बीते कुछ दिनों में पेपर लीक को लेकर मचे हंगामे के बाद संसद में सोमवार को नया एंटी पेपर लीक बिल पेश किया गया और मंगलवार को इस पर लोकसभा में विस्तृत चर्चा हुई। इस बहस की शुरुआत केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की, जिन्होंने एक दिन पहले ही यही बिल सदन में पेश किया था। जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि यह संशोधन बिल पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट 2024 को और मजबूत बनाने के मकसद से लाया गया है, ताकि परीक्षाओं में धांधली रोकने वाला कानून पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो सके। चर्चा के दौरान उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए कई पेपर लीक मामलों का हवाला भी दिया।
बिल को बताया छात्रों के भविष्य की रक्षा वाला कानून
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सोमवार को पेश हुआ यह बिल दरअसल पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 में संशोधन है, जिसे इसी सरकार ने पहले लाया था। उनके मुताबिक, वह पुराना कानून आजाद भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला कानून था। उन्होंने कहा कि पुराना बिल और आज का संशोधन, दोनों मिलकर देश के छात्रों और युवाओं के कल्याण की रक्षा के लिए सरकार की गहरी प्रतिबद्धता दिखाते हैं। जितेंद्र सिंह ने इसे पीएम मोदी के उस संकल्प से भी जोड़ा, जिसमें कहा गया है कि देश के बच्चों के भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने इस संशोधन को भारतीय संसद के इतिहास में मील का पत्थर बताया।
जितेंद्र सिंह ने गिनाए यूपीए सरकार के सात पेपर लीक मामले
चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुए पेपर लीक मामलों की पूरी फेहरिस्त सदन के सामने रखी। उन्होंने बताया कि 2009 में रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। इसके बाद 2011 में ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन में भी यही हुआ। 2012 में नई दिल्ली स्थित एम्स की एंट्रेंस परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जबकि 2013 में महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन में गड़बड़ी सामने आई। इसके अलावा 2010 में उत्तर प्रदेश में बी.एड एंट्रेंस एग्जामिनेशन, 2012 में तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन और 2009 में वेस्ट बंगाल जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम में भी पेपर लीक की घटनाएं हुई थीं। जितेंद्र सिंह ने कहा, "अगर मैं इनकी लिस्ट बनाता रहा, तो बिल पर चर्चा नहीं कर पाऊंगा।" उन्होंने कहा कि इन्हीं बार-बार दोहराई गई घटनाओं की वजह से मौजूदा सरकार को परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए एक खास कानून बनाने की जरूरत महसूस हुई।
एनटीए के गठन पर पीएम मोदी की तारीफ की
जितेंद्र सिंह ने आगे बताया कि केंद्र सरकार के तहत चार बड़ी भर्ती एजेंसियां काम करती हैं, यूपीएससी, स्टाफ सिलेक्शन कमीशन यानी एसएससी, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड यानी आरआरबी और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल। इसी तरह उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए काम करती है, जिसका गठन भी मौजूदा सरकार ने ही 2017 में किया था। उन्होंने बताया कि एक साझा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी बनाने की सिफारिश सबसे पहले 1992 में कांग्रेस पार्टी की अगुवाई वाली सरकार के समय की गई थी। इसके बाद 2010 में, यूपीए के कार्यकाल के दौरान भी एक समिति ने यही सुझाव दोहराया था। जितेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि किन कारणों या निजी हितों की वजह से इस सुझाव पर उस वक्त ठीक से विचार नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि इस लिहाज से पीएम मोदी और मौजूदा सरकार की तारीफ की जानी चाहिए, क्योंकि इसने वह अधूरा काम पूरा किया, जिसे पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था।
पुराने कानून में सजा और जुर्माने से जुड़े कितने बदलाव
जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह संशोधन कानून को और सख्त बनाने और तेज न्याय सुनिश्चित करने के मकसद से लाया जा रहा है, ताकि परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल हो सके। उन्होंने बताया कि पुराने कानून की धारा 10 की उप-धारा 1 में दोषी व्यक्ति के लिए कम से कम 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था। नए संशोधन के तहत अब यह सजा बढ़ाकर कम से कम 5 से 10 साल और जुर्माना बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक कर दिया गया है। इसी तरह 2024 के कानून में सर्विस प्रोवाइडर के लिए जुर्माना 1 करोड़ रुपये तक तय था, जिसे अब बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। 2024 के कानून में प्रोवाइडर को अगले 4 साल तक कोई भी परीक्षा आयोजित करने से रोकने का प्रावधान था, नए संशोधन में यह अवधि बढ़ाकर 8 साल कर दी गई है। संगठित अपराध, यानी जहां माफिया गिरोह शामिल हो, ऐसे मामलों में पहले सजा 5 से 10 साल और जुर्माना 1 करोड़ रुपये तक था। अब इसे बढ़ाकर सजा 7 से 10 साल और जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि सबसे अहम बात तेज न्याय सुनिश्चित करना है, जिसका जिक्र पीएम मोदी ने भी वीडियो संदेश के जरिए किया था। उन्होंने बताया कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और ऐसे मामलों की जांच 2 महीने की तय समय सीमा के भीतर पूरी करनी होगी।
इस तरह जितेंद्र सिंह ने एक तरफ यूपीए सरकार के दौर में हुए पेपर लीक मामलों की लंबी फेहरिस्त गिनाई, तो दूसरी तरफ सजा और जुर्माने में भारी बढ़ोतरी के प्रस्तावों के जरिए संशोधन बिल का पक्ष रखा। मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा जारी रही, जिसमें सांसदों ने सजा, जुर्माने और नई फास्ट-ट्रैक कोर्ट व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों पर अपनी राय रखी।



















