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ओबीसी आरक्षण में सेंध नहीं लगेगी, कानूनी दायरे में होगा मराठा कोटा: देवेंद्र फडणवीसराजनीति
8 सित॰ 2026, 6:15 pm (48 दिन पहले)· 7

ओबीसी आरक्षण में सेंध नहीं लगेगी, कानूनी दायरे में होगा मराठा कोटा: देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि मराठा आरक्षण के नाम पर अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे से कोई कटौती नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर दिया कि सरकार का हर कदम संविधान और कानून के सख्त दायरे में उठाया जाएगा।

नवी मुंबई के उरण इलाके में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जेएनपीटी-नया उमरगाम खंड के लोकार्पण समारोह के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने यह बात उस वक्त कही जब कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल का अनशन मंगलवार को अपने 11वें दिन में दाखिल हो चुका था। इस दौरान मराठा समुदाय की मांगों और इस मुद्दे पर सरकार द्वारा की गई देर रात की बैठकों को लेकर मीडिया में विभिन्न अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर मुख्यमंत्री ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की।

कानूनी और संवैधानिक दायरे की अनिवार्यता

देवेंद्र फडणवीस ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए इस बात पर खास जोर दिया कि मराठा समुदाय को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए जो भी कदम उठाए जाएंगे, वे पूरी तरह से संवैधानिक और कानूनी कसौटी पर खरे उतरने चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ऐसे किसी भी शॉर्टकट या असांवधानिक उपाय से बचा जाना चाहिए जो अदालत की न्यायिक समीक्षा में टिक न पाए। सरकार का यह स्पष्ट संकल्प है कि मराठों को उनका हक दिलाते वक्त यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी अन्य वर्ग के अधिकारों पर आंच न आए और अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन हो।

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अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों की पूरी सुरक्षा

आरक्षण के इस संवेदनशील और जटिल मसले पर आगे बोलते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी स्थिति में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी के अधिकारों में कटौती करके मराठा समुदाय को आरक्षण नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कभी भी एक वर्ग का हक छीनकर दूसरे वर्ग को नहीं देगी और ओबीसी कोटे का पूरा संरक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि प्रशासन ने पूर्व में भी मराठा समाज के कल्याण के लिए कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए हैं जो सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका जमीनी लाभ लोगों तक पहुंच रहा है।

मनोज जरांगे पाटिल के आंदोलन और बातचीत के रास्ते

मनोज जरांगे पाटिल के चल रहे विरोध प्रदर्शन और उनकी तमाम नई मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से हमेशा से संवाद और बातचीत के दरवाजे खुले रखे गए हैं। यदि किसी भी पक्ष को सरकारी फैसलों, कार्यप्रणाली या दावों को लेकर कोई संशय, दुविधा या कमी महसूस होती है, तो वे सामने आकर अपनी बात रख सकते हैं। सरकार बैठकर सभी पक्षों की शंकाओं का समाधान करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दोहराया कि राज्य प्रशासन और सत्तारूढ़ गठबंधन ने हमेशा से मराठा समुदाय के मुद्दों को गंभीरता से लिया है और जरूरत के मुताबिक आगे भी उचित कदम उठाए जाएंगे।

मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांगें और पृष्ठभूमि

मराठा आरक्षण के लिए मुखर होकर आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने गत 29 अगस्त से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अपना अनशन शुरू किया था। उनकी प्रमुख मांगों में मराठा समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी कोटे के अंतर्गत शामिल करना और आरक्षण का लाभ देना शामिल है। इसके अलावा उनकी मांगों में हैदराबाद तथा सतारा के गजट रिकॉर्ड्स को लागू करना और योग्य मराठा नागरिकों को कुनबी जाति के आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी करना भी प्रमुख रूप से शामिल है।

कुनबी समुदाय और ओबीसी कार्यकर्ताओं की चिंताएं

कुनबी एक पारंपरिक कृषि से जुड़ा हुआ समुदाय है जिसे आधिकारिक रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में रखा गया है, जिसके कारण उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है। दूसरी ओर, जब से मराठा समुदाय को ओबीसी कोटे में शामिल करने की मांग उठी है, तब से अन्य पिछड़ा वर्ग के कार्यकर्ता भी गांवों में सक्रिय हो गए हैं। ओबीसी वर्ग के लोगों ने भी अपने संवैधानिक अधिकारों और कोटे में मिलने वाली हिस्सेदारी की रक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन और आंदोलन शुरू कर दिए हैं, जिससे यह पूरा मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में काफी संवेदनशील बना हुआ है।

सवाल-जवाब

मनोज जरांगे पाटिल ने अनशन कब और कहां शुरू किया था?
मनोज जरांगे पाटिल ने 29 अगस्त से जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अपना अनशन शुरू किया था।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मराठा आरक्षण पर क्या मुख्य बयान दिया?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार संविधान के तहत काम करेगी लेकिन किसी अन्य समुदाय के हिस्से में कटौती कर मराठों को आरक्षण नहीं दिया जाएगा।
मराठा आंदोलनकारी मुख्य रूप से कौन सा प्रमाण पत्र मांग रहे हैं?
आंदोलनकारी मराठा समुदाय के पात्र सदस्यों के लिए कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
कुनबी समुदाय किस श्रेणी के अंतर्गत आता है?
कुनबी समुदाय को आधिकारिक रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री ने किस परियोजना के उद्घाटन के अवसर पर यह बयान दिया?
मुख्यमंत्री ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जेएनपीटी-नया उमरगाम खंड के उद्घाटन के दौरान यह बयान दिया।
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