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पानी और सीवरेज से त्रस्त पाली को महिला महापौर से बड़ी उम्मीदें, जनता बोली अब बदलनी चाहिए तस्वीरराजनीति
8 सित॰ 2026, 6:22 pm (48 दिन पहले)· 4

पानी और सीवरेज से त्रस्त पाली को महिला महापौर से बड़ी उम्मीदें, जनता बोली अब बदलनी चाहिए तस्वीर

नगर निगम चुनाव से पहले पाली के अलग-अलग वार्डों में सीवरेज ओवरफ्लो, टूटी सड़कों और पेयजल संकट से जूझ रही जनता को इस बार महिला महापौर से उम्मीद है कि शहर की तस्वीर बदलेगी.

राजस्थान के पाली शहर में नगर निगम चुनाव से पहले लोगों के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है, क्या इस बार सच में उनकी बरसों पुरानी समस्याएं खत्म होंगी. पीने के पानी की किल्लत और सीवरेज की गंदगी से जूझ रहे शहरवासियों को इस बार एक अलग वजह से उम्मीद बंधी है, पाली की कमान पहली बार किसी महिला महापौर के हाथ में जाने वाली है.

पाली नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं और इन पर भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस के अलावा कई निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं. लेकिन इस चुनाव की सबसे खास बात यह है कि महापौर की कुर्सी इस बार महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित है, यानी पाली की अगली पहली नागरिक कोई महिला ही होगी. अलग-अलग वार्डों में रहने वाले लोगों से बात करने पर एक बात साफ निकलकर आई, बीते पांच सालों के कामकाज से लोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और सीवरेज व पेयजल जैसी बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं. फिर भी शहरवासियों के मन में यह उम्मीद जिंदा है कि जब कमान महिला महापौर के हाथ में आएगी तो शायद अगले पांच सालों में पाली की सूरत बदल जाए.

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वार्ड 63, सीवरेज ओवरफ्लो से परेशान लोग

वार्ड 63 के लोगों का कहना है कि सीवरेज की समस्या ने उनका जीना मुश्किल कर रखा है. नालियां अक्सर ओवरफ्लो होती हैं और समय पर उनकी सफाई नहीं होती. सड़कें इस कदर टूटी हुई हैं कि आए दिन हादसे होते रहते हैं. इलाके के लोगों का कहना है कि जिस दिन ये बुनियादी काम समय पर होने लगेंगे, उसी दिन लगेगा कि उनका चुना हुआ प्रत्याशी वाकई उनके लिए काम कर रहा है.

जनता चाहती है पढ़ी-लिखी और ईमानदार महापौर

महापौर की सीट महिला के लिए आरक्षित होने पर वार्ड 63 के निवासी हरीश ने कहा कि महापौर ऐसी होनी चाहिए जो जनता के बीच रहकर उनकी बात सुने. उनके मुताबिक अगर महापौर शिक्षित और युवा हो तो वह जनता के बीच रहकर बेहतर तरीके से काम कर पाएगी. हरीश ने साफ कहा, "सबसे बड़ी बात ईमानदार महिला महापौर होनी चाहिए जिसको हम प्राथमिकता देंगे." यानी शिक्षा और युवा उम्र से भी ज्यादा जनता के लिए ईमानदारी की कसौटी अहम है.

वार्ड 62 की शिकायत, सीवरेज के साथ बिजली भी परेशानी

वार्ड 62 के लोगों ने बताया कि यहां नालियां हमेशा भरी रहती हैं, सीवरेज की समस्या पुरानी है और साथ ही बिजली भी अक्सर गुल हो जाती है. लोगों का कहना है कि पिछले पांच सालों में भारतीय जनता पार्टी के जो पार्षद रहे, उन्होंने जनता की इन समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकाला, जिससे लोग परेशान हो चुके हैं. अब वार्ड में कांग्रेस के प्रत्याशी मैदान में हैं और लोगों को उम्मीद है कि वह उनका काम करेंगे. निवासियों के मुताबिक पाली की सबसे बड़ी दिक्कत सीवरेज ही है, इसी वजह से सड़कें टूटती हैं और इलाकों में गंदगी फैली रहती है.

