अयोध्या का दीपोत्सव हर साल अपनी भव्यता, विशाल स्वरूप और नए रिकॉर्ड बनाने के लिए देश-दुनिया में चर्चा का केंद्र रहता है, लेकिन इस बार आयोजन से ठीक पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। फैजाबाद यानी अयोध्या के स्थानीय समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने सार्वजनिक रूप से यह बात कही है कि वह इस क्षेत्र के चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं, इसके बावजूद उन्हें इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण नहीं भेजा गया है। उनका कहना है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से निमंत्रण मिलने या न मिलने का कोई मलाल नहीं है, लेकिन इस प्रकार के बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में स्थानीय जनता की भागीदारी और उनकी जमीनी समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाना उचित नहीं है। शनिवार को दसवें दीपोत्सव का भव्य आयोजन संपन्न हो रहा है, जिसमें राम की पैड़ी और सरयू नदी के तट पर स्थित कुल 56 घाटों पर करीब 30 लाख दीये जलाने की विशाल तैयारी की गई है। इस ऐतिहासिक महोत्सव में भाग लेने के लिए उपराष्ट्रपति सी पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विशेष रूप से अयोध्या पहुंचे और उन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत की।
दीपोत्सव का ऐतिहासिक सफर और इस बार का आयोजन
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दीपोत्सव मनाने की शानदार शुरुआत साल 2017 में की गई थी। इसके बाद से हर साल यहां जलाए जाने वाले दीयों की संख्या में लगातार इजाफा होता गया और यह आयोजन अब पूरी तरह से अयोध्या की नई पहचान के साथ जुड़ चुका है। इस बार भी इस महोत्सव को बेहद बड़े पैमाने पर आयोजित किया जा रहा है। इस साल दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर को पड़ रहा है, जबकि दीपोत्सव का यह भव्य कार्यक्रम उससे एक दिन पहले यानी शनिवार को ही मनाया जा रहा है। शहर के कोने-कोने को रोशनी और फूलों से सजाया गया है, जिससे देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा और संबोधन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को तय कार्यक्रम के तहत अयोध्या पहुंचे। उन्होंने दीपोत्सव के पावन अवसर पर शहर के 500 साल के लंबे इतिहास, ऐतिहासिक राम मंदिर आंदोलन और पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या में हुए बुनियादी बदलावों को दर्शाने वाली एक विशेष प्रदर्शनी का गहराई से अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव के इस दसवें संस्करण के मौके पर अपना संदेश देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आयोजन केवल कुछ लाख दीप जलाने या कोई नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के भव्य पुनर्जागरण और अयोध्या की प्राचीन ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान को दोबारा मजबूती से स्थापित करने का एक जीवंत प्रतीक है। उन्होंने वहां मौजूद तमाम लोगों से यह अपील की कि जब राम जन्मभूमि परिसर में दीये प्रज्वलित किए जाएं, तो शहर का हर एक घर और हर आंगन भी रोशनी से जगमगा उठना चाहिए। योगी ने रामराज्य की परिकल्पना को समाज के विकास की रोशनी से जोड़ते हुए कहा कि यह प्रकाश समाज के अंतिम पायदान पर खड़े सबसे गरीब व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
अवधेश प्रसाद और दीपोत्सव विवाद की पूरी पृष्ठभूमि
सांसद अवधेश प्रसाद की ओर से दिया गया यह बयान इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अयोध्या की राजनीतिक जमीन पर साल 2024 के लोकसभा आम चुनाव के परिणामों के बाद से उनका राजनीतिक कद काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। समाजवादी पार्टी ने फैजाबाद लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन सांसद लल्लू सिंह को चुनावी मैदान में शिकस्त देकर बड़ी जीत हासिल की थी। राम मंदिर के भव्य निर्माण और उसके बाद हुई प्राण प्रतिष्ठा के ठीक बाद आए इस चुनाव परिणाम में बीजेपी की हार ने अयोध्या को राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा कर दिया था, जिसके बाद से यहां का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुका है।
स्थानीय सांसद को निमंत्रण न मिलने का मामला
ऐसी परिस्थितियों में दीपोत्सव जैसे इतने बड़े सरकारी और भव्य आयोजन में क्षेत्र के स्थानीय सांसद को ही आमंत्रित न किए जाने का यह पूरा मामला केवल प्रशासनिक शिष्टाचार या प्रोटोकॉल का सवाल बनकर नहीं रह जाता है। इसे अयोध्या में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के बीच चल रही तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में भी खुलकर देखा जा रहा है। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच जोर-शोर से भुनाने का प्रयास कर सकती है। हालांकि, प्रशासन की तरफ से अब तक ऐसा कोई भी आधिकारिक और स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है, जिससे यह पुष्टि हो सके कि सांसद को निमंत्रण क्यों नहीं भेजा गया था।
दीपोत्सव पर पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब सांसद अवधेश प्रसाद ने दीपोत्सव के इस सरकारी कार्यक्रम में आमंत्रण न मिलने का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया हो। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी उन्होंने यह गंभीर आरोप लगाया था कि उन्हें दीपोत्सव के कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया है। उस समय उनके उस बयान पर पलटवार करते हुए स्थानीय बीजेपी विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने सामने आकर यह कहा था कि सांसद महोदय को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आधिकारिक निमंत्रण दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह दर्शन करने के लिए वहां नहीं पहुंचे थे।
राजनीतिक बयानबाजी और भविष्य के संकेत
अयोध्या का यह दीपोत्सव अब केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान यह उत्तर प्रदेश की सक्रिय राजनीति का भी एक बहुत बड़ा प्रतीक बन चुका है। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी इस आयोजन को अयोध्या के चहुंमुखी विकास, राम मंदिर आंदोलन की सफलता और अपनी सांस्कृतिक पहचान की बहाली से जोड़कर देखती है, तो वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी स्थानीय नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याओं, किसानों की जमीनों के मुआवजे, कारोबारियों की दिक्कतों और विकास योजनाओं के लाभ के समान वितरण जैसे मुद्दों को लगातार उठाती रही है। अवधेश प्रसाद द्वारा लगाया गया यह आरोप कि उन्हें निमंत्रण नहीं मिला, इस चल रही राजनीतिक बहस को और अधिक हवा देता है। एक तरफ जहां सरकार 30 लाख दीपों के प्रज्वलन और भव्य कार्यक्रमों के जरिए अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने रख रही है, वहीं दूसरी तरफ सपा सांसद यह तीखा सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इस आयोजन में शहर के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और आम स्थानीय लोगों को पर्याप्त जगह दी जा रही है। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अयोध्या की धरती पर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और अधिक तेज हो सकती है।



















