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चौकीदार चोर है टिप्पणी विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की मानहानि याचिका खारिज कीराजनीति
8 सित॰ 2026, 1:41 pm (49 दिन पहले)· 4

चौकीदार चोर है टिप्पणी विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की मानहानि याचिका खारिज की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि केस को रद्द करने से इनकार कर दिया है, जिससे राहुल गांधी को अब मुकदमे का सामना करना होगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कानूनी मोर्चे पर झटका देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दी गई कथित ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि केस को रद्द करने से इनकार कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अब इस मामले में मुकदमे का सामना करना होगा, क्योंकि अदालत ने उनकी उस दलील को नहीं माना जिसमें शिकायत को ही सुनवाई योग्य नहीं बताया गया था।

क्या है पूरा विवाद

यह मामला राहुल गांधी की उस टिप्पणी से जुड़ा है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ‘चौकीदार चोर है’ कहा था। इस बयान के बाद एक शिकायतकर्ता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था। राहुल गांधी ने इस समन को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनकी ओर से दलील दी गई कि यह शिकायत कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं है, क्योंकि उनके बयान में न तो किसी राजनीतिक दल का नाम लिया गया था और न ही किसी ऐसे वर्ग को निशाना बनाया गया था जिसे ‘पहचाने जा सकने वाला या निश्चित वर्ग’ कहा जा सके।

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हाईकोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस नितिन बोरकर की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राहुल गांधी की इस दलील को खारिज कर दिया। बेंच ने साफ कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है, इसलिए वह अपने आप में एक स्पष्ट रूप से पहचान योग्य संस्था मानी जाएगी। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि शिकायतकर्ता का दावा है कि वह पिछले दो दशक से भारतीय जनता पार्टी का सक्रिय सदस्य रहा है। बेंच के मुताबिक, प्रथम दृष्टया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो खुद भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं, को ‘कमांडर-इन-थीफ’ कहने वाली टिप्पणी को केवल पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित मानकर नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस बयान का असली मकसद क्या था और इसका पार्टी के आम सदस्यों पर क्या असर पड़ा, यह सवाल मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही तय किया जाएगा।

राहुल गांधी के वकील की दलील

राहुल गांधी की तरफ से पेश हुए वकील सुदीप पासबोला ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि कथित एक्स पोस्ट में राहुल गांधी ने न तो भारतीय जनता पार्टी और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल का नाम लिया था। उन्होंने कहा कि इस बयान में किसी ‘पहचाने जा सकने वाले या निश्चित वर्ग’ को निशाना नहीं बनाया गया, इसलिए इस मामले में कोई स्पष्ट रूप से पीड़ित व्यक्ति या समूह मौजूद ही नहीं है। इसी आधार पर उनकी दलील थी कि शिकायतकर्ता के पास आपराधिक मानहानि का मुकदमा चलाने का कानूनी अधिकार नहीं बनता।

महाराष्ट्र सरकार का पक्ष

राहुल गांधी की इस याचिका का महाराष्ट्र सरकार ने भी विरोध किया। महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल ने अदालत में कहा कि हाईकोर्ट को यह परखना होगा कि मानहानि के अपराध के लिए जरूरी सभी कानूनी तत्व इस मामले में मौजूद हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि क्या यह टिप्पणी वाकई किसी निश्चित और पहचान योग्य समूह से जुड़ी हुई थी। सरकार के इस रुख के बाद कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज करते हुए मामले को ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ने का रास्ता साफ कर दिया।

सवाल-जवाब

राहुल गांधी के खिलाफ यह मानहानि केस किस टिप्पणी को लेकर है?
यह केस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी से जुड़ा है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या फैसला दिया?
हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मानहानि केस रद्द करने की मांग की गई थी।
इस मामले की सुनवाई किस जज ने की?
मामले की सुनवाई जस्टिस नितिन बोरकर की सिंगल बेंच ने की।
हाईकोर्ट ने भाजपा को लेकर क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल होने के नाते एक स्पष्ट रूप से पहचान योग्य संस्था है।
राहुल गांधी के वकील की मुख्य दलील क्या थी?
वकील सुदीप पासबोला ने कहा कि बयान में कोई पार्टी या निश्चित वर्ग निशाना नहीं बनाया गया, इसलिए शिकायतकर्ता को मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं है।
महाराष्ट्र सरकार का इस मामले में क्या रुख रहा?
महाराष्ट्र सरकार ने भी राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया और कहा कि मानहानि के जरूरी तत्व मौजूद हैं या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इनकार के बाद यह मामला अब मजिस्ट्रेट कोर्ट में ट्रायल के लिए आगे बढ़ेगा।
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