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नई दिल्ली में तालिबान ने पहली बार आयोजित किया विक्ट्री डे, भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ रहे हैं कूटनीतिक रिश्तेराजनीति
17 अग॰ 2026, 10:52 pm (70 दिन पहले)· 2

नई दिल्ली में तालिबान ने पहली बार आयोजित किया विक्ट्री डे, भारत और अफगानिस्तान के बीच बढ़ रहे हैं कूटनीतिक रिश्ते

अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के करीब पांच साल बाद नई दिल्ली में पहली बार विक्ट्री डे रिसेप्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में तालिबान के चार्ज डी’अफेयर्स नूर अहमद नूर और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

अफगानिस्तान में तालिबान के शासन की वापसी के लगभग पांच साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भारत की राजधानी नई दिल्ली में पहली बार एक विशेष विक्ट्री डे रिसेप्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सोमवार को संपन्न हुए इस महत्वपूर्ण आयोजन की मेजबानी भारत में तालिबान के चार्ज डी’अफेयर्स नूर अहमद नूर ने संभाली, जो दोनों देशों के बीच बदलते राजनयिक समीकरणों को दर्शाता है।

कार्यक्रम में शामिल हुए प्रमुख राजनयिक और अधिकारी

इस कार्यक्रम में मुंबई स्थित अफगानिस्तान के महावाणिज्यदूत डॉ. इकरामुद्दीन कामिल ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही, भारतीय विदेश मंत्रालय के पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान डिवीजन के संयुक्त सचिव एम. आनंद प्रकाश भी इस समारोह में विशेष रूप से मौजूद रहे, जो इस उच्च स्तरीय कूटनीतिक मेलजोल को रेखांकित करता है।

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भारत और तालिबान के बीच बढ़ रहा संवाद

नूर अहमद नूर इसी साल जनवरी के महीने में नई दिल्ली पहुंचे थे और वह तालिबान के सत्ता संभालने के बाद भारत में नियुक्त होने वाले पहले अफगान अधिकारी हैं। भारत आने के बाद से ही उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय के तमाम अधिकारियों के साथ कई दौर की औपचारिक बैठकें की हैं। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत और तालिबान के बीच आपसी संपर्क में लगातार वृद्धि हो रही है, हालांकि यह भी सच है कि भारत सरकार ने अभी तक तालिबान प्रशासन को आधिकारिक तौर पर कूटनीतिक मान्यता प्रदान नहीं की है।

युद्ध का दौर पीछे छूटने का दावा

विक्ट्री डे के इस अवसर पर बोलते हुए नूर अहमद नूर ने अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर प्रकाश डाला और कहा कि उनका देश अब संघर्ष के लंबे और काले दौर से पूरी तरह आगे निकल चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान अब देश में स्थिरता, विकास और आर्थिक मजबूती के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने 15 अगस्त को अफगानिस्तान के इतिहास का एक बेहद अहम दिन बताया और दावा किया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान देश की सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक स्थिरता काफी मजबूत हुई है।

कानून-व्यवस्था और पुनर्निर्माण पर मुख्य फोकस

अफगान अधिकारी के मुताबिक, वर्तमान सरकार का पूरा ध्यान अब हथियारों और युद्ध के बजाय देश की कानून-व्यवस्था, आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर केंद्रित है। इसके साथ ही आम नागरिकों को बेहतर और सुगम सार्वजनिक सेवाएं मुहैया कराने के लिए भी सरकार की ओर से लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जनता का जीवन बेहतर हो सके।

ऊर्जा से लेकर कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा

नूर अहमद नूर ने जानकारी दी कि अफगानिस्तान इस समय ऊर्जा, खनन, कृषि और परिवहन जैसे तमाम महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारी निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मान रहा है। उन्होंने टीएपीआई गैस पाइपलाइन और कासा-1000 जैसी बड़ी क्षेत्रीय परियोजनाओं का विशेष उल्लेख करते हुए इन्हें अफगानिस्तान की आर्थिक तरक्की के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

क्षेत्रीय संघर्ष से दूर कनेक्टिविटी पर जोर

तालिबान का यह मानना है कि अफगानिस्तान की भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल कभी भी दूसरे देशों के बीच आपसी संघर्ष का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके विपरीत, इस स्थिति को व्यापार, बेहतर कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग का एक मजबूत माध्यम बनाया जाना चाहिए ताकि पूरे इलाके में शांति और समृद्धि आ सके।

सभी देशों के साथ मजबूत रिश्तों की मंशा

अफगान चार्ज डी’अफेयर्स ने स्पष्ट किया कि उनका देश दुनिया के सभी देशों के साथ आपसी सम्मान, किसी भी तरह के बाहरी दखल से मुक्ति और साझा हितों के बुनियादी सिद्धांतों पर अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है। उनके अनुसार, अफगानिस्तान का मुख्य उद्देश्य अब क्षेत्रीय देशों के साथ अपने व्यापार को बढ़ाना और आर्थिक सहयोग को नए आयाम देना है।

