बुधवार को संसद के मॉनसून सत्र का तीसरा दिन भी भारी हंगामे और तीखी राजनीतिक खींचतान के नाम रहा। नीट परीक्षा को लेकर देश भर में चल रहे बड़े विवाद के बीच, अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए विपक्ष के तमाम सांसद आज पूरी तरह से काले कपड़े पहनकर सदन के भीतर पहुंचे।
प्रधानमंत्री आवास के पास सियासी हलचल
बुधवार का यह सांकेतिक विरोध प्रदर्शन असल में मंगलवार को हुई भारी उथल-पुथल की ही अगली कड़ी है। बीते दिन भी सदन के भीतर इतना ज्यादा बवाल हुआ था कि पूरी कार्यवाही को ही दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ गया था। इसके बाद सदन से सड़क तक अपना कड़ा विरोध जताते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत कई बड़े और वरिष्ठ नेता सीधे प्रधानमंत्री आवास के करीब पहुंचे और वहां धरने पर बैठ गए। कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) के समानांतर प्रदर्शन के बीच हुए इस हाई-प्रोफाइल धरने से मौके पर काफी अफरातफरी और तनाव का माहौल बन गया। हालात को काबू में करने के लिए अंततः सुरक्षा बलों को दखल देना पड़ा और भारी पुलिस बल ने सभी नेताओं को वहां से सुरक्षित हटा दिया।
विपक्ष की पांच प्रमुख मांगें और विरोध का कारण
धरना स्थल से बलपूर्वक हटाए जाने के ठीक बाद, राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने एक स्पष्ट पांच सूत्रीय मांग पत्र पेश किया। इन तमाम मांगों में सबसे ऊपर और सबसे अहम शर्त शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का उनके मौजूदा पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना है। इसके साथ ही, पूरा विपक्ष इस बात पर भी अड़ा हुआ है कि नीट पेपर लीक जैसे गंभीर विवाद पर खुद गृह मंत्री संसद के भीतर आकर एक विस्तृत और आधिकारिक बयान दें। सांसदों के काले लिबास पर स्थिति साफ करते हुए कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने मीडिया को बताया कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि कई मुद्दों का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह नाराजगी देश की राजधानी दिल्ली में बेबस छात्रों के साथ हुए अनुचित बर्ताव, छात्रों के भारी गुस्से के प्रति सरकार के बेहद ढुलमुल रवैये और कुर्सी पर जमे रहने की धर्मेंद्र प्रधान की जिद के खिलाफ एक सीधी बगावत है।
शिक्षा मंत्री का पलटवार और सरकार का पक्ष
विपक्ष के लगातार बढ़ते और तीखे दबाव के बीच, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी सामने आकर अपना और अपनी सरकार का कड़ा पक्ष रखा है। उन्होंने देश को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार नीट विवाद से जुड़े हर एक पहलू पर विस्तृत चर्चा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और इस गहरी समस्या का एक ठोस और स्थायी समाधान निकालने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने सीधे राहुल गांधी की नीयत पर बड़े सवाल उठाए और उन पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। प्रधान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता छात्रों की जायज और गंभीर चिंताओं को केवल एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और युवाओं के भविष्य के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं।



















