दीवाली के पटाखों से अपनी कार और बाइक को यूं बचाएं, इन जरूरी बातों का रखें ध्यानसोनिया गांधी की किताब में अरहर दाल का जिक्र, घर पर ऐसे तैयार करें देसी घी और लहसुन के तड़के वाली स्वादिष्ट रेसिपीघर की शोभा बढ़ाने वाला स्नेक प्लांट, रात में भी देता है ऑक्सीजन और क्या इससे आते हैं सांप?धनुष ने साई पल्लवी की अदाकारी पर लुटाया प्यार, फिल्म रामायण में सीता के रोल को बताया एकदम सहीन्यूजीलैंड में गुरनूर बरार का शानदार प्रदर्शन, 2027 वनडे विश्व कप के लिए मजबूत की दावेदारीअयोध्या में दीपोत्सव पर जगमगाए लाखों दीये, उत्तर प्रदेश को लेकर सामने आया बड़ा बयानअमेज़न के एलेक्सा फॉर शॉपिंग में आया टेक्स्ट सपोर्ट, बिना बोले भी होगी खरीदारीफैंसी गॉगल्स बिजनेस से हर दिन होगी दमदार कमाई, कम निवेश में ऐसे शुरू करें दुकानऋषिकेश के योगाचार्य से जानिए सर्दियों में क्यों जरूरी है सूर्य नमस्कार8 नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली, जानें लक्ष्मी पूजन और अभ्यंग स्नान का सही समय
पश्चिम बंगाल एसआईआर ट्रिब्यूनल से एक और पूर्व जज का इस्तीफा, बिस्वजीत बसु ने छोड़ी समितिराजनीति
7 नव॰ 2026, 6:36 pm (5 घंटे पहले)· 0

पश्चिम बंगाल एसआईआर ट्रिब्यूनल से एक और पूर्व जज का इस्तीफा, बिस्वजीत बसु ने छोड़ी समिति

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए बनाए गए न्यायाधिकरण से एक और पूर्व न्यायाधीश ने इस्तीफा दे दिया है। पिछले कुछ समय में पैनल छोड़ने वाले यह चौथे सदस्य बन गए हैं।

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य से जुड़ी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती सामने आ रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज बिस्वजीत बसु ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर न्यायाधिकरण से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने अपने इस कदम के पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है और कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवींद्र विठ्ठलराव घुगे को पत्र लिखकर पद छोड़ने की जानकारी दी है।

न्यायाधिकरण छोड़ने वाले चौथे सदस्य

बिस्वजीत बसु के इस फैसले के साथ ही इस विशेष पैनल को छोड़ने वाले जजों की संख्या चार हो गई है। इससे पहले पूर्व न्यायाधीश इंद्रजीत चटर्जी ने भी इस जिम्मेदारी से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने अपने फैसले के पीछे कार्यालय आने-जाने में होने वाली लंबी दूरी का जिक्र किया था। उनका कहना था कि रोजाना 22 किलोमीटर का सफर तय करना उनके लिए काफी कठिन हो रहा था। उन्होंने शुरुआत में यह मानकर इस कार्यभार को स्वीकार किया था कि यह प्रक्रिया महज दो से तीन महीनों में पूरी हो जाएगी, लेकिन जिस तरह से मामलों की पेंडेंसी बढ़ रही है, उससे साफ है कि इस काम में काफी लंबा वक्त लगेगा।

ये भी पढ़ें

लगातार हो रहे हैं इस्तीफे

इस पैनल से किनारा करने वाले जजों की फेहरिस्त में अन्य नाम भी शामिल हैं। पूर्व जस्टिस रंजीत कुमार बाग ने भी व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस समिति से नाता तोड़ लिया था, हालांकि उन्होंने अपने पत्र में विस्तृत वजहों का स्पष्ट रूप से जिक्र नहीं किया था। इसके अलावा, कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवज्ञानम ने भी पारिवारिक परेशानियों का हवाला देते हुए न्यायाधिकरण की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

क्या है न्यायाधिकरण का गठन

जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के खास निर्देशों के आधार पर इस न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। इस पैनल में कुल 19 सेवानिवृत्त न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट शामिल किए गए थे। इसका मुख्य उद्देश्य उन तमाम नागरिकों को एक मंच और तंत्र उपलब्ध कराना था, जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए थे, ताकि वे अपने दावों की सुनवाई करवाकर दोबारा नाम जुड़वा सकें। अब चार सदस्यों के बाहर होने के बाद 19 लोगों की इस टीम में सदस्यों की संख्या घट गई है।

लाखों मतदाताओं के मामलों पर असमंजस

पश्चिम बंगाल में लगभग 60 लाख मामलों को न्यायिक समीक्षा और निर्णय के लिए लंबित रखते हुए अंतिम मतदाता सूची को 28 फरवरी के दिन प्रकाशित किया गया था। चुनाव आयोग की तरफ से यह स्पष्ट किया गया था कि जैसे-जैसे न्यायिक कार्यवाही आगे बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे पूरक सूचियों को भी जारी किया जाएगा।

अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल नवंबर के महीने में एसआईआर की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने से पहले राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या 7,66,37,529 थी। इसके बाद जब दिसंबर में मसौदा मतदाता सूची सबके सामने आई, तो उसमें से 58,20,899 नाम हटा दिए गए थे। वहीं, इस साल 28 फरवरी को जब अंतिम सूची का प्रकाशन हुआ, तब तक हटाए गए नामों का कुल आंकड़ा 63,66,952 तक पहुंच चुका था।

इस पूरे ट्रिब्यूनल के कंधों पर इन्हीं हटाए जाने वाले नामों से जुड़े मुकदमों और दावों के निस्तारण की बड़ी जिम्मेदारी है। आने वाले समय में जो भी पूरक सूचियां प्रकाशित होंगी, उनमें इन्हीं न्यायिक जांच के नतीजों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। जिन पात्र आवेदकों के दावे वैध पाए जाएंगे और स्वीकार किए जाएंगे, उन्हें मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा दर्ज कराने का मौका मिल सकेगा।

सवाल-जवाब

बिस्वजीत बसु कौन हैं?
बिस्वजीत बसु कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज हैं जिन्होंने हाल ही में एसआईआर न्यायाधिकरण से इस्तीफा दिया है।
बिस्वजीत बसु ने अपना इस्तीफा किसे सौंपा?
उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवींद्र विठ्ठलराव घुगे को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा भेजा है।
न्यायाधिकरण से इस्तीफा देने वाले वे कौन से नंबर के सदस्य हैं?
वे इस विशेष पैनल से इस्तीफा देने वाले चौथे सदस्य बन गए हैं।
इस न्यायाधिकरण का गठन क्यों किया गया था?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर उन लोगों के लिए एक तंत्र प्रदान करने हेतु इसका गठन किया गया था जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।
अंतिम मतदाता सूची कब प्रकाशित की गई थी?
पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp