बयान से क्यों गरमाई सियासत?राजनीति
24 अग॰ 2026, 4:37 pm (1 घंटे पहले)· 2

अब मैं ज्यादा काम नहीं कर सकता... नागपुर में नितिन गडकरी के इस बयान से क्यों गरमाई सियासत?

नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि वह अब पहले की तरह ज्यादा काम नहीं कर सकते और नई पीढ़ी को आगे आना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है।

नागपुर में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के एक हालिया संबोधन ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। कटोल क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने टिप्पणी की कि अब वह पहले की तरह अधिक काम नहीं कर सकते और अब नई पीढ़ी को कमान संभालनी चाहिए। उनके इस बयान के सामने आते ही सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वह सक्रिय राजनीति से किनारा करने का मन बना रहे हैं।

बयान के मायने और राजनीतिक कयास

हालांकि नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में राजनीति से संन्यास लेने या अपने मंत्री पद को छोड़ने को लेकर किसी प्रकार की स्पष्ट घोषणा नहीं की है। उनके द्वारा कही गई बातों का संदर्भ मुख्य रूप से उनकी उम्र, स्वास्थ्य और युवाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। कटोल में आयोजित 'एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कक्षा' में बोलते हुए उन्होंने अपने लगभग 30 लंबे वर्षों के सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को साझा किया।

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कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के विभिन्न उतार-चढ़ाव और इस दौरान मिले तमाम पुरस्कारों का भी जिक्र किया। इसी बातचीत के सिलसिले में उन्होंने यह बात कही कि अब उन्हें अधिक काम करने से बचना चाहिए और नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। उनके इसी कथन को लेकर अब विभिन्न राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

जीवनशैली और स्वास्थ्य को दी प्राथमिकता

नितिन गडकरी के इस बयान को सोशल मीडिया पर उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है कि वह राजनीति या मंत्रिमंडल से अलग हो रहे हैं। उनकी इस चर्चा में स्वास्थ्य से जुड़ा पहलू भी बेहद अहम रहा। उन्होंने साझा किया कि कोरोना महामारी के प्रकोप के बाद उन्होंने अपनी दिनचर्या और जीवनशैली में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं और वह अब नियमित तौर पर योग का अभ्यास करते हैं।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर इंसान का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो फिर किसी भी सत्ता, पद या प्रतिष्ठा का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि पहले पार्टी के लिए सक्रिय रूप से काम करते वक्त उनका खानपान और रहन-सहन काफी अलग था। उस दौर में वह कभी भी समोसा खा लेते थे और कहीं भी सो जाया करते थे, लेकिन अब उन्होंने अपनी आदतों में पूरी तरह सुधार कर लिया है और सेहत को पहली प्राथमिकता बना दिया है।

किसानों के कल्याण पर केंद्रित रहने की इच्छा

अपने सार्वजनिक जीवन के इस पड़ाव पर नितिन गडकरी ने किसानों की स्थिति को लेकर अपनी गहरी चिंता भी व्यक्त की। देश में लगातार सामने आ रही किसानों की आत्महत्या की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने पास बचे हुए समय का उपयोग किसानों के जीवन स्तर को सुधारने और उनके कल्याण के लिए समर्पित करना चाहते हैं।

कुल मिलाकर उनके इस पूरे बयान का एक बड़ा हिस्सा राजनीति छोड़ने के संकेत के बजाय जिम्मेदारियों के नए स्वरूप, स्वास्थ्य के प्रति सजगता और अन्नदाताओं के हित में काम करने की उनकी इच्छा से जुड़ा हुआ नजर आता है।

सवाल-जवाब

नितिन गडकरी ने नागपुर के किस कार्यक्रम में बयान दिया?
नितिन गडकरी ने नागपुर के कटोल में आयोजित 'एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण कक्षा' कार्यक्रम में यह बयान दिया।
नितिन गडकरी ने अपने बयान में मुख्य रूप से क्या कहा?
उन्होंने कहा कि अब वह ज्यादा काम नहीं कर सकते और नई पीढ़ी को आगे आने का मौका मिलना चाहिए।
क्या गडकरी ने राजनीति छोड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा की है?
नहीं, उन्होंने अपने भाषण में राजनीतिक संन्यास या मंत्री पद छोड़ने की कोई सीधी घोषणा नहीं की है।
गडकरी ने अपने स्वास्थ्य को लेकर क्या जानकारी दी?
उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बाद उन्होंने अपनी जीवनशैली बदली है, नियमित योग करते हैं और अब स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं।
गडकरी ने किसानों के बारे में क्या चिंता जताई?
उन्होंने किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने बचे हुए समय में किसानों के कल्याण के लिए अधिक काम करना चाहते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·अभी

नितिन गडकरी का यह बयान केवल राजनीतिक भविष्य की अटकलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ नेताओं की शारीरिक सीमाओं और स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर एक यथार्थवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। महामारी के बाद बदली जीवनशैली और किसानों के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने की उनकी इच्छा यह संकेत देती है कि वे अब प्रशासनिक पदों की दौड़ से परे सामाजिक और ज़मीनी मुद्दों पर अपनी ऊर्जा लगाना चाहते हैं। हालांकि, ऐसे बयानों से राजनीतिक गलियारों में कयासबाज़ी तेज़ होना लाजिमी है, लेकिन इसका असल प्रभाव उनके आगामी संगठनात्मक और नीतिगत निर्णयों पर ही दिखेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·अभी

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, नागपुर में गडकरी के इस बयान के गहरे राजनीतिक निहितार्थ हैं। उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के संगठनात्मक हलकों में अक्सर यह चर्चा रहती है कि वरिष्ठ नेताओं को नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। हालांकि उनके पास सड़क बुनियादी ढांचे जैसे बड़े विकास कार्यों का ट्रैक रिकॉर्ड है, लेकिन उनका यह कहना कि वे अब स्वास्थ्य और किसानों के कल्याण पर ध्यान देंगे, पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और प्राथमिकताओं के बदलाव की ओर एक मौन संकेत हो सकता है। आगामी समय में उनके इन बयानों के राष्ट्रीय राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

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