केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल ही में जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और अमित शाह की राष्ट्रपति से हुई मुलाकात के बाद इन कयासों को और बल मिला है। हालांकि, मंत्रियों की परिषद में फेरबदल की चर्चा काफी समय से चल रही थी, लेकिन इन हालिया घटनाक्रमों ने इस प्रक्रिया में तेजी आने के संकेत दिए हैं।
बदलाव की तारीखों को लेकर कयास
कैबिनेट में इस बड़े फेरबदल के समय को लेकर राजनीतिक हलकों में दो अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक, यह बदलाव बेहद जल्द यानी 28 या 29 जून को ही देखने को मिल सकता है। वहीं, दूसरी चर्चा यह है कि यह फेरबदल संसद के आगामी मानसून सत्र के संपन्न होने के बाद किया जाएगा। मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलने वाला है, जिसके बाद ही मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। अंतिम समय तक फैसलों को गोपनीय रखना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का एक अहम हिस्सा रहा है, जिससे इस बदलाव को लेकर सस्पेंस लगातार बना हुआ है।
गठबंधन के नए साथियों को मौका देने की तैयारी
इस बार के कैबिनेट विस्तार में विपक्षी दलों का साथ छोड़कर आने वाले नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से उद्धव ठाकरे गुट और टीएमसी से अलग हुए कुछ सांसदों को नई कैबिनेट में जगह मिल सकती है। उद्धव गुट से पाला बदलकर आए संजय दीना पाटिल को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को भी कैबिनेट रैंक की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी का साथ छोड़ने वाले नेताओं में काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय के नामों की चर्चा सबसे आगे है, जिनमें से किसी एक को मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाया जा सकता है।
संगठन में वापसी और युवाओं की एंट्री
सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाने के लिए कुछ बड़े बदलाव किए जा सकते हैं, जिसके तहत वरिष्ठ मंत्रियों को पार्टी के सांगठनिक कार्यों में वापस भेजा जा सकता है। केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी को वापस संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जिससे उनकी जगह किसी नए चेहरे को मंत्री बनाया जा सके। इसी तरह, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को भी सांगठनिक भूमिका में भेजा जा सकता है और उनके स्थान पर भी नए चेहरे की नियुक्ति की जा सकती है। कई अन्य वरिष्ठ मंत्रियों को भी संगठन में भेजकर उनके स्थान पर ऊर्जावान और युवा चेहरों को कैबिनेट में शामिल करने की योजना है।
विपक्ष के हमलों के बीच मंत्रियों को समर्थन
फेरबदल की इन तमाम चर्चाओं के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के निशाने पर चल रहे मंत्रियों के प्रति अपना मजबूत समर्थन भी दर्शाया है। 25 जून को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू करने में उनकी भूमिका की जमकर सराहना की। यह बधाई संदेश ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक मामले को लेकर इंडी गठबंधन और कॉक्रोच पार्टी समेत पूरा विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा हुआ है। ऐसे नाजुक समय में प्रधानमंत्री का यह संदेश उनके प्रति मजबूत राजनीतिक समर्थन का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।













