नीट पेपर लीक विवाद को लेकर आज दिल्ली में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर एक बड़ा प्रदर्शन किया, जिसकी अगुवाई राहुल गांधी ने की। इस धरने में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ मौजूद रहे, जबकि आम आदमी पार्टी के नेता इस दौरान नदारद दिखे और पार्टी ने खुद को इस विरोध प्रदर्शन से पूरी तरह अलग रखा।
अखिलेश यादव का साथ, AAP की दूरी
जहां आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के इस धरने से किनारा किया, वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव खुलकर राहुल गांधी के समर्थन में सामने आए और प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। सपा प्रमुख की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रूप से और दिलचस्प बना दिया, क्योंकि विपक्षी खेमे के भीतर ही धरने को लेकर अलग-अलग रुख खुलकर सामने आ गए।
केजरीवाल की आपत्ति, 'कॉकरोच जनता पार्टी' पर तंज
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाया कि आखिर राहुल गांधी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर के ठीक बाहर धरना देने की ज़रूरत ही क्यों पड़ी। पार्टी ने आगे यह भी आरोप लगाया कि यह पूरा कदम असल में 'कॉकरोच जनता पार्टी' की रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद पहले से चल रहे दूसरे विरोध प्रदर्शनों को कमज़ोर करना है।
वांगचुक के अनशन और जंतर मंतर आंदोलन का ज़िक्र
आम आदमी पार्टी की एक पोस्ट में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने CJP के धरने की धार कुंद करने के मकसद से राहुल गांधी को अपने आवास के ठीक बाहर बिठा दिया। पोस्ट में बताया गया कि वांगचुक पिछले 23 दिनों से देश के करोड़ों युवाओं के हक में आमरण अनशन पर डटे हैं, और जंतर मंतर पर युवाओं का आंदोलन लगातार जारी है। इसमें 20 जुलाई को युवाओं के साथ हुई कथित बर्बर पिटाई का हवाला देते हुए कहा गया कि कांग्रेस पिछले एक महीने से इस आंदोलन को कोसती रही है, और अब राहुल गांधी युवाओं से जंतर मंतर छोड़कर अपने धरने में शामिल होने की अपील कर रहे हैं।



