भारत के साथ रिश्तों को बताया बेहद जरूरी

भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों पर बात करते हुए नूर अहमद नूर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों पक्षों के बीच संवाद और संपर्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने राजनीतिक स्तर पर बातचीत, आर्थिक साझेदारी और निरंतर संपर्क को न केवल भारत और अफगानिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए अनिवार्य शर्त बताया।

भारतीय नेतृत्व के प्रति जताया आभार

उन्होंने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और देश के शीर्ष नेतृत्व का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अफगानिस्तान के अधिकारों का समर्थन किया है। नूर ने यह उम्मीद भी जताई कि आने वाले समय में भारत और अफगानिस्तान के बीच आपसी सहयोग के दायरे में और अधिक विस्तार देखने को मिलेगा।

भारत के दृष्टिकोण से इस आयोजन का महत्व

नई दिल्ली की धरती पर पहली ऐसे विक्ट्री डे रिसेप्शन का आयोजन ठीक ऐसे समय में हुआ है जब दोनों पक्षों के बीच आधिकारिक बातचीत और मेलजोल में तेजी आ रही है। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद पर लगाम, व्यापारिक हित और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से अफगानिस्तान हमेशा से बहुत महत्वपूर्ण रहा है। वहीं दूसरी तरफ, तालिबान के लिए भी भारत जैसे विशाल और प्रभावशाली क्षेत्रीय देश के साथ संवाद की चैनल खुली रखना आर्थिक और कूटनीतिक रूप से बेहद अहम है।

सवाल-जवाब

नई दिल्ली में तालिबान के विक्ट्री डे रिसेप्शन की मेजबानी किसने की?
इस कार्यक्रम की मेजबानी भारत में तालिबान के चार्ज डी’अफेयर्स नूर अहमद नूर ने की।
इस कार्यक्रम में भारत सरकार की ओर से कौन शामिल हुआ?
विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान डिवीजन के संयुक्त सचिव एम. आनंद प्रकाश इस समारोह में मौजूद थे।
नूर अहमद नूर भारत कब आए थे?
नूर अहमद नूर इसी साल जनवरी में नई दिल्ली पहुंचे थे।
क्या भारत ने तालिबान सरकार को मान्यता दे दी है?
नहीं, भारत ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·70 दिन पहले

एक फैशन और ब्यूटी एडिटर के रूप में, कूटनीतिक बदलावों का यह दौर सांस्कृतिक और आर्थिक मोर्चों पर भी नए संकेत देता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के उच्च-स्तरीय आयोजनों और क्षेत्रीय आर्थिक प्राथमिकताओं जैसे ऊर्जा और कृषि निवेश का प्रभाव लाइफस्टाइल, वैश्विक ब्रांडों की पहुंच और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी पड़ सकता है। हालांकि भारत ने औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन यह बदलता कूटनीतिक परिदृश्य भविष्य में क्षेत्रीय व्यापार और मानवीय दृष्टिकोण से जीवनशैली के समीकरणों को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·70 दिन पहले

यह घटनाक्रम भारत की व्यावहारिक कूटनीति में एक बड़ा बदलाव दिखाता है, जहाँ राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के तहत नई दिल्ली और काबुल के बीच अनौपचारिक संवाद बढ़ रहा है। हालांकि आधिकारिक मान्यता अभी दूर है, लेकिन ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बढ़ती सक्रियता आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापारिक समीकरणों को नया आकार दे सकती है।

Michael Anderson@michael-anderson·70 दिन पहले

यह घटनाक्रम भारत की सामरिक प्राथमिकताओं में एक व्यावहारिक बदलाव को दर्शाता है। भले ही औपचारिक मान्यता अभी लंबित है, लेकिन नई दिल्ली में इस तरह की उच्च स्तरीय उपस्थिति यह संकेत देती है कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों, जैसे ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, को सुरक्षित रखने के लिए संवाद बनाए रखने को प्राथमिकता दे रहा है। भविष्य में यह दृष्टिकोण दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·70 दिन पहले

नई दिल्ली में तालिबान के इस विक्ट्री डे रिसेप्शन और भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव की मौजूदगी से यह साफ है कि कूटनीतिक रिश्ते अब केवल औपचारिक बैठकों से आगे बढ़कर व्यावहारिक जुड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि भारत ने आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन टीएपीआई और कासा-1000 जैसी ऊर्जा परियोजनाओं के संदर्भ में यह भू-आर्थिक बदलाव क्षेत्रीय व्यापार, निवेश और सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·70 दिन पहले

अपराध, जाँच और कानून-व्यवस्था के एक रिपोर्टर के तौर पर यह भू-राजनीतिक बदलाव आंतरिक सुरक्षा और सीमा पार के संगठित अपराध नियंत्रण के नजरिए से बेहद संवेदनशील है। अफगानिस्तान में स्थिर कानून-व्यवस्था और ऊर्जा परियोजनाओं की सुरक्षा केवल आर्थिक मामला नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और खुफिया समन्वय पर भी सीधा असर पड़ेगा। भारत और तालिबान के बीच बढ़ता यह व्यावहारिक जुड़ाव भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख और क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र को नया आयाम दे सकता है।

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