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नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म से सियासी हलचल, राशिद अल्वी के आरोप पर राम कदम का पलटवारराजनीति
6 सित॰ 2026, 7:50 pm (5 दिन पहले)· 4

नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म से सियासी हलचल, राशिद अल्वी के आरोप पर राम कदम का पलटवार

नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर सफल होने के साथ-साथ अब सियासी विवाद में भी घिर गई है, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भाजपा पर धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया तो भाजपा के राम कदम ने पलटवार करते हुए इसे बेवजह का विवाद बताया.

नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' रिलीज के बाद से लगातार सुर्खियों में है, लेकिन अब वजह सिर्फ इसकी कहानी या दर्शकों का प्यार नहीं, बल्कि इससे जुड़ी सियासी बयानबाजी भी बन गई है. 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में पहुंची इस फिल्म ने कम बजट में बनने के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर ऐसी कमाई की है जिसकी उम्मीद बहुत कम लोगों को थी. फिल्म को लेकर अब कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच बयानों का सिलसिला भी शुरू हो गया है, और कुछ नेताओं ने साफ आरोप लगाया है कि इसके सहारे धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है.

बाबा के गांव से मिला भरपूर प्यार

सियासी बहस से अलग हटकर देखें तो नीम करौली बाबा के गांव और उनसे जुड़े लोगों की ओर से फिल्म को दिल खोलकर सराहा जा रहा है. बाबा को करीब से जानने वाले लोगों की यह सकारात्मक प्रतिक्रिया भी उन वजहों में शामिल है जिसने कम बजट के बावजूद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर आगे बढ़ाया है. दिलचस्प यह है कि जिस वक्त फिल्म बाबा से जुड़े लोगों का दिल जीत रही है, ठीक उसी वक्त कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच इसे लेकर बयानबाजी भी तेज हो गई है.

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कांग्रेस का हमला: चुनाव भी राम मंदिर के नाम पर

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने फिल्म को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी लगातार धर्म को राजनीति से जोड़ती आई है. अल्वी ने कहा, "जब से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई है, तब से वह धर्म को राजनीति में ले आई है." उनका कहना था कि हर चुनाव राम मंदिर के नाम पर लड़ा जाता रहा है और अब 'हनुमान अंश' जैसी फिल्मों के जरिए भी लोगों की धार्मिक आस्था को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है. अल्वी ने आगे कहा कि आस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करना और उसके जरिए लोगों के मन पर असर डालना ठीक नहीं है. उनके मुताबिक ऐसी फिल्मों का सहारा लेकर धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है.

राम कदम का पलटवार: हर बात विवाद नहीं होनी चाहिए

भाजपा नेता राम कदम ने इन आरोपों पर बिल्कुल अलग रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि नीम करौली बाबा को देश भर में बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा और आस्था के साथ देखते हैं और उन्हें हनुमान जी का परम भक्त माना जाता है. राम कदम ने भी यह नहीं बताया कि उन्होंने फिल्म देखी है या नहीं, लेकिन उनका कहना था कि किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले फिल्म का विषय समझना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि हर मुद्दे को विवाद बना देना सही तरीका नहीं है और किसी भी बात पर चर्चा तर्क और तथ्यों के आधार पर ही होनी चाहिए, न कि जल्दबाजी में लगाए गए आरोपों के आधार पर.

कांग्रेस सांसद की अपील: पहले देखें, फिर राय बनाएं

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने इस विवाद पर संतुलित रुख दिखाया. उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म पर टिप्पणी करने से पहले उसे देखना जरूरी है और बिना देखे उसके बारे में राय बना लेना ठीक नहीं. मनोज कुमार ने फिल्मकारों से भी अपील की कि भारत जैसे विविधतापूर्ण और धर्मनिरपेक्ष देश में सिनेमा बनाते वक्त अलग-अलग समुदायों की भावनाओं का खयाल रखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक फिल्मों को समाज को आपस में जोड़ने का जरिया बनना चाहिए, न कि किसी तरह के बंटवारे की वजह.

