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नेताजी पर टिप्पणी मामले में स्वतः संज्ञान की मांग खारिज, CJI सूर्यकांत बोले कानून के तहत लाएं याचिकाराजनीति
13 अग॰ 2026, 1:22 pm (75 दिन पहले)· 1

नेताजी पर टिप्पणी मामले में स्वतः संज्ञान की मांग खारिज, CJI सूर्यकांत बोले कानून के तहत लाएं याचिका

नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर कथित विवादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वकील की स्वतः संज्ञान लेने की मांग को खारिज करते हुए नियमित याचिका दायर करने का निर्देश दिया है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक बयान देने वाले भाजपा के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज का मामला देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच गया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालतें हर विषय पर अपने स्तर से संज्ञान नहीं ले सकतीं। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कानून में तय प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है और इसके लिए उचित याचिका दायर की जानी चाहिए।

स्वतः संज्ञान के पीछे का कानूनी सिद्धांत और नियम

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्वतः संज्ञान की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने याचिकाकर्ता वकील से कहा कि स्वतः संज्ञान जैसी असाधारण शक्ति का इस्तेमाल केवल उन्हीं मामलों में किया जाना चाहिए, जहां पीड़ित पक्ष स्वयं न्याय मांगने के लिए अदालत पहुंचने में असमर्थ हो। पीठ ने वकील की क्षमता पर बात करते हुए पूछा कि जब एक सक्षम और जानकार वकील खुद इस मुद्दे को उठा रहा है, तो वे अदालत से स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध क्यों कर रहे हैं। अदालत का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति कानूनी रूप से सक्षम है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही याचिका लेकर आना चाहिए।

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किन परिस्थितियों में कदम उठाती है शीर्ष अदालत

सीजेआई सूर्यकांत ने इस दौरान पूर्व के कुछ विशिष्ट उदाहरण भी दिए। उन्होंने पर्यावरण सुरक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि जंगल अपनी रक्षा के लिए स्वयं अदालत में आकर बात नहीं कर सकते, इसलिए ऐसे मामलों में अदालत को आगे आना पड़ता है। इसके अलावा, उन्होंने एक 83 वर्षीय विधवा और उनके दृष्टिहीन पुत्र के मामले का भी उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि ऐसे असहाय और वंचित लोगों की देखरेख करने वाला कोई नहीं होता, जिस वजह से अदालत को स्वतः संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करना पड़ता है। हालांकि, मौजूदा मामले में ऐसी कोई असाधारण स्थिति नहीं पाई गई।

हेट स्पीच की जांच और याचिका दायर करने का निर्देश

सुनवाई में जब वकील ने पूर्व में एनसीईआरटी की किताब पर लिए गए स्वतः संज्ञान का संदर्भ दिया, तो पीठ के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने मामले की स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यह आरोप नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में लगाए गए आरोपों की जांच स्थापित कानूनी सिद्धांतों और तय मानकों के आधार पर ही की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने वकील को सलाह दी कि वे इस मामले में नियमों के अनुरूप एक औपचारिक याचिका दायर करें, जिसके बाद ही कानून के दायरे में रहकर सुनवाई की जाएगी।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में स्वतः संज्ञान लेने से इनकार किया?
सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा के राज्यसभा सांसद नागेंद्र राय उर्फ अनंत महाराज द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में स्वतः संज्ञान लेने से मना कर दिया।
सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता वकील को क्या सलाह दी?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील से कहा कि वे स्थापित कानूनी नियमों का पालन करते हुए एक उचित याचिका दायर करें।
सीजेआई सूर्यकांत के अनुसार स्वतः संज्ञान किन परिस्थितियों में लिया जाता है?
सीजेआई के अनुसार स्वतः संज्ञान केवल असाधारण परिस्थितियों में लिया जाता है, जैसे पर्यावरण संरक्षण या जब प्रभावित लोग खुद अदालत आने में असमर्थ हों।
अदालत ने किन उदाहरणों के जरिए स्वतः संज्ञान के नियम समझाए?
अदालत ने जंगलों की सुरक्षा और एक 83 वर्षीय विधवा तथा उनके अंधे बेटे के मामले का उदाहरण देकर स्वतः संज्ञान की सीमाएं समझाईं।
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