बारिश में डूब जाती हैं सड़कें, महिलाओं का दर्द

वार्ड की महिलाओं ने कहा कि अगर गंदगी और सीवरेज की समस्या का समाधान हो जाए तो यह उनके लिए सबसे बड़ी राहत होगी. महिलाओं के मुताबिक बारिश के मौसम में मोहल्लों के अंदर ड्रेनेज सिस्टम इतना खराब हो जाता है कि सड़कों से लेकर घरों तक पानी भर जाता है और बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है. महिलाओं को उम्मीद है कि इस बार महिला महापौर बनेगी तो वह पाली की इस सबसे बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करेगी, ताकि लोग बारिश आने की दुआ करें, न कि यह चाहें कि बारिश ही न हो. उनके शब्दों में बारिश के दिनों में पाली किसी नर्क से कम नजर नहीं आता.

पीने के पानी के लिए आज भी ट्रेन के भरोसे पाली

पाली की एक और बड़ी समस्या पानी की सप्लाई से जुड़ी है. जब अच्छी बारिश नहीं होती तो जवाई बांध नहीं भर पाता, ऐसे हालात में जोधपुर से ट्रेन के जरिए पाली तक पानी मंगवाना पड़ता है. जबकि एक दौर ऐसा भी था जब पाली ही जोधपुर की प्यास बुझाया करता था. क्षेत्रवासियों का सवाल है कि जब रोहट तक पानी की पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है तो उसे पाली तक क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा. उनका कहना है कि अगर यह पाइपलाइन पाली तक पहुंच जाए तो पानी की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो सकती है और जनता को पीने के पानी के लिए तरसना नहीं पड़ेगा.

इन तमाम वार्डों की शिकायतों से एक बात एकदम साफ है, समस्या हर जगह लगभग एक जैसी है, सीवरेज, ड्रेनेज और पेयजल. अब देखना यह होगा कि पाली की पहली महिला महापौर इन बरसों पुरानी मांगों पर कितना खरा उतरती हैं, इसी पर आने वाले पांच सालों तक जनता की नजर रहेगी.

सवाल-जवाब

पाली नगर निगम में कुल कितने वार्ड हैं?
पाली नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं.
इस बार पाली में महापौर की सीट किसके लिए आरक्षित है?
इस बार महापौर की सीट महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित है.
पाली में लोगों की सबसे बड़ी शिकायत क्या है?
लोगों की सबसे बड़ी शिकायत सीवरेज ओवरफ्लो, टूटी सड़कें और पेयजल की किल्लत है.
बारिश के मौसम में पाली के हालात कैसे हो जाते हैं?
ड्रेनेज सिस्टम खराब होने से सड़कों और घरों में इतना पानी भर जाता है कि बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, लोग इसे नर्क जैसी स्थिति बताते हैं.
पानी की कमी होने पर पाली को पानी कैसे मिलता है?
जवाई बांध न भरने पर जोधपुर से ट्रेन के जरिए पाली को पानी मंगवाया जाता है.
वार्ड 62 के लोग किस पार्टी के प्रत्याशी से उम्मीद लगाए बैठे हैं?
वार्ड 62 के निवासियों को कांग्रेस के प्रत्याशी से उम्मीद है कि वह उनकी समस्याएं हल करेंगे.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 दिन पहले

पाली के नगर निगम चुनावों में बुनियादी सुविधाओं जैसे सीवरेज और पेयजल का मुद्दा प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है। महिला महापौर के लिए सीट आरक्षित होने से जमीनी स्तर पर नेतृत्व बदलने की उम्मीद जगी है, लेकिन असली परीक्षा चुनी जाने वाली प्रतिनिधि की होगी कि वह भ्रष्टाचार मुक्त रहकर इन पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान कैसे देती है।

Ravikash Gupta@ravikash·48 दिन पहले

पाली के इस स्थानीय चुनाव में बुनियादी ढांचे का संकट स्पष्ट रूप से वित्तीय कुप्रबंधन और प्राथमिकताओं की कमी को उजागर करता है। जब तक शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त वित्तीय संसाधन और पारदर्शी बजट आवंटन नहीं मिलता, तब तक सीवरेज और जलापूर्ति जैसी समस्याओं का दीर्घकालिक समाधान असंभव है। महिला नेतृत्व के आने से प्रशासनिक संवेदनशीलता बढ़ने की उम्मीद तो है, पर असली चुनौती कॉरपोरेट स्तर की जवाबदेही और तय समयसीमा में फंड के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने की होगी, तभी शहर की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर बदलेगी।

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