सहायक निर्देशक से मुख्य किरदार तक का सफर

'हनुमान अंश' की कहानी विशाल चतुर्वेदी ने लिखी है और फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने ही संभाला है. फिल्म में नीम करौली बाबा की भूमिका शोभिनव सत्या ने निभाई है, और उनकी यह भूमिका मिलने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है. शोभिनव सत्या शुरुआत में फिल्म से सहायक निर्देशक के तौर पर जुड़े थे, लेकिन जब मुख्य भूमिका निभाने वाले अभिनेता की तबीयत खराब हो गई, तो उन्हें बाबा की भूमिका निभाने का मौका मिल गया. निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इसके बाद उनका लंबा ऑडिशन लिया और फिर उन्हें फिल्म की मुख्य भूमिका के लिए चुना. फिल्म की यह अप्रत्याशित सफलता और अब इससे जुड़ा सियासी विवाद, दोनों ही इसे लगातार चर्चा में बनाए हुए हैं.

सवाल-जवाब

फिल्म 'हनुमान अंश' किस पर आधारित है?
यह फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित है.
फिल्म कब रिलीज हुई थी?
फिल्म 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई थी.
राशिद अल्वी ने क्या आरोप लगाया?
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर धर्म को राजनीति में लाने और फिल्म के जरिए धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया.
भाजपा नेता राम कदम ने इस पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि हर मुद्दे को विवाद बनाना सही नहीं है और किसी भी बात पर चर्चा तर्क व तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए.
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार की क्या राय थी?
उन्होंने कहा कि बिना फिल्म देखे उस पर राय बनाना उचित नहीं है और फिल्मकारों को अलग-अलग समुदायों की भावनाओं का खयाल रखना चाहिए.
फिल्म में नीम करौली बाबा का किरदार किसने निभाया?
यह भूमिका शोभिनव सत्या ने निभाई है.
शोभिनव सत्या को यह भूमिका कैसे मिली?
वे शुरुआत में फिल्म से सहायक निर्देशक के तौर पर जुड़े थे, लेकिन मुख्य अभिनेता के अस्वस्थ होने के बाद लंबे ऑडिशन के जरिए उन्हें बाबा की भूमिका मिली.
फिल्म का निर्देशन किसने किया?
फिल्म का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है, जिन्होंने इसकी कहानी भी लिखी है.
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' की सफलता के बाद राजनीतिक बयानबाजी इस बात का संकेत है कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विषयों पर आधारित सिनेमा अब चुनावी नरेटिव का हिस्सा बनता जा रहा है। जब राजनेता आस्था से जुड़े मुद्दों पर आमने-सामने आते हैं, तो यह कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के लिए एक संवेदनशील क्षेत्र बन जाता है। इस तरह के विवादों से ध्रुवीकरण बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे स्थानीय प्रशासन और पुलिस तंत्र को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ सकती है ताकि किसी भी सार्वजनिक आयोजन या प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

नीम करौली बाबा पर केंद्रित फिल्म 'हनुमान अंश' की बॉक्स ऑफिस सफलता यह साबित करती है कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कथाएं अब व्यापक वाणिज्यिक दर्शक वर्ग को आकर्षित कर रही हैं। हालांकि, इस सिनेमाई सफलता के इर्द-गिर्द उपजी राजनीतिक बयानबाजी और कांग्रेस-भाजपा के बीच छिड़ा आरोप-प्रत्यारोप का दौर यह दर्शाता है कि सांस्कृतिक पहचान के मुद्दे वित्तीय बाज़ार और जनमानस दोनों को गहराई से प्रभावित करते हैं। जब आस्था और मनोरंजन का यह संयोजन राजनीतिक मंच पर पहुंचता है, तो इसका असर निवेशक sentiment और मीडिया नरेटिव दोनों पर पड़ता है, जिससे ऐसे प्रोजेक्ट्स की व्यावसायिक और सामाजिक गतिशीलता पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

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