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नशामुक्त महाराष्ट्र के 2029 लक्ष्य पर उद्धव ठाकरे गुट का हमला, पूछा- 10 साल से सत्ता में रहकर क्या कियाराजनीति
3 सित॰ 2026, 12:49 pm (54 दिन पहले)· 1

नशामुक्त महाराष्ट्र के 2029 लक्ष्य पर उद्धव ठाकरे गुट का हमला, पूछा- 10 साल से सत्ता में रहकर क्या किया

महाराष्ट्र सरकार के साल 2029 तक राज्य को पूरी तरह नशामुक्त बनाने के संकल्प पर उद्धव ठाकरे गुट ने कड़ा हमला बोला है। उन्होंने सत्तारूढ़ गठबंधन पर नशीले पदार्थों के व्यापार को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

महाराष्ट्र राज्य को साल 2029 तक पूरी तरह नशामुक्त बनाने के राज्य सरकार के प्रशासनिक संकल्प पर विपक्षी राजनीतिक हलकों से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। शिवसेना के उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने सत्ता पक्ष के इस महत्वाकांक्षी अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे केवल एक दिखावा और प्रचार केंद्रित तमाशा करार दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि पिछले एक दशक से अधिक समय से केंद्र और राज्य की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद वर्तमान शासन प्रणाली राज्य में तेज़ी से फैलते अवैध मादक पदार्थों के कारोबार को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है।

10 साल के शासन और 2029 की समय सीमा पर सवाल

विपक्षी गुट ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल का उल्लेख करते हुए याद दिलाया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार साल 2014 से लगातार कार्यरत है। इसके साथ ही देवेंद्र फडणवीस भी लगभग इसी पूरे समय के दौरान महाराष्ट्र के प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व में प्रमुख भूमिका में रहे हैं। इस लंबे कार्यकाल का हवाला देते हुए उद्धव ठाकरे खेमे ने राज्य के आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने कैलेंडर में 2029 की समय सीमा को दर्ज कर लें। उन्होंने कहा कि तय समय पूरा होने पर जनता को वर्तमान राजनीतिक नेतृत्व से उनके कामकाज और वादों का पूरा हिसाब मांगना चाहिए।

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राजनीतिक संरक्षण और जांच दबाने के गंभीर आरोप

राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर सीधा हमला बोलते हुए विपक्षी गुट ने आरोप लगाया कि अवैध ड्रग्स के सिंडिकेट, शराब निर्माता और तस्करों के नेटवर्क को स्पष्ट रूप से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। नासिक, पुणे और सतारा जैसे शहरों में पहले पकड़ी गई अवैध विनिर्माण इकाइयों और कारखानों का हवाला दिया गया। आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नियंत्रण वाले राज्य गृह विभाग ने रासायनिक गोलियों का निर्माण करने वाली फैक्ट्रियों और उनसे जुड़े भूमि आवंटन के मामलों में निष्पक्ष जांच को आगे बढ़ाने के बजाय महत्वपूर्ण फाइलों को दबाने का काम किया है।

नासिक और पुणे में बिगड़ते हालात और उड़ता महाराष्ट्र की चेतावनी

राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी गई है कि नासिक और पुणे जैसे प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक शहर नशीले पदार्थों के बढ़ते जाल के कारण पंजाब की तर्ज पर उड़ता महाराष्ट्र बनने की ओर अग्रसर हैं। इसके साथ ही, स्थानीय नागरिकों द्वारा नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शनों का मजाक उड़ाने के लिए भाजपा नेताओं की आलोचना की गई है। विपक्षी बयान में कहा गया कि जो दल राज्य को नशामुक्त बनाने की बात कर रहा है, उसी के दौर में तस्कर, अवैध शराब निर्माता, भांग-गांजा विक्रेता और सिगार-सिगरेट के कारोबारी बेखौफ काम कर रहे हैं।

भ्रष्टाचार और धन के नशा पर भी चौतरफा घेराव

शराब उत्पादन से जुड़ी चीनी मिलों के मालिकों के भाजपा में शामिल होने पर सवाल उठाते हुए पूछा गया कि क्या गृह विभाग का नेतृत्व कर रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन शराब कारोबारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाएंगे या फिर अभियान को कमजोर करने के लिए नियमों में बदलाव किया जाएगा। इसके अलावा यह बात भी रेखांकित की गई कि नशा केवल चरस, गांजा या ब्राउन शुगर जैसे अवैध रसायनों तक सीमित नहीं है। राज्य में भ्रष्टाचार और धन का नशा भी समान रूप से हावी है, और महाराष्ट्र को इस प्रशासनिक व राजनीतिक मदहोशी से भी मुक्त कराने की सख्त जरूरत है।

सवाल-जवाब

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को नशामुक्त बनाने के लिए क्या लक्ष्य तय किया है?
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को साल 2029 तक पूरी तरह से नशामुक्त बनाने का प्रशासनिक संकल्प लिया है।
उद्धव ठाकरे गुट ने सरकार के 2029 के लक्ष्य पर क्या सवाल उठाए हैं?
उद्धव ठाकरे गुट ने इस पहल को पाखंडी और तमाशा करार देते हुए पूछा है कि 10 साल से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बाद भी सरकार ड्रग्स व्यापार को रोकने में क्यों विफल रही।
विपक्ष ने किन शहरों का जिक्र करते हुए 'उड़ता महाराष्ट्र' की चेतावनी दी है?
विपक्षी नेताओं ने नासिक और पुणे का हवाला देते हुए चेतावनी दी है कि बिगड़ती कानून व्यवस्था के कारण ये क्षेत्र राज्य को 'उड़ता महाराष्ट्र' में बदल रहे हैं।
विपक्षी गुट ने राज्य के गृह विभाग पर क्या आरोप लगाए हैं?
आरोप लगाया गया है कि गृह विभाग ने नासिक, पुणे और सतारा में मिली अवैध विनिर्माण इकाइयों, भूमि आवंटन और केमिकल पिल कारखानों की जांच को दबाया है।
विपक्ष ने नशाखोरी की परिभाषा में किन अन्य मुद्दों को शामिल किया है?
विपक्ष ने कहा कि नशा केवल चरस, गांजा या भूरी चीनी जैसे अवैध पदार्थों तक सीमित नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार और धन का नशा भी राज्य के लिए एक बड़ा खतरा है।
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