नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच संसद सदस्य कंगना रनौत अपने बयानों के कारण एक बार फिर राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गई हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और रील्स को उल्टी लाने वाला करार दिया। कंगना ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों की परवरिश पर सवाल खड़े किए और कुछ हिंदू लड़कियों के आचरण पर टिप्पणी करते हुए उन्हें इस पीढ़ी का गटर तक कह दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने तर्क दिया कि लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई किसी भी सरकार पर सड़कों पर उतरकर दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई व्यवस्था में बदलाव चाहता है तो उसे आंदोलन का रास्ता चुनने के बजाय चुनाव लड़ना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का स्पष्ट समर्थन किया। यह पहला मौका नहीं है जब कंगना अपने बयानों को लेकर विवादों में आई हैं। इससे पहले भी वे देश के विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर अपनी टिप्पणियों के चलते कई बार सुर्खियों में रह चुकी हैं।
1. किसान आंदोलन और बांग्लादेश जैसी स्थिति का दावा
अगस्त 2024 में अपनी फिल्म 'इमरजेंसी' के प्रचार के दौरान कंगना रनौत ने वर्ष 2020-21 के दौरान हुए ऐतिहासिक किसान आंदोलन को लेकर अत्यंत संवेदनशील दावा किया था। उन्होंने कहा था कि यदि उस समय स्थिति को समय रहते नियंत्रित नहीं किया जाता, तो भारत में भी बांग्लादेश जैसा गंभीर संकट पैदा हो सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान आंदोलन विदेशी शक्तियों से प्रेरित था और धरना स्थलों पर हिंसा तथा गंभीर आपराधिक गतिविधियां घटित हुई थीं। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखा आक्रोश फैल गया। विवाद को बढ़ता देख भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आधिकारिक रूप से दूरी बना ली और स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है और पार्टी की ओर से उन्हें ऐसे बयान देने के लिए अधिकृत नहीं किया गया था।
2. वर्ष 1947 की आजादी को बताया था 'भीख'
नवंबर 2021 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए कंगना ने देश की स्वतंत्रता पर एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने दावा किया था कि 1947 में भारत को जो स्वतंत्रता मिली थी वह केवल 'भीख' थी, जबकि देश को वास्तविक आजादी वर्ष 2014 में तब मिली जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार सत्ता में आई। इस टिप्पणी के बाद देशभर में विभिन्न राजनीतिक दलों, स्वतंत्रता सेनानियों के संगठनों और नागरिक समाज ने कड़ी आपत्ति जताई। आलोचकों ने इसे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान करार दिया और कई संगठनों ने राष्ट्रपति से उनका पद्म श्री सम्मान वापस लेने की मांग उठाई।
3. मुंबई की तुलना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से करना
सितंबर 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद उपजे घटनाक्रम के दौरान कंगना ने महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए थे। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए उन्होंने लिखा था कि उन्हें मुंबई में असुरक्षा का अहसास हो रहा है और यह शहर उन्हें 'पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK)' जैसा महसूस होने लगा है। इस बयान के कारण महाराष्ट्र की राजनीति में भारी भूचाल आ गया था। इसके तुरंत बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने पाली हिल स्थित उनके कार्यालय के एक हिस्से को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया था। हालांकि, बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण और दुर्भावना से प्रेरित करार दिया था।
4. किसान प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणियां और चंडीगढ़ एयरपोर्ट थप्पड़ कांड
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चले आंदोलन के दौरान कंगना ने प्रदर्शनकारी किसानों पर लगातार तीखे हमले किए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर आंदोलन में शामिल एक वयोवृद्ध महिला की गलत पहचान उजागर करते हुए दावा किया था कि वह 100 रुपये की दिहाड़ी पर किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो जाती हैं। इसके अलावा उन्होंने आंदोलनकारियों के एक वर्ग को उग्रवादी और खालिस्तानी कहकर भी संबोधित किया था। इन बयानों को लेकर कृषि समुदायों में गहरा असंतोष था। जून 2024 में जब कंगना चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर थीं, तब सीआईएसएफ (CISF) की एक महिला कांस्टेबल ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था। बाद में सुरक्षाकर्मी के इस कदम को किसान आंदोलन पर कंगना की पुरानी टिप्पणियों से जोड़कर देखा गया।
5. पश्चिम बंगाल चुनाव हिंसा पोस्ट और एक्स अकाउंट सस्पेंशन
वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद राज्य में हुई चुनावी हिंसा पर कंगना ने कई विवादित पोस्ट की थीं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य में कठोर कदम उठाने की अपील की थी और पश्चिम बंगाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनकी इन टिप्पणियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (तत्कालीन ट्विटर) ने हिंसा भड़काने और अपनी सेवा शर्तों का उल्लंघन माना। इसके परिणामस्वरूप एक्स ने उनके आधिकारिक अकाउंट को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। लगभग दो वर्ष के प्रतिबंध के बाद वर्ष 2023 में उनका अकाउंट दोबारा बहाल किया गया।
6. बॉलीवुड इंडस्ट्री को 'गटर' बताना
वर्ष 2020 में सुशांत सिंह राजपूत मामले से जुड़ी ड्रग्स जांच के दौरान कंगना ने हिंदी फिल्म उद्योग पर व्यापक आरोप लगाए थे। उन्होंने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि बॉलीवुड का एक बड़ा वर्ग नशीले पदार्थों के सेवन में लिप्त है और इस उद्योग को 'गटर' की संज्ञा दी थी। उनके इस बयान का कई वरिष्ठ कलाकारों, निर्देशकों और फिल्म निर्माण से जुड़े संगठनों ने पुरजोर विरोध किया था और इसे पूरी इंडस्ट्री की छवि खराब करने वाला प्रयास बताया था।
7. जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था पर सवाल
कंगना रनौत कई मौकों पर देश की मौजूदा जाति आधारित आरक्षण नीति की खुलकर आलोचना कर चुकी हैं। उनका तर्क रहा है कि जाति पर आधारित आरक्षण व्यवस्था योग्यता और प्रतिभा के विकास में बाधा उत्पन्न करती है। उन्होंने सुझाव दिया था कि भविष्य में आरक्षण का आधार केवल आर्थिक स्थिति होना चाहिए। उनके इस रुख का दलित, आदिवासी और बहुजन संगठनों ने कड़ा विरोध किया और इसे भारतीय संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
8. राहुल गांधी की पारिवारिक और धार्मिक पृष्ठभूमि पर टिप्पणी
अगस्त 2024 में लोकसभा में जाति जनगणना के विषय पर हुई तीखी बहस के बाद कंगना ने सोशल मीडिया पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमला बोला था। उन्होंने राहुल गांधी की पारिवारिक और धार्मिक पृष्ठभूमि को लेकर टिप्पणियां की थीं। इस बयान के बाद संसद के मानसून सत्र के दौरान और बाहर व्यापक राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया। विपक्षी नेताओं ने इसे संसदीय मर्यादा का उल्लंघन और व्यक्तिगत चरित्र हनन करार देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।



















